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Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर राशिनुसार करें दान, नौकरी में तरक्की और भाग्य में होगी वृद्धि

Mon, 13 Jan 2025 01:25 PM IST
मेघा कुमारी पं. मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य
पं. मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य Published by: मेघा कुमारी Updated Mon, 13 Jan 2025 01:25 PM IST
सार

Makar Sankranti 2025: मकर संक्रान्ति से सूर्य के उत्तरायण होने पर देवताओं का सूर्योदय होता है और दैत्यों का सूर्यास्त होने पर उनकी रात्रि प्रारंभ हो जाती है उत्तरायण में दिन बडे़ और रातें छोटी होती हैं।

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Makar Sankranti 2025 - फोटो : अमर उजाला

Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति से सूर्य के उत्तरायण होने पर देवताओं का सूर्योदय होता है और दैत्यों का सूर्यास्त होने पर उनकी रात्रि प्रारंभ हो जाती है उत्तरायण में दिन बडे़ और रातें छोटी होती हैं। मकर संक्रांति पर स्नान, व्रत, अनुष्ठान, पूजन, हवन, यज्ञ, वेद पाठ, अभिषेक, दान आदि का विशेष महत्व है। ऐसी भी मान्यता है कि इस तारीख से दिन रोज तिल भर बढ़ने लगते हैं, इसलिए इसे तिल संक्रांति के रूप में भी मनाया जाता है। दरअसल, सूर्य नारायण बारह राशियों में एक-एक माह विराजते हैं, जब भास्कर देव कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक,और धनु राशि में रहते हैं तो इस काल को दक्षिणायन कहते हैं इसके बाद सूर्य नारायण मकर, कुंभ, मीन, मेष, वृष और मिथुन राशि में क्रमशः एक-एक माह रहते हैं इसे ही उत्तरायण कहते हैं और जिस दिन भगवान सूर्य उत्तरायण होते हैं तो उस तिथि को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है इस दिन सूर्य नारायण मकर राशि में प्रवेश करते है।

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महाभारत काल के महान योद्धा भीष्म पितामह ने भी अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही चयन किया था। - फोटो : adobe stock

मकर संक्रांति से जुड़ी पौराणिक कथाएं
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने  बताया कि मकर संक्रांति पर भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाया करते हैं। शनिदेव चूंकि मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा उनसे मिली थीं। यह भी कहा जाता है कि गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी। इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है।

  • महाभारत काल के महान योद्धा भीष्म पितामह ने भी अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति का ही चयन किया था।
  • उत्तर भारत में इसे खिचड़ी आदि खाकर मनाया जाता है जबकि गुजरात में यह पर्व पतंगोत्सव के रूप में मनाया जाता है। 
  • अलग-अलग मान्यताओं के अनुसार इस पर्व के पकवान भी अलग-अलग होते हैं, लेकिन दाल और चावल की खिचड़ी इस पर्व की प्रमुख पहचान बन चुकी है। विशेष रूप से गुड़ और घी के साथ खिचड़ी खाने का महत्व है।इसीलिए  उत्तर भारत में इस पर्व को 'खिचड़ी 'के नाम से भी जाना जाता है इसके अलावा तिल और गुड़ का भी मकर संक्राति पर बेहद महत्व है। मकर संक्रांति पर दान का बहुत महत्व है। विशेषकर इस दिन तिल, खिचड़ी, गुड़ एवं कंबल दान करने का महत्व है |
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मकर संक्रांति 2025 तिथि - फोटो : अमर उजाला

मकर संक्रांति 2025 तिथि
इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025 को मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार सूर्यदेव इस दिन धनु से निकलकर मकर राशि में सुबह 09 बजकर 3 मिनट पर प्रवेश करेंगे। 

महापुण्य काल मुहूर्त 2025 
पंचांग के अनुसार  मकर संक्रांति पर महापुण्य काल का मुहूर्त सुबह 08 बजकर 40 मिनट से 09 बजकर 04 मिनट तक रहेगा।

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मकर संक्रांति 2025 - फोटो : Amar Ujala

मकर संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त 
ज्योतिष गणना के अनुसार मकर संक्रांति पर पुण्य काल मुहूर्त 14 जनवरी 2025 को सुबह 08 बजकर 40 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। पुण्य काल के मुहूर्त में गंगा स्नान और दान करने का विशेष महत्व होता है। 

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जल में तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। मूंग की दाल की खिचड़ी दान करें - फोटो : freepik

राशि के अनुसार दान

  • मेष - जल में पीले पुष्प, हल्दी, तिल मिलाकर अर्घ्य दें। तिल-गुड़ का दान करें।
  • वृष - जल में सफेद चंदन, दूध, श्वेत पुष्प, तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। खिचड़ी का दान करें |
  • मिथुन - जल में तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। मूंग की दाल की खिचड़ी दान करें।
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