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Vastu Tips: जानिए कैसे दिशाओं के वास्तुदोष को दूर करते हैं मंत्र
Sat, 05 Aug 2023 01:00 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 05 Aug 2023 01:00 PM IST
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वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व
- फोटो : vastu tips
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अक्सर देखा गया है कि कई लोग बहुत मेहनत करते हैं, इसके बाबजूद भी उन्हें ज्यादा सफलता प्राप्त नहीं होती है। इसके कई कारण हो सकते हैं,जिनमें घर में वास्तुदोष भी प्रमुख कारण हो सकता है। वास्तु दोष उत्पन्न होने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने लगती है, जिसके कारण हमारे साथ दुःख और अशुभ घटनाएं घटित होने लगती हैं। इन सभी परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए वास्तु शास्त्र में मंत्रों का प्रयोग बताया गया है।
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ईशान दिशा
इस दिशा के स्वामी बृहस्पति हैं और देवता हैं भगवान शिव। इस दिशा के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए नियमित गुरू मंत्र 'ओम बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र का जप करें। शिव पंचाक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय का 108 बार जप करना भी लाभप्रद होता है।
इस दिशा के स्वामी बृहस्पति हैं और देवता हैं भगवान शिव। इस दिशा के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए नियमित गुरू मंत्र 'ओम बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र का जप करें। शिव पंचाक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय का 108 बार जप करना भी लाभप्रद होता है।
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पूर्व दिशा
पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य और देवता इंद्र हैं। यदि भवन की पूर्व दिशा में वास्तु दोष है। तो इसे दूर करने के लिए प्रतिदिन सूर्य मंत्र 'ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' का जप करें। इस मंत्र के जप से सूर्य के शुभ प्रभावों में वृद्धि होती है। व्यक्ति मान-सम्मान और यश प्राप्त करता है। प्रतिदिन 108 बार इंद्र मंत्र 'ओम इन्द्राय नमः' का जप करना भी इस दिशा के दोष को दूर कर देता है।
पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य और देवता इंद्र हैं। यदि भवन की पूर्व दिशा में वास्तु दोष है। तो इसे दूर करने के लिए प्रतिदिन सूर्य मंत्र 'ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' का जप करें। इस मंत्र के जप से सूर्य के शुभ प्रभावों में वृद्धि होती है। व्यक्ति मान-सम्मान और यश प्राप्त करता है। प्रतिदिन 108 बार इंद्र मंत्र 'ओम इन्द्राय नमः' का जप करना भी इस दिशा के दोष को दूर कर देता है।
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आग्नेय दिशा
इस दिशा के स्वामी ग्रह शुक्र और देवता अग्नि हैं। इस दिशा में वास्तु दोष होने पर शुक्र अथवा अग्नि के मंत्र का जप लाभप्रद होता है। शुक्र का मंत्र है 'ओम शुं शुक्राय नमः'। अग्नि का मंत्र है 'ओम अग्नेय नमः'। इस दिशा को दोष से मुक्त रखने के लिए इस दिशा में पानी का टैंक, नल, शौचालय अथवा अध्ययन कक्ष नहीं होना चाहिए।
इस दिशा के स्वामी ग्रह शुक्र और देवता अग्नि हैं। इस दिशा में वास्तु दोष होने पर शुक्र अथवा अग्नि के मंत्र का जप लाभप्रद होता है। शुक्र का मंत्र है 'ओम शुं शुक्राय नमः'। अग्नि का मंत्र है 'ओम अग्नेय नमः'। इस दिशा को दोष से मुक्त रखने के लिए इस दिशा में पानी का टैंक, नल, शौचालय अथवा अध्ययन कक्ष नहीं होना चाहिए।
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दक्षिण दिशा
इस दिशा के स्वामी ग्रह मंगल और देवता यम हैं। दक्षिण दिशा से वास्तु दोष दूर करने के लिए नियमित 'ओम अं अंगारकाय नमः' मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। यह मंत्र मंगल के कुप्रभाव को भी दूर कर देता है। 'ओम यमाय नमः' मंत्र से भी इस दिशा का दोष समाप्त हो जाता है।
इस दिशा के स्वामी ग्रह मंगल और देवता यम हैं। दक्षिण दिशा से वास्तु दोष दूर करने के लिए नियमित 'ओम अं अंगारकाय नमः' मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए। यह मंत्र मंगल के कुप्रभाव को भी दूर कर देता है। 'ओम यमाय नमः' मंत्र से भी इस दिशा का दोष समाप्त हो जाता है।