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Car Import Tax: CBU और CKD गाड़ियां क्या हैं? भारत में कारों पर लगने वाले इंपोर्ट टैक्स की पूरी जानकारी

Tue, 27 Jan 2026 07:19 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 27 Jan 2026 07:19 PM IST
सार

भारत यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तय होने के साथ ही, भारतीय बाजार में कारों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी, पर फिर से ध्यान चला गया है। यहां समझिए भारत की ऑटो इंपोर्ट पॉलिसी, और CBU vs CKD और EU ट्रेड एग्रीमेंट का क्या प्रभाव पड़ेगा।

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CBU vs CKD Cars Explained: How India’s Import Duties Work Under the EU Free Trade Deal
Mercedes-Benz Concept CLA at Auto Expo 2025 - फोटो : Amar Sharma

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच लंबे समय से चल रही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) वार्ता पर औपचारिक मुहर लगते ही, देश की ऑटोमोबाइल इंपोर्ट पॉलिसी (वाहन आयात नीति) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। खासतौर पर कारों पर लगने वाले भारी इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) को लेकर बहस तेज हो गई है।

प्रस्तावित समझौते के तहत भारत, यूरोप में बनी कारों पर लगने वाला आयात शुल्क मौजूदा 110 प्रतिशत तक के स्तर से घटाकर शुरुआती तौर पर 40 प्रतिशत करने पर सहमत हो सकता है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसे 10 प्रतिशत तक लाने का रोडमैप भी तय किया गया है।

यह बदलाव ग्लोबल कार कंपनियों के लिए क्यों अहम है और भारतीय ग्राहकों पर इसका क्या असर पड़ेगा? इसे समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि CBU और CKD गाड़ियां क्या होती हैं और भारत में इन पर टैक्स कैसे लगाया जाता है?

CBU vs CKD Cars Explained: How India’s Import Duties Work Under the EU Free Trade Deal
BMW Z4 M40i Pure Impulse Edition - फोटो : BMW

CBU (Completely Built Unit) क्या होती है?
CBU यानी पूरी तरह बनी और असेंबल की गई गाड़ियां। ऐसी कारें विदेश में पूरी तरह तैयार होती हैं और बिना किसी लोकल असेंबली के सीधे भारत इंपोर्ट की जाती हैं। इन्हें भारत में किसी तरह के निर्माण या जोड़-तोड़ की जरूरत नहीं होती।

भारत में CBU गाड़ियों पर सबसे ज्यादा आयात शुल्क लगता है। इसका मकसद घरेलू ऑटो मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। मौजूदा नियमों के मुताबिक:

  • 40,000 अमेरिकी डॉलर से कम कीमत वाली पूरी बनी कारों पर लगभग 70 प्रतिशत तक इंपोर्ट ड्यूटी लगती है
  • 40,000 डॉलर से ज्यादा कीमत वाली कारों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी, सोशल वेलफेयर सरचार्ज और सेस मिलाकर कुल टैक्स 100 से 110 प्रतिशत तक पहुंच जाता है

इसी वजह से भारत दुनिया के सबसे ज्यादा सुरक्षित (संरक्षित) ऑटो बाजारों में गिना जाता है। जिस पर अंतरराष्ट्रीय कार निर्माता लंबे समय से सवाल उठाते रहे हैं।

CBU vs CKD Cars Explained: How India’s Import Duties Work Under the EU Free Trade Deal
Lamborghini Huracan Evo - फोटो : Lamborghini

CKD (Completely Knocked Down) यूनिट क्या होती है?
CKD गाड़ियां वे होती हैं जिन्हें पूरी तरह जोड़कर नहीं, बल्कि अलग-अलग पार्ट्स और कंपोनेंट्स के रूप में भारत मंगाया जाता है। इसके बाद इन्हें देश में मौजूद प्लांट में असेंबल किया जाता है।

इस मॉडल में कंपनियों को कम इंपोर्ट ड्यूटी का फायदा मिलता है और साथ ही स्थानीय रोजगार और वैल्यू एडिशन भी होता है। भारत में CKD पर टैक्स की दर इस बात पर निर्भर करती है कि कार किस हालत में इंपोर्ट की गई है:

  • अगर इंजन, गियरबॉक्स या ट्रांसमिशन पहले से असेंबल नहीं हैं, तो 15 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी
  • अगर इंजन या गियरबॉक्स पहले से असेंबल हालत में इंपोर्ट किए जाते हैं, तो 30 प्रतिशत ड्यूटी

इसी वजह से कई लग्जरी और प्रीमियम कार कंपनियां पूरी बनी कार इंपोर्ट करने की बजाय भारत में लोकल असेंबली का रास्ता अपनाती हैं।

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CBU vs CKD Cars Explained: How India’s Import Duties Work Under the EU Free Trade Deal
2025 Volkswagen Atlas SUV - फोटो : Volkswagen

इंडिया-ईयू डील से समीकरण कैसे बदलेंगे?
प्रस्तावित FTA के तहत भारत हर साल लगभग ढाई लाख, यूरोप में बनी इंटरनल कंबशन इंजन (ICE), कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाकर 40 प्रतिशत करने को तैयार हो सकता है। आगे चलकर इसे 10 प्रतिशत तक लाने की भी योजना है।

इससे CBU और CKD गाड़ियों की कीमतों में फर्क काफी हद तक कम हो जाएगा। यूरोपीय कार ब्रांड्स को इससे कई फायदे मिल सकते हैं:

  • इंपोर्टेड कारों की कीमत ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकेगी
  • कम बिक्री वाली या खास सेगमेंट की कारें बिना लोकल फैक्ट्री लगाए लॉन्च की जा सकेंगी
  • भारत में मांग को परखने का मौका मिलेगा, उसके बाद मैन्युफैक्चरिंग में निवेश का फैसला किया जा सकेगा

हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को शुरुआती पांच साल तक इस रियायत से बाहर रखा जाएगा। क्योंकि सरकार घरेलू ईवी निवेश को सुरक्षित रखना चाहती है।

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CBU vs CKD Cars Explained: How India’s Import Duties Work Under the EU Free Trade Deal
Porsche Macan GTS Electric - फोटो : Porsche

ग्राहकों और कंपनियों के लिए इसका क्या मतलब है?
ग्राहकों के लिए कम CBU टैक्स का मतलब है प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट में ज्यादा विकल्प और संभावित रूप से बेहतर कीमतें। वहीं कार कंपनियों के लिए यह भारत को एक ज्यादा लचीला और आकर्षक बाजार बना सकता है। जहां सिर्फ CKD पर निर्भर रहने की मजबूरी कम होगी।

फिलहाल ध्यान देने वाली बात यह है कि यह समझौता अभी अंतिम रूप और आधिकारिक मंजूरी के दौर से गुजरना बाकी है। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक भारत में CBU पर ऊंचा टैक्स और CKD आधारित मैन्युफैक्चरिंग मॉडल पूरी तरह लागू रहेगा। 


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