Kis Disha Mein Rakhein Maa Saraswati Ki Murti: वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ मास की शुक्ल पक्ष पंचमी को वसंत पंचमी मनाई जाती है। यह दिन विद्या, ज्ञान, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। माना जाता है कि इसी दिन माता सरस्वती का अवतरण हुआ था, इसलिए पूरे देश में इस पर्व को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। लोग सुबह स्नान करके अपने घरों में मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित कर पूजा-अर्चना करते हैं और उन्हें फूल, मिष्ठान और जल अर्पित करके आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
12 महीने बाद ग्रहों की शुभ चाल, शनि के घर में प्रवेश करेंगे बुध ग्रह, इन राशियों को मिलेगा लाभ
मां सरस्वती की मूर्ति को सही दिशा और मुद्रा में स्थापित करना बेहद महत्वपूर्ण है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि मूर्ति गलत दिशा में रखी जाए तो पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता। इसलिए वसंत पंचमी के दिन मूर्ति को घर लाने से पहले इसकी शुभ दिशा और मुद्रा के नियम जान लेना जरूरी है। हम बताएंगे कि कौन सी दिशा और मुद्रा आपके लिए सबसे लाभदायक मानी जाती है।
Weak Moon Signs: रिश्तों में दूरी लाता है कुंडली में कमजोर चंद्रमा, यहां जानें लक्षण और उपाय
2 of 3
मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने के लिए पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है।
- फोटो : amar ujala
मां सरस्वती की मूर्ति किस दिशा में रखें
- वास्तु शास्त्र के अनुसार, मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने के लिए पूर्व दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। इस दिशा में मूर्ति रखने से घर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साधक को ज्ञान की प्राप्ति होती है और पढ़ाई, करियर या किसी भी बौद्धिक कार्य में सफलता मिलने के योग बनते हैं।
- इसके अलावा, उत्तर-पूर्व दिशा भी विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है। इस दिशा में मां सरस्वती की मूर्ति रखने से धन-संपत्ति में वृद्धि होती है और नौकरी या व्यवसाय में अवसर खुलते हैं।
- घर में उत्तर दिशा में मूर्ति स्थापित करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है, घर का वातावरण सकारात्मक होता है और जीवन में मानसिक शांति का अनुभव होता है। इससे करियर और पढ़ाई में भी मदद मिलती है।
3 of 3
मां सरस्वती के दो हाथों में वीणा होनी चाहिए, जो संगीत, कला और बौद्धिक कौशल का प्रतीक है।
- फोटो : amar ujala
मूर्ति की मुद्रा कैसे होनी चाहिए
- वसंत पंचमी की पूजा के लिए मां सरस्वती की मूर्ति कमल के फूल पर बैठी हुई होनी चाहिए। यह मुद्रा एकाग्रता, ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
- मूर्ति के चेहरे पर प्रसन्नता का भाव होना जरूरी है। उदास या दुखी मुद्रा वाली मूर्ति रखने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है।
- मां सरस्वती के दो हाथों में वीणा होनी चाहिए, जो संगीत, कला और बौद्धिक कौशल का प्रतीक है। इसके अलावा, मूर्ति के अन्य हाथों में पुस्तकों या अन्य शास्त्रों का होना भी शुभ माना जाता है, क्योंकि यह शिक्षा और ज्ञान के महत्व को दर्शाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।