फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Khudiram Bose: 19 साल की उम्र में शहीद हुए थे खुदीराम बोस, मुजफ्फरपुर जेल में नम आंखों से दी गई श्रद्धांजलि

Sun, 11 Aug 2024 01:17 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sun, 11 Aug 2024 01:17 PM IST
सार

Khudiram Bose: 19 साल की उम्र में शहीद हुए थे खुदीराम बोस, मुजफ्फरपुर जेल में नम आंखों दी गई श्रद्धांजलि
Bihar News: Khudiram Bose was martyred at age of 19, tribute was paid with moist eyes in Muzaffarpur jail
 

विज्ञापन
Bihar News: Khudiram Bose was martyred at age of 19, tribute was paid with moist eyes in Muzaffarpur jail
शहीद खुदीराम बोस को परिवार ने दी नम आंखों से श्रद्धांजलि - फोटो : अमर उजाला
देश के सबसे युवा क्रांतिकारी खुदीराम बोस के बलिदान दिवस पर केंद्रीय जेल (मुजफ्फरपुर जेल) रंगीन रौशनी से नहा गई। यहां जेल में अधिकारियों और गणमान्य लोगों ने फांसी स्थल पर पहुंचकर माल्यार्पण किया और उन्हें नम आंखों से याद किया। इस दौरान पश्चिम बंगाल के मिदनापुर से मुजफ्फरपुर पहुंचा शहीद क्रांतिकारी खुदीराम बोस का परिवार भी मौजूद रहा। तीन दिसंबर 1889 को पश्चिम बंगाल में जन्मे बलिदानी खुदीराम बोस को मुजफ्फरपुर जेल में 11 अगस्त 1908 को फांसी पर लटका दिया गया था। बोस महज 17 साल में बम फेंक कर क्रांतिकारी बन गए थे।

 
 
Bihar News: Khudiram Bose was martyred at age of 19, tribute was paid with moist eyes in Muzaffarpur jail
शहीद खुदीराम बोस को दी गई नम आंखों से श्रद्धांजलि - फोटो : अमर उजाला

बंगाल विभाजन से आहत थे 9वीं के छात्र खुदीराम बोस
खुदीराम बोस एक ऐसा नाम था जिसने देश की आजादी के लिए हंसते हुए अपने प्राण को फांसी पर झूलकर बलिदान दे दिया था। देश के लिए इस महान शहादत ने स्वतंत्रता संग्राम का रुख बदलकर रख दिया था। खुदीराम बोस को 11 अगस्त 1908 को महज 19 साल की उम्र में फांसी दे दी गई थी। अंग्रेजी सरकार खुदीराम की निडरता और वीरता से इतना डरी हुई थी कि उसने उन्हें इतनी कम उम्र में ही फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया। अपनी वीरता के लिए पहचाने जाने वाले खुदीराम बोस अपने हाथ में भगवत गीता को लेकर खुशी-खुशी फांसी के फंदे पर चढ़ गए थे। बताया जाता है कि खुदीराम बोस 9वीं कक्षा में ही स्वतंत्रता आंदोलन में कूद गए थे और 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में हुए आंदोलन में भी उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। खुदीराम की निडरता और आजादी के लिए उनके जज्बे को देखते हुए 28 फरवरी 1906 को सिर्फ 17 साल की उम्र में उन्हें पहली बार गिरफ्तार किया गया था। लेकिन वे अग्रेजों को चकमा देकर जेल से भाग निकले थे। हालांकि सिर्फ दो महीने के बाद उन्हें दोबारा पकड़ लिया गया था। इसके दो महीने बाद वह फिर से पकड़ लिए गए थे और फिर उनको सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई थी।
 

Bihar News: Khudiram Bose was martyred at age of 19, tribute was paid with moist eyes in Muzaffarpur jail
शहीद खुदीराम बोस को दी गई नम आंखों से श्रद्धांजलि - फोटो : अमर उजाला

सेशन जज पर बम फेंक कर दी थी चुनौती
बंगाल विभाजन से दुखी खुदीराम बोस ने अंग्रेजी हुकूमत को सबक सिखाने का प्रण लिया था। इस दौरान कई देशभक्तों को कड़ी सजा देने वाले किंग्सफोर्ड को सबक सिखाने के लिए खुदीराम बोस ने अपने एक साथी प्रफुल्लचंद चाकी के साथ मिलकर 30 अप्रैल 1908 को सेशन जज की गाड़ी पर बम फेंक दिया था। लेकिन गाड़ी में सेशन जज की जगह उसकी परिचित दो यूरोपीय महिलाएं एम कैनेडी और उसकी बेटी सवार थीं। उस हमले में वे दोनों महिलाएं मारी गईं थी, जिसका खुदीराम और प्रफुल्लचंद चाकी को काफी अफसोस हुआ था। हालांकि इस बम हमले में ब्रिटिश हुकूमत का किंग्सफोर्ड बच गया था। इस हमले के बाद खुदीराम अंग्रजों के निशाने पर आ गए और अंग्रेज पुलिस पूरी तरह से उनके पीछे लग गई। उसके बाद एक बार अंग्रजों ने वैनी स्टेशन पर खुदीराम और प्रफुल्लचंद को घेर लिया। अपने को पुलिस से घिरा देख प्रफुल्लचंद ने खुद को गोली मार ली, जबकि खुदीराम पकड़े गए। इसके बाद उनको मुजफ्फरपुर जेल में ले जाया गया। जहां 11 अगस्त 1908 को उन्हें फांसी पर लटका दिया गया।
 

विज्ञापन
विज्ञापन
Bihar News: Khudiram Bose was martyred at age of 19, tribute was paid with moist eyes in Muzaffarpur jail
शहीद खुदीराम बोस को दी गई नम आंखों से श्रद्धांजलि - फोटो : अमर उजाला

केंद्रीय जेल में प्रतिवर्ष इस दिवस को विशेष रूप में मनाए जाने की परंपरा हुई शुरू
अमर शहीद खुदीराम बोस के आज शहादत दिवस पर पूरा मुजफ्फरपुर जेल परिसर रंगीन बल्ब की रोशनी में नहाया हुआ है। इसको लेकर जेल प्रशासन द्वारा विशेष तैयारी की गई है। जेल के मुख्य गेट से लेकर फांसी स्थल तक का स्थान जगमग हो गया है। आज 11 अगस्त यानी रविवार को सुबह को चार बजे फांसी दिए जाने के वक्त को ध्यान रखते हुए मुजफ्फरपुर के आयुक्त तिरहुत रेंज के आईजी मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी, एसएसपी, सिटी एसपी, अनुमंडल पदाधिकारी सहित जेल सुपरिंटेंडेंट और कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। वहीं, इस दौरान पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले से खुदीराम बोस का परिवार भी पहुंचा हुआ था। सभी ने अपनी नम आंखों से अमर बलिदानी शहीद खुदीराम बोस को याद करते हुए उनके फांसी स्थल और तस्वीरों पर माल्यार्पण किया।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed