देवगुरु बृहस्पति आज रात्रि 8 बजकर 28 मिनट पर कुंभ राशि में गोचर करते हुए वक्री हो रहे हैं। वक्री अवस्था में ही भ्रमण करते हुए ये इसी वर्ष 14 सितंबर को दोपहर 2 बजकर बजकर 28 मिनट पर अपनी नीच राशि मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इनके वक्री अथवा मार्गी अवस्था में गोचर करने का पृथ्वी वासियों पर सीधा असर दिखाई पड़ता है। ये जिनकी जन्मकुंडली के अशुभ भाव में होंगे उन्हें कुछ अधिक परेशान करेंगे और जिनके शुभ भाव में गोचर कर रहे हैं उन्हें परेशान होने की आवश्यकता नहीं। सभी राशियों पर इनके वक्री होने का प्रभाव कैसा पड़ेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
आज से गुरु की टेढ़ी चाल: देवगुरु बृहस्पति हुए वक्री, जानें सभी 12 राशियों पर शुभ-अशुभ असर
मेष राशि
राशि से लाभ भाव में गोचर कर रहे बृहस्पति के वक्री होने के फलस्वरूप आय के स्रोत में कमी आएगी किंतु, संतान संबंधी चिंता दूर होगी। नव दंपत्ति के लिए संतान प्राप्ति एवं प्रादुर्भाव के भी योग बनेंगे। विद्यार्थियों अथवा प्रतियोगिता में बैठने वाले छात्रों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं। परिवार के वरिष्ठ सदस्यों अथवा बड़े भाइयों से मतभेद न होने दें। उच्चाधिकारियों से संबंध बिगड़ने न दें।
वृषभ राशि
राशि से दशम कर्म भाव में गोचर करते हुए गुरु का प्रभाव आपके लिए शुभ ही रहेगा। नौकरी में आकस्मिक परिवर्तन और पदोन्नति का योग बनाएंगे। काफी दिनों का प्रतीक्षित पड़ा हुआ कार्य संपन्न होगा। माता पिता के स्वास्थ्य के प्रति चिंतनशील रहें। अपनी योजनाओं को गोपनीय रखते हुए कार्य करेंगे तो अधिक सफल रहेंगे। केंद्र अथवा राज्य सरकार के विभागों से संबंधित किसी टेंडर का आवेदन करना चाह रहे हों तो अवसर अनुकूल रहेगा।
मिथुन राशि
राशि से नवम भाग्य भाव में गोचर करते हुए गुरु का प्रभाव आपके लिए बेहतरीन सफलता दिलाने वाला सिद्ध होगा किंतु, कहीं न कहीं कार्य बाधा का भी सामना करना पड़ेगा हताश न हो संयम से काम लेंगे तो सफलता अधिक मिलेगी। धर्म एवं अध्यात्म के प्रति रुचि बढ़ेगी। संतान संबंधी चिंता से मुक्ति मिलेगी। नव दंपति के लिए संतान प्राप्ति एवं प्रादुर्भाव के भी योग। विदेशी कंपनियों में सर्विस अथवा नागरिकता के लिए किया गया प्रयास सफल रहेगा।
राशि से अष्टम आयु भाव में वक्री अवस्था में गोचर करते हुए गुरु का प्रभाव बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता। स्वास्थ्य के प्रति अधिक सावधान रहें। जमीन जायदाद से संबंधित विवाद भी लंबित पड़ सकते हैं। कार्यक्षेत्र में भी षड्यंत्र का शिकार होने से बचें। झगड़े विवाद से दूर ही रहें और कोर्ट कचहरी से संबंधित मामले भी बाहर ही सुलझायें। इन सबके बावजूद मान-सम्मान की वृद्धि होगी और सामाजिक पद प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी।