मनुष्य के जीवन में भारी उतार-चढ़ाव लाने वाले ‘कालसर्प योग’की छाया नए संवत्सर के आरंभ से ही पड़ रही है।‘प्रमादी’नामक नए संवत्सर के शुभारम्भ से ही राहु और केतु के द्वारा बनने वाले कालसर्प योग की छाया पड़ना देश और देश की जनता के लिए शुभ नहीं है क्योंकि, स्वतंत्र भारत की वृषभ लग्न की जन्मकुंडली में यह योग 'कुलिक' कालसर्प योग के रूप में असर दिखाएगा। जो देश में साम्प्रदायिकता बढ़ा सकता है और स्वतंत्र भारत की ही प्रभाव राशि कर्क के बारहवें भाव में 'शेषनाग' कालसर्प योग के रूप में भी देश के लिए शुभ नहीं रहेगा क्योंकि, यह योग देश अथवा व्यक्ति को आर्थिक रूप से कमजोर बनाता है।
इस योग का नैसर्गिक प्रभाव यह भी है कि यदि यह योग शुभ है तो व्यक्ति को जीवन के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचाता है और अशुभ है तो व्यक्ति को अर्श से फर्श पर भी ला खड़ा करता है। भारतवर्ष के ही नहीं वरन संसार के कई राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित अनेकों महान नेता, उद्योगपति, फ़िल्मी कलाकार लेखक आदि इसी योग के शुभ प्रभाव से अपने जीवन में महानतम मापदंडों को स्थापित किया है और कई बड़ी शख्सियतें इस योग के कुप्रभाव से समय आने पर जमींदोज भी हुई हैं।
नूतन संवत्सर के प्रथम दिन सूर्योदय के समय बृहस्पति केतु के साथ अपनी राशि धनु में विराजमान हैं किंतु ये इस राशि की अंतिम 30वीं कला का भोग कर रहे हैं और अतिचारी अवस्था में 29 मार्च की मध्यरात्रि पश्चात 03 बजकर 48 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। राहू मिथुन एवं केतु धनु राशि की 10वीं कला का भोग कर रहे हैं इसलिए सभी ग्रहों के साथ-साथ वृहस्पति भी राहु केतु के अक्ष में है अतः कालसर्प योग भंग नहीं हुआ। यदि बृहस्पति का भोगांश कम होता और राहु-केतु भोगांश ज्यादा होता तो ये कालसर्प योग भंग हो जाता। आपकी राशि पर किस 'कालसर्प' योग की छाया है इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
मेष राशि- आपकी राशि पर बना 'वासुकी' कालसर्प योग आपको साहसी और पराक्रमी बनाएगा। इसका प्रभाव आपके लिए सर्वदा शुभ रहेगा किंतु ध्यान रहे, आपके कुछ मनमाने निर्णय के कारण परिवार में कलह बढ़ सकती है।
वृषभ राशि- आपकी राशि के लिए 'कुलिक' कालसर्प योग स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव तो डालेगा किंतु, आकस्मिक धन प्राप्ति के योग भी बनाएगा। डूबा हुआ धन वापस मिलने के योग, कार्यक्षेत्र में षड्यंत्र का शिकार होने से बचें।
मिथुन राशि- उच्चराशिगत राहु के द्वारा निर्मित 'अनंत' कालसर्प योग प्रभाव वृद्धि करेगा, फिर भी अपनी जिद एवं आवेश पर नियंत्रण रखते हुए ही निर्णय लेंगे तो सफल रहेंगे। व्यर्थ विवादों से बचें, आलस्य छोड़ें काम पर लगें।