भारत में मौजूद तीन बड़ी जापानी कार निर्माता कंपनियों में से दो Honda Cars (होंडा कार्स) और Nissan Motor (निसान मोटर) दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा कार निर्माता समूह बनाने के लिए हाथ मिलाने के लिए तैयार हैं। दोनों कंपनियों ने एक अन्य जापानी ऑटो दिग्गज Mitsubishi (मित्सुबिशी) के साथ मिलकर एक नई होल्डिंग कंपनी स्थापित करने के लिए बातचीत शुरू कर दी है, जिसके तहत तीनों कंपनियां वैश्विक बाजारों के लिए कारों का निर्माण करेंगी।
इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य चीनी कार निर्माताओं से बढ़ती चुनौतियों का सामना करना है, खासकर इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में। भारत इस गठबंधन के लिए प्रमुख बाजारों में से एक होगा, जहां होंडा और निसान आने वाले वर्षों में अपने कारोबार को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं।
होंडा कार्स और निसान मोटर दो दशकों से भी ज्यादा समय से भारत में मौजूद हैं। दोनों कार निर्माताओं ने दुनिया के तीसरे सबसे बड़े भारतीय बाजार में सापेक्षिक सफलता देखी है। हालांकि, ये दोनों भारत में सबसे बड़ी जापानी कार निर्माता कंपनी Toyota Motor (टोयोटा मोटर) की सफलता की बराबरी नहीं कर पाए हैं। जहां टोयोटा भारत में शीर्ष पांच कार निर्माताओं में से एक है, वहीं होंडा और निसान दोनों मिलकर बिक्री के मामले में बमुश्किल दो प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी ही हासिल कर पाए हैं।
होंडा भारतीय बाजार में इस समय अमेज और सिटी सेडान और एलिवेट एसयूवी जैसे मॉडल बेचती है। निसान मोटर की भारत में सिर्फ एक कार बनाती है - मैग्नाइट सब-कॉम्पैक्ट एसयूवी। निसान ने इस साल की शुरुआत में नई पीढ़ी की एक्स-ट्रेल एसयूवी भी लॉन्च की थी। जिसे सीबीयू रूट के जरिए बेचा जाता है।
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Nissan X-Trail SUV
- फोटो : Nissan Motor India
होंडा-निसान विलय: क्या यह भारत में मारुति-टोयोटा की राह पर चलेगा?
यह सवाल बना हुआ है कि होंडा और निसान भारतीय बाजार के नजरिए से अपने गठबंधन को कैसे आगे बढ़ाएंगे। हाल ही में हुए विलय या इस गठबंधन से भारत में क्या लाभ होगा, इस पर किसी भी कार निर्माता ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। इससे पहले, टोयोटा मोटर ने मारुति सुजुकी के साथ साझेदारी की थी। जिसके तहत दोनों मिलकर भारतीय ग्राहकों के लिए कारें विकसित करते हैं, साथ ही मॉडल भी साझा करते हैं। इस फॉर्मूले से टोयोटा को फायदा हुआ है और इसकी लगभग आधी बिक्री रीबैज की गई मारुति कारों से होती है।
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Honda Elevate SUV
- फोटो : Honda
होंडा और निसान के लिए, इस तरह का तालमेल न सिर्फ उनकी बिक्री की मात्रा बढ़ाने में मदद कर सकता है। बल्कि भविष्य में नई कारों पर सहयोग के लिए दरवाजे भी खोल सकता है। साथ ही प्लेटफॉर्म, सुविधाओं के साथ-साथ उत्पादन लागत को साझा करने के अवसर भी खोल सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एसएंडपी ग्लोबल मोबिलिटी, इंडिया और आसियान के निदेशक पुनीत गुप्ता ने कहा, "होंडा निसान दोनों भारत में संघर्ष कर रहे हैं और लगातार अंतराल पर नए मॉडल लॉन्च करने में धीमे रहे हैं। दोनों ब्रांडों के पास भारत के बाजार में मजबूत ब्रांड इक्विटी है जो उन्हें मजबूत वापसी करने में मदद कर सकती है। अगर इसे सही कीमत और सही सेगमेंट में मजबूत उत्पाद लॉन्च का समर्थन मिले। यह देखते हुए कि भारत एशिया का एकमात्र बड़ा बाजार है जहां जापानी दुनिया में अपने बाजार हिस्सेदारी को बढ़ाने के बारे में सोच सकते हैं जहां चीनी-करण तेजी से हो रहा है।"
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Nissan Leaf Electric Car
- फोटो : Nissan
सोमवार, 23 दिसंबर को घोषित होंडा-निसान साझेदारी का एक प्रमुख पहलू इलेक्ट्रिक वाहन सेगमेंट में सहयोग था। ईवी या हाइब्रिड वाहन दो ऐसे खंड हैं जहां दोनों को एक-दूसरे से लाभ उठाने की क्षमता है। होंडा की विशेषज्ञता हाइब्रिड वाहनों में है, जबकि निसान ईवी के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी साझा करने के लिए बेहतर स्थिति में है, जिसमें होंडा देर से प्रवेश कर रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अर्न्स्ट एंड यंग ग्लोबल कंसल्टिंग सर्विसेज के पार्टनर सोम कपूर ने कहा, "होंडा और निसान दोनों जापानी कंपनियां हैं, दोनों एक-दूसरे की पूरक हैं। होंडा हाइब्रिड में मजबूत है, और निसान पिक-अप ट्रक और ईवी तकनीक में मजबूत है। अगर आखिरकार गठजोड़ होता है, तो दोनों को एक-दूसरे से फायदा ही होगा।"