वास्तु शास्त्र में हर एक स्थान के बारे में महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। प्रत्येक स्थान का अपना महत्व और दिशाओं के अनुसार देवता होते हैं। यही कारण है कि वास्तु में किसी भी चीज के निर्माण को लेकर नियम बताए गए हैं। घर के बीचों-बीच के स्थान को वास्तु में ब्रह्म स्थान कहा गया है। पहले के समय में घर के बीचों-बीच का स्थान हमेशा खाली छोड़ा जाता था। जिसे घर का आंगन कहा जाता था लेकिन आज के समय में घरों का आकार बदल गया है। ज्यादातर घरों में आंगन नहीं होता है। वास्तु में इस स्थान का बहुत महत्व माना गया है। इस स्थान में भारी चीजें और निर्माण करने के लिए मना किया जाता है। तो चलिए जानते हैं कि इस स्थान में क्यों नहीं करना चाहिए भारी निर्माण और इससे क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं।
वास्तु शास्त्र : घर के इस स्थान में न रखें भारी सामान, परिवार में होने लगती है सुख की कमी
ब्रह्म स्थान यानि ब्रह्मा जी का स्थान माना गया है। माना जाता है कि इस स्थान पर भारी सामान रखने या फिर निर्माण कर देने से रचियता ब्रह्मा का निरादर होता है। आपके परिवार में शांति का अभाव होने लगता है। घर में सहजता और सृजनात्मक गतिविधियों में कमी आने लगती है। घर में रहने वाले सदस्यों के बीच दूरियां बढ़ने लगती हैं। घर में अतिथियों का आना-जाना कम हो जाता है जिससे घर में रौनक कम होने लगती है।
घर के ब्रह्म स्थान की तरह ही कमरे के बाचों-बीच के स्थान में भी ज्यादा भारी स्थान नहीं रखना चाहिए। यदि घर के शयन कक्ष के बीच में यदि भारी सामान रखा हो तो कमरे में रहने वालों की नींद में बाधा बनी रहती है। शयन कक्ष में पलंग को कभी बीचों-बीच नहीं रखना चाहिए। इसके साथ ही पलंग को कभी भी एकदम कोने में चिपकाकर नहीं रखना चाहिए।
वास्तु के अनुसार घर के आंगन के मध्य भाग को ब्रह्म स्थान माना गया है। इस स्थान को हमेशा खुला और हल्का रखना चाहिए। घर के ब्रह्म स्थान में किसी भी प्रकार का भारी निर्माण या भारी सामान नहीं रखना चाहिए। इसी तरह के घर के कमरों का मध्य स्थान भी महत्वपूर्ण माना जाता है। कमरे के मध्य स्थान को भी हल्का और खाली रखना चाहिए। इसके साथ ही घर के मध्य स्थान की साफ-सफाई का भी बहुत ध्यान रखना चाहिए। अन्यथा आपको समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, ब्रह्म स्थान को जितना हो सके में खुला रखें जिससे हवा के प्रवाह में कोई बाधा न आए। घर के ब्रह्म स्थान की छत को जितना हो सके ऊंचा रखना चाहिए। इस स्थान पर जितनी हो सके दीवारें कम बनवाएं। स्थान में कभी भी नलकूप आदि की खुदाई नहीं करवानी चाहिए। ब्रह्म स्थान एक दम समतल रखना चाहिए।