Buying a Car May Become Cheaper Soon : अपना निजी वाहन खरीदना हर व्यक्ति का सपना हो सकता है, लेकिन यह हर किसी पॉकेट और बजट में फिट नहीं आता। वाहनों को ज्यादा किफायती बनाने के लिए कम टैक्स को लेकर भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की लंबे समय से की जा रही गुहार पर केंद्र सरकार जल्द विचार कर सकती है। देश के राजस्व सचिव ने हाल ही में कहा कि वह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं और देखते हैं कि इसमें क्या बदलाव हो सकता है।
कारों, मोटरसाइकिलों और ट्रकों जैसे वाहनों पर मौजूदा जीएसटी दर 28 फीसदी तक है। जब इसमें राज्य सरकारों के कई टैक्स जुड़ जाते हैं, तो अंतिम कीमत इन वाहनों को तुलनात्मक रूप से महंगा बना देती है। इसलिए, टैक्स की दरों की कम करने के लिए, ऑटोमोबाइल उद्योग काफी लंबे समय से अनुरोध कर रहा है और ऐसा माना जाता है कि इस तरह के कदम से वाहनों के मांग और बिक्री में बढ़ोतरी हो सकती है।
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हाल ही में सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के एक सेमिनार में बोलते हुए राजस्व सचिव तरुण बजाज ने इशारा किया कि सरकार टैक्स को कम करने की संभावना के लिए तैयार हो सकती है। उन्होंने कहा, "मुझे आपके साथ जुड़कर बहुत खुशी होगी, यह देखने के लिए कि हम (जीएसटी) कर दरों पर भी क्या कर सकते हैं, यह देखने के लिए हम क्या कर सकते हैं कि कुछ (वाहन) सेगमेंट को वह प्रोत्साहन मिले जिसके वे हकदार हैं।"
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भारत दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमोबाइल बाजारों में से एक है, लेकिन प्रति 100 लोगों पर वाहनों की पहुंच के मामले में यह अभी भी पश्चिमी दुनिया और चीन के मुकाबले कहीं नहीं ठहरता है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार है - बिक्री और निर्माण दोनों के मामले में।
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ऑटोमोबाइल उद्योग के मुताबिक भारत की 'कम' वाहन बिक्री का एक अहम कारण, अफॉर्डेबिलिटी (खरीदने की शक्ति) है। हाल के दिनों में बढ़ती लागत और कड़े उत्सर्जन मानदंडों को पूरा करने वाले सुरक्षित वाहन बनाने की जरूरतों ने मैन्युफैक्चरिंग लागत को बढ़ाया है। ऐसे समय में वाहनों पर लगने वाले टैक्स को कम करने से कुछ बात बन सकती है।
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ऑटोमोबाइल पर टैक्स कम करने से न सिर्फ ओईएम (ओरिजिनल इक्यूपमेंट मैन्युफैक्चरर्स) को मुनाफा होगा, बल्कि यह ग्राहकों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा। और कई लोगों का मानना है कि इस तरह के उपाय से वास्तव में सुस्ती की मार झेल रहे ऑटोमोबाइल उद्योग की बिक्री में तेजी आ सकती है, जो 2018-2019 के आसपास से जारी है।