What Is Muntha In Vedic Astrology: ज्योतिष में भविष्य जानने के कई तरीके हैं, लेकिन कई ज्योतिष आपके आने वाले वार्षिक भविष्य को मुंथा के आधार पर भी बताते हैं। वर्षफल कुंडली एक वार्षिक कुंडली है जो जन्म कुंडली के आधार पर बनाई जाती है और किसी व्यक्ति के जीवन में एक वर्ष के दौरान होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान लगाने के लिए उपयोग की जाती है। इससे वर्ष की घटना और संभावनाओं पर विचार करते हैं। आइए जानते हैं विस्तार से....
Muntha: क्या है मुंथा? जानें ज्योतिष में इसकी मदद से कैसे जान सकते है अगले वर्ष का भविष्यफल
ज्योतिष में भविष्य जानने के कई तरीके हैं, लेकिन कई ज्योतिष आपके आने वाले वार्षिक भविष्य को मुंथा के आधार पर भी बताते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि मुंथा क्या है? इसके प्रभाव क्या हैं? कैसे जाने कि मुंथा कहां है? और इससे भविष्यफल कैसे जााना जा सकता है?...
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मुंथा क्या है?
मुंथा कोई ग्रह या राशि नहीं है, बल्कि वर्षफल कुंडली में एक काल्पनिक गणितीय बिंदु है जो हर वर्ष जन्म लग्न से एक भाव आगे बढ़ता जाता है। जन्म कुंडली में मुंथा सदैव लग्न में स्थित रहती है और हर वर्ष यह एक राशि आगे बढ़ती जाती है। जैसे यदि किसी का जन्म मेष लग्न में हो तो जातक के जन्म के समय मुंथा मेष राशि में होगी तथा आने वाले वर्ष में यह मुंथा वृषभ राशि में और इससे आगे आने वाले वर्ष में यह मिथुन में स्थित होगी। इस तरह यह आगे बढ़ती जाती है। वर्तमान में यह कहां किसी भाव में है इसके लिए जातक की उम्र देखकर ही वार्षिक भविष्य का निर्णय होता है।
कैसे जाने कि मुंथा कहां है?
जैसे यदि आपकी कुंडली में लग्न में सिंह राशि है तो सिंह राशि की संख्या 5 है। अर्थात यह मेष से लेकर मीन तक की 12 राशियों में यह 5वीं राशि है। अब जिन भी वर्षों की गणना करनी है या वार्षिक फल निकालना हो तो जन्म से उन वर्षों की संख्या को जोड़ना है। जैसे यदि यह जोड़ 12 वर्ष से ज्यादा आए तो फिर इसे 12 से भाग दें और अब जो शेष संख्या बचे उसी में मुंथा स्थित होगी। यदि शेष संख्या शून्य आती है तो इसे बारहवीं राशि कहेंगे। यदि 3 है तो उसे मिथुन राशि मानेंगे।
जन्म कुंडली में लग्न राशि और उसकी संख्या: यदि लग्न तुला राशि है, तो उसकी संख्या 7 होगी।
वर्तमान वर्ष की आयु: मान लीजिए कि आप 32 वर्ष के हैं।
लग्न संख्या में आयु जोड़ें: 7+32 = 39.
योगफल को 12 से भाग दें: 39/12 = 3.
शेष संख्या मुंथा राशि होगी.
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मुंथा का प्रभाव
- वर्ष कुण्डली में जिस भाव में मुंथा स्थित होती है उस भाव तथा भाव के स्वामी की स्थिति को देखा जाता है। अर्थात वह बली हैं या निर्बल है। इसी प्रकार हम वर्ष कुण्डली में वर्षेश तथा पंचाधिकारियों की स्थिति को भी देखा जाता है। वर्षेश की स्थिति कुण्डली में यदि कमजोर है तो शुभ नहीं है।
- मुंथा जिस भाव में होती है, उस भाव के स्वामी को मुंथेश कहते हैं। मुंथा जिस भाव में स्थित होती है, उस भाव से संबंधित मामलों में मुंथा का प्रभाव अधिक होता है। वर्ष के फल तभी शुभ होंगे जब मुंथेश उच्च युक्त या स्वराशि से युक्त हो।