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Bihar: मदद न मिलने पर किसानों ने चंदे से बनाया पुल, प्रशासन ने तोड़ने की कोशिश की तो बुलडोजर के आगे लेट गए लोग

Sat, 29 Mar 2025 03:23 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sat, 29 Mar 2025 03:23 PM IST
सार

Purnea News: पूर्णिया से हैरत में डालने वाला एक मामला सामने आया है, जहां किसानों ने नेताओं और प्रशासन से मदद न मिलने पर खुद चंदा इकट्ठा कर पुल बना दिया। लेकिन प्रशासन उसे तोड़ने पहुंचा तो नाराज किसान बुल्डोडजर के सामने लेट गए। पढ़ें पूरी खबर...।

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Purnea: Farmers built bridge with donations administration tried to break it people lay down against bulldozer
खुद के चंदे से बनाए गए पुल को बचाने के लिए प्रशासन से भिड़ गए ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

बिहार के पूर्णिया जिले में किसानों और स्थानीय निवासियों ने अपनी जरूरतों को देखते हुए खुद के खर्चे पर एक पुल का निर्माण कर डाला। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड-4 में कारी कोशी नदी पर इस पुल को बनाने के लिए ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा किया और अपने संसाधनों से इसे पूरा किया। लेकिन जब निगम प्रशासन पुल को तोड़ने पहुंचा, तो किसानों ने विरोध करते हुए बुलडोजर के आगे लेटकर अपनी मजबूती का प्रदर्शन किया।


 
खेती के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करते थे किसान
जानकारी के मुताबिक, रहमतनगर वार्ड-4 से होकर बहने वाली कारी कोशी नदी ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी। नदी के एक ओर बसे किसान अपनी 200 बीघा कृषि भूमि तक पहुंचने के लिए हर रोज जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर थे। क्षेत्र के किसान बिरेन महलदार, मंटू कुमार, अनिल महलदार, बिजली देवी, उपेन्द्र महलदार और पारो देवी का कहना है कि वे इस समस्या से लंबे समय से जूझ रहे थे। उन्होंने कई बार सांसद, विधायक और अधिकारियों से पुल निर्माण की मांग की, लेकिन हर बार केवल झूठे आश्वासन ही मिले। चुनाव के समय वोट मांगने वाले नेता पुल बनाने का वादा कर जाते, लेकिन चुनाव खत्म होते ही कोई वापस नहीं आता। इसलिए आखिरकार 100 से अधिक किसानों ने चंदा इकट्ठा कर खुद पुल बनाने का निर्णय लिया।
 

Purnea: Farmers built bridge with donations administration tried to break it people lay down against bulldozer
खुद के चंदे से बनाए गए पुल को बचाने के लिए प्रशासन से भिड़ गए ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

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प्रशासन ने की पुल को तोड़ने की कोशिश
किसानों ने अपनी जरूरत के मुताबिक 50 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी। इसके बाद पुल निर्माण का काम शुरू हुआ और 80% काम पूरा हो गया, जबकि 20% बचा हुआ था। इसी बीच किसी ने प्रशासन को गलत सूचना दे दी कि यह अवैध निर्माण है। इसके बाद नगर निगम प्रशासन जेसीबी लेकर पुल तोड़ने पहुंच गया। जब किसानों को इस बात की भनक लगी, तो वे तुरंत वहां पहुंचे और बुलडोजर के आगे लेट गए। आक्रोशित किसानों के भारी विरोध को देखकर निगम प्रशासन को पीछे हटना पड़ा।
 
‘यह पुल किसानों के जीवन का सवाल’
स्थानीय समाजसेवी राजीव राय ने कहा कि यह पुल किसानों के लिए जीवनरेखा जैसा है। बारिश के दिनों में खेतों तक पहुंचना असंभव हो जाता है और हर साल पानी में डूबकर कई लोगों की जान जा चुकी है। किसानों को इस परेशानी से बचाने के लिए ही पुल बनाया गया था। उन्होंने कहा कि यह पुल लोगों के पैदल चलने के लिए बनाया गया है। इससे किसानों को नदी पार करने में मदद मिलेगी और जान जोखिम में डालने की जरूरत नहीं होगी।
 

Purnea: Farmers built bridge with donations administration tried to break it people lay down against bulldozer
खुद के चंदे से बनाए गए पुल को बचाने के लिए प्रशासन से भिड़ गए ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

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‘यह हमारी जमीन पर बना पुल’
नगर आयुक्त कुमार मंगलम ने कहा कि उन्होंने अमीन को पुल की माप-जोख कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। अगर यह निजी जमीन पर बना हुआ है, तो किसानों को इसके कागजात प्रस्तुत करने होंगे। वहीं, नगर निगम के सिटी मैनेजर पवन कुमार ने बताया कि हम वरीय अधिकारियों के आदेश पर पुल तोड़ने आए थे, लेकिन भारी विरोध को देखते हुए फिलहाल पीछे हटना पड़ा है।
 
किसानों की जीत या प्रशासन का फैसला? आगे क्या होगा...
फिलहाल, किसानों के विरोध के बाद प्रशासन ने पुल तोड़ने की योजना पर रोक लगा दी है। लेकिन आगे क्या होगा, यह नगर निगम की जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक आदेश पर निर्भर करेगा। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन हमारा पुल तोड़ता है, तो हम इसे फिर से बनाएंगे। जब सरकार हमारी नहीं सुन रही, तो हम अपने दम पर अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे।

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