ऑटोमैटिक कारों की डिमांड अब बढ़ने लगी है। तमाम कार कंपनियां 5 लाख तक की कीमत में ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन ऑफर कर रही हैं। एक वक्त था जब एएमटी फीचर महंगी और लग्जरी कारों में ही मिलता था। वहीं भीड़-भाड़ वाले ट्रैफिक में ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन कारों का फायदा समझ में आता है। अगर आप ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन वाली कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन चार तरह के होते हैं।
ऑटोमैटिक गियर वाली कार खरीदने से पहले जानें इनके फायदे और नुकसान, नहीं पड़ेगा पछताना
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ऑटोमैटिक मैनुअल ट्रांसमिशन
एएमटी या ऑटोमैटिक मैनुअल ट्रांसमिशन कारों में बेहद कॉमन है और यह सबसे सस्ता वर्जन भी है। एएमटी वर्जन अधिकतर सब-4 मीटर सेडान/ एसयूवी और हैचबैक में मिलता है। सभी वर्जनों में एएमटी की सेल सबसे ज्यादा है। एएमटी ट्रांसमिशन उतनी ही आसानी से काम करता है जैसे मैनुअल ट्रांसमिशन करता है। खास बात यह है कि वर्तमान में एएमटी टेक्नोलॉजी का प्रचलऩ मॉडर्न फॉर्मूला वन कारों से आया है। स्टैंडर्ड मैनुअल गियरबॉक्स के मुकाबले एएमटी में क्लच और गियर ऑटोमैटिक शिफ्ट होते हैं, इन्हें सेमी-ऑटोमैटिक गियरबॉक्स भी कह सकते हैं।
वहीं एएमटी के कई नुकसान भी हैं, खासकर ज्यादा आरपीएम पर। टाटा नैनो, मारुति ऑल्टो, रेनो डस्टर, फिएट अबार्थ जैसे कारों में एएमटी मिलता है। हालांकि एएमटी की कम मैंटिनेंस कॉस्ट और ज्यादा माइलेज इसका यूएसपी हैं।
कंटीन्यूअस वेरिएबल ट्रांसमिशन (सीवीटी)
एएमटी के बाद बात करते हैं कि सीवीटी की। सीवीटी गियरबॉक्स एएमटी से थोड़ा अलग होता है। जहां एएमटी में क्लच ऑपरेट करने के लिए सर्वो होता है, वहीं सीवीटी में कोई गियर नहीं होते। सीवीटी ट्रांसमिशन में कुछ डिस्क होती हैं, जो आरपीएम रेंज के भीतर ही टार्क पैदा करता है। स्कूटर में मिलने वाले गियरबॉक्स से आप इसकी तुलना कर सकते हैं। सीवीटी का फायदा है कि इससे बेहद स्मूद ड्राइविंग मिलती है और शोर कम होता है। निसान माइक्रा, मारुति बलेनो, होंडा सिटी, होंडा जैज जैसी कारों में सीवीटी का फीचर मिलता है। वहीं होंडा अपनी सेडान कार सिटी और हैचबैक जैज में पैडल शिफ्टर्स का भी फीचर देती है। अगर आप कम शोर-शारबे वाले स्मूद गियरबॉक्स चाहते हैं, तो सीवीटी बेहतर रहेगा।
डुअल क्लच ट्रांसमिशन
फॉक्सवैगन अपनी कारों में डुअल क्लच ट्रांसमिशन का फीचर देता है। इसे डीएसजी यानी डायरेक्ट शिफ्ट गियरबॉक्स भी कहा जाता है। डीएसजी गियरबॉक्स सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी वाली ट्रांसमिशन टेक्नोलॉजी है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि चुटकियों में गियर शिफ्ट होते हैं। वहीं डुअल क्लच सिस्टम के होने से ट्रांसमिशन बेहद तेजी से होता है। डीसीटी या डीएसजी गियरबॉक्स केवल महंगी, लग्जरी और परफॉरमेंस कारों में ही मिलता है। फॉक्सवैदन पोलो जीटी, स्कोडा रैपिड और फोर्ड फिगो ही इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं। ध्यान रखने वाली बात यह है कि पॉवरफुल इंजन के साथ डीएसजी लगे होने से रोंमाच का तो अहसास होता है, लेकिन गाड़ी का माइलेज भी कम होता है।
टॉर्क कन्वर्टर
टॉर्क कन्वर्टर को सबसे पुराना ऑटोमैटिक गियरबॉक्स सिस्टम कहा जा सकता है। लंबे वक्त से टॉर्क कन्वर्टर यूनिट्स का इस्तेमाल होता रहा है। वहीं इनके मैकेनिज्म को समझना भी काफी मुश्किल होता है। इनमें टरबाइन और इम्पेलर के साथ प्लैनेटरी डिजाइन गियर सिस्टम का प्रयोग होता है। इम्पेलर में ऑयल भरा होता है, जो सेंट्रीफुगल फोर्स के जरिए धक्का देकर टरबाइन को शुरू किया जाता है। वहीं इस मैकेनिज्म में ट्रांसमिशन का नुकसान होता है, जिससे माइलेज कम होता है। धीरे-धीरे इन यूनिट्स को प्रचलन से बाहर किया जा रहा है। लेकिन आज भी महिन्द्रा एक्सयूवी500 और टाटा हेक्सा में टॉर्क कन्वर्टर गियरबॉक्स मिलता है।