वैदिक ज्योतिष में सभी 9 ग्रहों का विशेष महत्व होता है। इन नौ ग्रहों में शनि ग्रह का बड़ा महत्व है। शनि को ज्योतिष में बहुत ही क्रूर ग्रह समझा जाता है, लेकिन यह सही नहीं है क्योंकि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। अगर कुंडली में शनि मजबूत होते हैं तो जातक को शुभ फल और जीवन में अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। कुंडली में कमजोर शनि अशुभ फल देते हैं। इसके अलावा शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह है जिस कारण से इनका शुभ अशुभ परिणाम लंबे समय तक चलता है। शनि किसी एक राशि में ढ़ाई वर्षो तक रहते हैं फिर उसके बाद अन्य राशि में अपनी राशि बदलते हैं। इस तरह से शनि को सभी 12 राशियों का एक चक्कर लगाने में लगभग 30 वर्षो का समय लगाते हैं। शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा लगने से जातकों को कई तरह की परेशानी से जूझना पड़ता है। शनि मकर और कुंभ राशि के स्वामी होते हैं। तुला राशि शनि की उच्च और मेष राशि शनि की नीच राशि मानी गई है। पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी भी शनि देव होते हैं।
Shani Sade Sati: जानें कब और कैसे शुरू होती है शनि की साढ़ेसाती, इन राशियों पर है इसका प्रभाव
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 14 Jun 2021 11:13 AM IST
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