गर्मियां आते ही कारों में आग लगने के मामले बढ़ जाते हैं। खासतौर पर उन कारों में जिनमें अल्टरनेटिव फ्यूल के तौर पर सीएनजी और एलपीजी लगी होती है। सीएनजी या एलपीजी लगे होने के जितने फायदे हैं, उतने खतरे भी हैं। सीएनजी-एलपीजी से माइलेज तो जबरदस्त मिलता ही है, वहीं कारों का एक्जॉस्ट वॉल्व भी जल्दी खराब होता है। हम बता रहे हैं कुछ टिप्स बारे में, जो आपकी मदद कर सकते हैं...
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पर्यावरण सेफ होती हैं सीएनजी-एलपीजी कारें
पिछले रविवार को दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर के पास एक चलती हुई डेटसन कार में आग लग गई, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई। जांच में पता चला कि कार में सीएनजी लगी थी, सीएनजी लीकेज को हादसे की वजह माना जा रहा है। लोग सीएनजी या एलपीजी कारें को पेट्रोल बचाने के लिए खरीदना पसंद करते हैं। वहीं ग्रीन फ्यूल होने के चलते ये पर्यावरण के लिए कम हानिकारक है। लेकिन ग्रीन फ्यूल वाली कारों में आग लगने की प्रमुख वजह लापरवाही ही होती है, जिसका खामियाजा जानोमाल गंवा कर भुगतना पड़ता है। जानते हैं क्या हैं आग लगने की प्रमुख वजहें...
बाद में सीएनजी-एलपीजी किट लगाने से बचें
कार खरीदने के बाद कई लोग कार की ऑरिजनल वारंटी खत्म होने के बाद उसमें सीएनजी या एलपीजी लगवाते हैं। क्योंकि पहले लगवाने से गाड़ी की वारंटी खत्म होती है। बाहर से एलपीजी या सीएनजी सिलेंडर फिट कराना कई बार मुसिबत भरा साबित हो सकता है। अनाधिकृत डीलरों से किट फिट कराने पर लीकेज की शिकायत हो सकती है। वहीं अनाधिकृत डीलर कंपनी के स्टैंडर्ड के मुताबिक फिटिंग नहीं करते हैं, जिससे कई बार दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।
इसका उपाय यह है कि कार खरीदे से पहले ही फैसला कर लें कि आपको सीएनजी-एलपीजी कार लेनी है या केवल पेट्रोल कार लेनी है। इसकी वजह है कि अगर कंपनी फिटेड लेते हैं, तो उसमें वारंटी मिलती है और कंपनी गाड़ी की जरूरत के हिसाब से किट फिट करती है, कंपनी फिटिंग और मैकेनिक फिटिंग में अंतर होता है। इसलिए चाहे कुछ पैसे एक्ट्रा देने पड़ें, लेकिन कंपनी फिटेड किट को ही प्राथमिकता दें।
बाहर से एसेसरीज न लगवाएं
बाहर से एसेसरीज लगवाना भी कई बार दिक्कत पैदा कर सकता है। शोरूम में एसेसरीज महंगी मिलती हैं, पैसे बचाने के चक्कर में बाजार से एसेसरीज खरीद कर कार में फिट कराते हैं। वहीं फिटिंग के दौरान मैकेनिक कई तारें काट देते हैं और उन्हें खुला छोड़ देते हैं, या फिर घटिया टेप लगाते हैं, जिससे हमेशा शार्ट सर्किट की संभावना बनी रहती है।
कोशिश करें कि बाहर से एसेसरीज न लगवाएं, क्योंकि ज्यादातर एसेसरीज चाइनीज होती हैं और उनकी वोल्टेज कई बार मैच नहीं कर पातीं, जिससे उनके फुंकने का डर होता है। अगर बाहर से लगवानी ही पड़ें, तो ब्रांडेड एसेसरीज को ही प्राथमिकता दें। इसके अलावा कार बेवजह की एक्सेसरीज़ से कार की बैटरी पर ज्यादा लोड पड़ता है।
कार की सर्विस न कराना
अक्सर लोग कार की फ्री सर्विस खत्म होने के बाद बाहर के मैकेनिकों से सर्विस कराते हैं, जो सीएनजी या एलपीजी किट लगी गाड़ियों की ठीक से सर्विसिंग नहीं करते। बाहर के अप्रशिक्षित मैकेनिक सर्विस करने में लापरवाही बरतते हैं, यहां तक कि उनके पास वे औजार या उपकरण भी नहीं होते, जो कंपनी में होते हैं, जिसके चलते उन हिस्सों की सर्विस ही नहीं हो पाती है और जिसकी वजह से गाड़ी में आग लगने की आशंका बढ़ जाती है।