अगर आप पुरानी कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो जान लें यह राह इतनी आसान नहीं है। पुरानी कार खरीदने की राह में तमाम रोड़े हैं। कई तरह के स्कैम से आपका सामना हो सकता है। इसी में एक बेहद कॉमन चीटिंग है गाड़ी की मीटर यानी ओडोमीटर पीछे करना। हम बता रहे हैं कि इस स्कैम को आप कैसे पहचान सकते हैं।
Car Tips: कार के ओडोमीटर के साथ छेड़छाड़, इन तरीकों से तुरंत लगाएं पता
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डिजिटल ओडोमीटर भी हो सकता है हैक
पुरानी कार खरीदने वाले इस स्कैम से दोचार जरूर होते हैं। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि डिजिटल ओडोमीटर को हैक नहीं का जा सकता, लेकिन ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है। किसी भी गाड़ी के मीटर को पीछे किया जा सकता है। कई बार ऐसे धोखेबाज इतनी सफाई से ओडोमीटर पीछे करते हैं कि पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
एनालॉग ओडोमीटर से छेड़छाड़
बात करते हैं पहले एनालॉग ओडोमीटर की। एनालॉग मीटर में कई नंबर होते हैं, जो दूरी को दर्शाते हैं। हांकि नई आ रही कारों में एनालॉग मीटर नहीं मिलते हैं। वहीं एनालॉग मीटर के साथ छेड़छाड़ करना बेहद आसान होता है। कार के इंस्ट्रूमेंट कंसोल या स्पीडोमीटर को अलग को करके ओडोमीटर के डिजिट व्हील्स को पीछे किया जा सकता है। ओडोमीटर के साथ छेड़छाड़ करके लोग सोचते हैं कि गाड़ी की रीसेल वैल्यू बढ़ जाएगी।
हालाँकि, अकसर कई बार इस तरह के ओडोमीटर के साथ ठीक से टेंपरिंग नहीं की जाती है और ओडोमीटर में डिजिट सीरीज़ को गलत बताया जाता है। वहीं इस तरह की धोखाझड़ी का तुरंत पता नहीं चलता है, लेकिन जब कार का नया मालिक लगभग 10,000 किमी कार चला लेता है, तो कई बार डिजिट काम करना बंद कर देते हैं।
डिजिटल ओडोमीटर के साथ छेड़छाड़
सभी नई कारों में डिजिटल ओडोमीटर लगा होता है। लोगों का सोचना होता है कि डिजिटल ओडोमीटर के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है, लेकिन ऐसा सोचना गलत है। 10-15 साल पहले यह असंभव प्रतीत होता था, लेकिन अब यह संभव है और इतनी सफाई से किया जाता है कि पता लगाना मुश्किल हो जाता है। कार सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की जानकारी रखने वाला कोई भी इसे आसानी से हैक कर सकता है।
कंसोल की चिप से होती है छेड़छाड़
डिजिटल ओडोमीटर के साथ छेड़खानी करने वाले कार से कंसोल को खोल कर लैपटॉप या स्मार्टफोन से कनेक्ट कर देते हैं और कंसोल की चिप को हैक करके अपनी मर्जी के मुताबिक ओडोमीटर रीडिंग को सेट कर देते हैं। ओडोमीटर में प्रिटेंड सर्किट बोर्ड होता है, जिसमें से चिप को निकाल कर री-सोल्डरिंग की जाती है। ओडोमीटर के ग्लास पर या इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर पर पेंचकस के निशान देख कर टेंपरिंग का पता लगाया जा सकता है, लेकिन अगर किसी प्रोफेशनल ने किया होगा, तो यह भी मुश्किल हो जाता है।