Sawan Pradosh Vrat 2026: सावन का महीना और प्रदोष तिथि, दोनों ही भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माने जाते हैं, इसलिए इस अवधि में प्रदोष व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस बार सावन में सोम प्रदोष और भौम प्रदोष का विशेष संयोग बन रहा है, जो शिव भक्ति के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है। ऐसे में श्रावण मास के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर जलाभिषेक करना विशेष फलदायी रहेगा। मान्यता है कि प्रदोष व्रत करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन को शांति मिलती है। साथ ही संतान, स्वास्थ्य, धन और करियर से जुड़ी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी यह व्रत बेहद प्रभावशाली माना गया है। आइए जानते हैं सावन में प्रदोष व्रत की तिथियां और उनका महत्व।
Sawan Pradosh Vrat 2026: सावन में प्रदोष व्रत पर बन रहा है अद्भुत संयोग, जानें सही तिथियां और पूजा मुहूर्त
Sawan Pradosh Vrat 2026: सावन का महीना और प्रदोष तिथि, दोनों ही भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माने जाते हैं, इसलिए इस अवधि में प्रदोष व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं सावन में प्रदोष व्रत की तिथियां और उनका महत्व।
सावन में प्रदोष व्रत की तिथियां
सोम प्रदोष व्रत
सावन के पहले प्रदोष व्रत पर सोमवार व्रत और प्रदोष व्रत का अद्भुत संगम बन रहा है। सावन के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 अगस्त की सुबह 8:00 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 4:54 बजे तक रहेगी। ऐसे में 10 अगस्त को ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त- रात 7:05 बजे से 9:14 बजे तक
भौम प्रदोष व्रत
सावन के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त को सुबह 6:20 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 7:59 बजे तक रहेगी। ऐसे में 25 अगस्त 2026, मंगलवार को ही सावन का दूसरा प्रदोष व्रत रखा जाएगा। मंगलवार को पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है।
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 6:51 बजे से रात 9:04 बजे तक
प्रदोष व्रत के दिन क्या करें
- सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव का ध्यान करें।
- शिवलिंग का जल, दूध, गंगाजल या पंचामृत से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद चंदन अर्पित करें।
- सूर्यास्त के समय प्रदोष काल में विशेष पूजा अवश्य करें।
- “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- शिव चालीसा, रुद्राष्टक या अन्य शिव स्तुति का पाठ करें।
- अपनी श्रद्धा अनुसार दान-पुण्य करें, जैसे अन्न या वस्त्र दान।
- पूरे दिन संयमित व्यवहार रखें और सकारात्मक सोच बनाए रखें।
- संभव हो तो फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें।
Heavy Rainfall: क्यों होती है भीषण बारिश? क्या बताया गया है धर्म और पुराणों में अतिवृष्टि और अनावृष्टि का कारण
Lakshmi Mantra: चुपचाप करें मां लक्ष्मी के इन चमत्कारी मंत्रों का जाप, खिंचा चला आएगा धन और वैभव
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।