ज्योतिष में शनि ग्रह को बहुत महत्व दिया जाता है। वहीं आम धारणा के अनुसार लोग शनि, शनि की साढेसाती और शनि की महादशा का नाम सुनते ही हाथ पैर फूलने लगते हैं। लोगों सोचने लगते हैं कि कहीं शनि की अशुभ द्दष्टि उन पर न पड़ने लगे। शनिदेव हमेशा बुरा परिणाम देते हैं ऐसा सोचना बिल्कुल ही सही नहीं है। अगर आपकी कुंडली में शनि शुभ स्थिति में विराजमान हैं तो ये आपको सभी तरह के ऐशोआराम, सुख-सुविधा और संपन्नता दिलाते हैं। शनि के शुभ होने पर व्यक्ति को थोड़े से ही प्रयास में बहुत धन दौलत और वैभव प्राप्त हो जाते हैं। आइए जानते हैं किन राशि वालों के ऊपर से शनि का प्रकोप कम होने वाला है।
शनिदेव: तीन राशि वालों के लिए अच्छी खबर, शनि के प्रकोप से बहुत जल्द मिलेगी मुक्ति
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शनि के अगले साल कुंभ राशि में प्रवेश करते ही धनु राशि से शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव खत्म हो जाएगा। क्योंकि धनु राशि पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। अंतिम चरण खत्म होते ही इस राशि के जातकों को शनि के प्रकोप से मुक्ति मिल जाएगी। वहीं मिथुन और तुला राशि वालों पर चल रही शनि की ढैय्या भी खत्म हो जाएगी। ज्योतिष गणना के अनुसार शनि के 12 जुलाई 2022 को वक्री होने पर कुछ समय के लिए इन राशियों पर शनि की अशुभ छाया फिर से पड़ने लगेगी। 2023 में शनि के मार्गी होने पर पूरी तरह से शनि का प्रकोप धनु , मिथुन और तुला राशि से हट जाएगा।
शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय
शमी के वृक्ष की जड़ को काले कपड़े में पिरोकर शनिवार की शाम दाहिने हाथ में बांधे तथा ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम: मंत्र का तीन माला जप करें।
शनि ग्रह से शुभ फल पाने के लिए शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है। नियमपूर्वक शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं। इस उपाय से शनि द्वारा मिलने वाला नकारात्मक परिणाम समाप्त हो जाता है।
भगवान शिव की तरह उनके अंशावतार बजरंग बली की साधना से भी शनि से जुड़ी दिक्कतें दूर हो जाती हैं। कुंडली में शनि से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंदिर में जाकर अपनी क्षमता के अनुसार कुछ मीठा प्रसाद चढ़ाएं।
शनिवार के दिन शनि महाराज को नीले रंग का अपराजिता फूल चढ़ाएं और काले रंग की बाती और तिल के तेल से दीप जलाएं। साथ ही शनिवार के दिन महाराज दशरथ का लिखा शनि स्तोत्र पढ़ें।
शनिवार या अमावस्या के दिन सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर शनिदेव का ध्यान करें। फिर एक दीपक में सरसों का तेल डालकर जलाएं।