मेरा जन्म दक्षिण अमेरिकी देश गुएना के एक भारतवंशी राजनीतिक परिवार में हुआ। मेरे पिता गुएना की विपक्षी पार्टी के नेता थे, जो आगे चलकर देश के अटॉर्नी जनरल भी बने। यही वजह रही कि बचपन में ही मुझे अदालती कार्यवाही देखने का मौका मिल गया। दस साल की उम्र में मेरे पिता ने मुझे पढ़ने के लिए ब्रिटेन भेज दिया। मैंने लंदन के मोइरा हाउस गर्ल्स स्कूल से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद प्रतिष्ठित पॉलिटेक्निक ऑफ ईस्ट लंदन (ईस्ट लंदन यूनिवर्सिटी) से कानून की पढ़ाई की। पर मुझे विधि की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी, क्योंकि गुएना में उस वक्त मेरी जरूरत थी। ब्रिटेन वापस लौटने के बाद मैंने लंदन यूनिवर्सिटी से मानव संसाधन प्रबंधन और विपणन की डिग्रियां लीं।
गीना मिलर: वेटर बनीं, पर्चे बांटे और बन गईं ब्रिटेन की सबसे कामयाब महिला...
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लंदन में मुझे छोटी-सी उम्र में ही नस्लवाद का सामना करना पड़ा। बोर्डिंग स्कूल में होने वाले भेदभाव से तंग आकर मैं चौदह की उम्र में ईस्टबोर्न में रह रहे अपने भाई के साथ रहने लगी। भाई के साथ रहते हुए मुझे आर्थिक रूप से कई दिक्कतें आईं। जीवन यापन के लिए मैं उस उम्र में ही पार्ट टाइम काम करने लगी थी। कुछ वक्त के लिए तो मैंने घरेलू नौकरानी का भी काम किया। 21 साल की उम्र में मैंने शादी कर ली। दो साल बाद मैंने एक बेटी को जन्म दिया, जिसका मस्तिष्क अविकसित था। तब तक मेरी वित्तीय परेशानियां लगातार बनी रहीं। अतिरिक्त कमाई के लिए मैं पिज्जा रेस्टोरेंट में वेटर भी बनी और सर्द मौसम में मोबाइल की दुकानों के बाहर खड़ी रहकर पर्चे तक बांटे।
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ब्रिटेन की सर्वाधिक प्रभावशाली अश्वेत शख्सियत के तौर पर चुनी गई महिला गीना मिलर के साक्षात्कारों पर आधारित।