भारत में टायरों की रेटिंग ईंधन दक्षता (इंधन की कम खपत) और रोलिंग प्रतिरोध के आधार पर करने की तैयारी है। सरकार की यह तैयारी उपभोक्ताओं को बेहतर उत्पाद के प्रति जागरूक करने के साथ कंपनियों को ईंधन की खपत कम करने वाले उत्पाद बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
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ज्यादा माइलेज वाले टायर्स
- फोटो : Goodyear (For Reference Only)
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक टायरों की रेटिंग देने के लिए एक उच्चस्तरीय पैनल का गठन किया है। इस पैनल में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, भारतीय मानक ब्यूरो, सड़क परिवहन मंत्रालय और राजमार्ग और ऑटोमोबाइल परीक्षण एजेंसियों को शामिल किया गया है। एक सरकारी अधिकारी ने अपनी पहचान जाहिर नहीं करने के अनुरोध के साथ बताया कि अभी रेटिंग का पैमाना तय करने की दिशा में काम चल रहा है। हम एक साथ बड़े पैमाने पर टायरों की रेटिंग शुरू करेंगे।
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तीन बिंदुओं को पैमाना बनाने की तैयारी
आने वाले दिनों में टायर की रेटिंग देने में रोलिंग प्रतिरोध, ईंधन बचाने की क्षमता और सड़क पर टायर की ब्रेकिंग क्षमता को आंका जाएगा। भारत में मौजूदा समय में टायर की क्षमता आंकने के लिए बहुत ही कम जांच एजेंसी है। ऐसे में सरकार पहले जांच एजेंसी की संख्या बढ़ाना चाहती है।
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देशभर में जांच केंद्र स्थापित होंगे
अधिकारी के मुताबिक, सरकार जल्द से जल्द टायरों के क्वालिटी जांचने के लिए केंद्र स्थापित करना चाहती है। यह टायर की रेटिंग प्रक्रिया देने के लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि अभी ग्रिप जांचने की सुविधा सिर्फ आईसीएटी मानेसर में है।
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बारिश में ग्रिप वाले टायर्स का इस्तेमाल
- फोटो : For Reference Only
ग्राहकों के लिए फैसला लेना आसान होगा
विशेषज्ञों का कहना है कि टायर पर रेटिंग देने से ग्राहकों को सही और गलत के बीच चयन करना आसान हो जाएगा। ग्राहक आसानी से पता कर पाएंगे कि जिस टायर में कम रोलिंग प्रतिरोध क्षमता होगी वह ईंधन की कम खर्च कराएगी। टायर के ग्रिप से सुरक्षा का पैमाना लगाने में मदद मिलेगी।