कोरोना वायरस ने ऑटो इंडस्ट्री को भारी नुकसान पहुंचाया है। वाहनों की बिक्री में भारी गिरावट देखी जा रही है। कंपनियों की तरफ से वाहनों पर कई ऑफर्स दिए जा रहे हैं, लेकिन इसका कोई ठोस असर दिखाई नहीं दे रहा है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम- SIAM) का कहना है कि कोविड-19 महामारी के कारण हुए नुकसान से उबरने में ऑटो इंडस्ट्री को चार साल लग जाएंगे। निर्माता कंपनियां सरकार से राहत पैकेज और GST की दर को घटाने की मांग कर रही हैं। कंपनियों का कहना है कि हालत इतने घराब हैं कि ग्राहकों को डिस्काउंट देना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे में कुछ सवाल हैं जिनका जवाब हम आपको आगे कि स्लाइड्स में बताने जा रहे हैं, जैसे कि कार और बाइक पर कंपनियों को कितना मुनाफा होता है? इसके अलावा आने वाले समय में बिक्री और कितनी घट सकती है।
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अभी और घटेगी बिक्री
SIAM के अनुमान के मुताबिक वित्तवर्ष-21 की पहली तिमाही में सभी वाहनों की बिक्री में भारी गिरावट देखी जा सकती है। इनमें
- कारों की बिक्री में 82 फीसदी की गिरावट
- एसयूवी की बिक्री में 70 फीसदी की गिरावट
- पैसेंजर वाहनों की बिक्री में 78 फीसदी की गिरावट
- स्कूटर्स की बिक्री में 78 फीसदी की गिरावट
- मोटरसाइकिल्स की बिक्री में 73 फीसदी की गिरावट
- कॉमर्शियल वाहनों की बिक्री में 85 फीसदी की गिरावट
- तीन पहिया वाहनों की बिक्री में 91 फीसदी की गिरावट
- घरेलू बाजार में कुल 75 फीसदी की गिरावट
कोरोना की मार से 4 साल पीछे चला गया बाजार
इंडस्ट्री का कहना है कि कोरोना की मार के कारण वित्तवर्ष 2018-19 जैसे हालात तक पहुंचने में बाजार को तीन से चार साल लग जाएंगे। इंडस्ट्री का कहना है कि सभी वाहनों की कैटेगरी में 26 से 45 फीसदी तक की गिरावट देखी जा रही है, जिससे उबरना बहुत मुश्किल हो गया है।
कंपनियों से ज्यादा सरकार को हो रहा है फायदा
सियाम के अध्यक्ष राजन वढेरा ने कहा कि सरकार की तरफ से वाहनों पर 28 से 60 फीसदी तक जीएसटी टैक्स लगाए जा रहे हैं। ऐसे में कंपनियों की मार्जिन से भी ज्यादा सरकार की टैक्स के जरिए कमाई हो रही है। राजन वढेरा के मुताबिक कंपनियों को वाहनों पर 3 से 9 फीसदी तक मुनाफा होता है। इनमें,
- कॉमर्शियल वाहनों की बिक्री पर 3 फीसदी
- दो-पहिया वाहनों की बिक्री पर 9 फीसदी
- पैसेंजर वाहनों की बिक्री पर 5-6 फीसदी
डिस्काउंट नहीं दे पा रही कंपनियां, राहत पैकेज की मांग
इंडस्ट्री का कहना है कि नुकसान को देखते हुए ग्राहकों को डिस्काउंट देना मुश्किल है। इसके पीछे का कारण कोविड-19 को लेकर अपनाए जा रहे सुरक्षा प्रयासों में अतिरिक्त खर्च। इंडस्ट्री का कहना है कि सरकार राहत पैकेज दे। इसके अलावा जीएसटी की दरों को 10 फीसदी तक घटाया जाए।