मार्च के माह में मौसम बेहद ही सुहावना रहता है। इस महीने में मौसम अपनी करवट बदलता है और गर्मी की शुरूआत होने लगती है। इस महीने में कई व्रत एवं त्योहार पड़ने वाले हैं। रंगों का पावन पर्व भी इसी महीने में मनाया जाएगा। इस महीने का आगाज फाल्गुन शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथि से हो रही है। मार्च 2020 में पड़ने वाले प्रमुख व्रत एवं त्योहार इस प्रकार हैं..
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March 2020 Calendar: मार्च माह में मनाई जाएगी होली, देखें इस महीने के प्रमुख व्रत एवं त्योहार
Mon, 02 Mar 2020 06:18 AM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Mon, 02 Mar 2020 06:18 AM IST
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02 फरवरी रोहणी व्रत
- रोहिणी व्रत का जैन समुदाय में विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जैन समुदाय में कुल 27 नक्षत्र होते हैं जिनमें एक नक्षत्र रोहिणी नक्षत्र होता है। यह व्रत एक हर महीने में आता है। सामान्य रूप से महीने का 27वां दिन रोहिणी नक्षत्र में ही पड़ता है।
- फोटो : holi
03 फरवरी होलाष्टक प्रारंभ
- हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक शुरू हो जाएगा। यह तिथि 03 मार्च को पड़ रही है यानि होलाष्टक 03 मार्च से शुरु और 09 मार्च को समाप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक के दौरान कोई भी मांगलिक कार्य (शादी, विवाह, वाहन खरीदना या घर खरीदना, अन्य मंगल कार्य) नहीं किए जाते हैं। हालांकि इस दौरान पूजा पाठ करने और भगवान का स्मरण और उनके भजन करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
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holika dahan in dehradun
- फोटो : amar ujala
09 फरवरी होलिका दहन
हिरण्यकश्यप ने पुत्र प्रहलाद की हत्या कराने की कई बार कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया तो उसने योजना बनाई। इस योजना के तहत उसने बहन होलिका की सहायता ली। होलिका को वरदान मिला था, वह अग्नि से जलेगी नहीं।
योजना के तहत होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान ने भक्त प्रहलाद की सहायता की। इस आग में होलिका तो जल गई और भक्त प्रहलाद सही सलामत आग से बाहर आ गए। तब से होलिका दहन की परंपरा है। होलिका में सभी द्वेष भाव और पापों को जलाने का संदेश दिया जाता है।
- शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन की परंपरा भक्त और भगवान के संबंध का अनोखा एहसास है। कथानक के अनुसार भारत में असुरराज हिरण्यकश्यप राज करता था। उनका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था, लेकिन हिरण्यकश्यप विष्णु द्रोही था।
हिरण्यकश्यप ने पुत्र प्रहलाद की हत्या कराने की कई बार कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया तो उसने योजना बनाई। इस योजना के तहत उसने बहन होलिका की सहायता ली। होलिका को वरदान मिला था, वह अग्नि से जलेगी नहीं।
योजना के तहत होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान ने भक्त प्रहलाद की सहायता की। इस आग में होलिका तो जल गई और भक्त प्रहलाद सही सलामत आग से बाहर आ गए। तब से होलिका दहन की परंपरा है। होलिका में सभी द्वेष भाव और पापों को जलाने का संदेश दिया जाता है।
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10 फरवरी, होली
- इस पावन दिन रंगों की होली खेली जाएगी।