Gupt Navratri 2026: आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होगी। इस वर्ष 15 जुलाई बुधवार से गुप्त नवरात्रि पर माता के नौ रूपों की पूजा शुरू हो जाएगी। आगामी 23 जुलाई तक गुप्त नवरात्रि पर खासतौर पर तांत्रिक साधना, विशेष अनुष्ठान और गुप्त उपासना होगी।
गुप्त नवरात्रि का महत्व और स्वरूप
गुप्त नवरात्रि के दौरान कई साधक महाविद्या तंत्र साधना के लिए आराधना करते हैं, जबकि अन्य लोग पूरे नौ दिनों तक मां आदिशक्ति के नौ रूपों की पूजा-अर्चना विधि-विधान से करेंगे। वसंत और शारदीय नवरात्रि गृहस्थों और सामान्य जनों के लिए है परंतु गुप्त नवरात्रि संतों और साधकों को लिए है। यह साधना की नवरात्रि है उत्सव की नहीं। इसलिए इसमें खास तरह की पूजा और साधना का महत्व होता है। यह नवरात्रि विशेष कामना हेतु तंत्र-मंत्र की सिद्धि के लिए होती है। गुप्त नवरात्रि में विशेष पूजा से कई प्रकार के दुखों से मुक्ति पाई जा सकती है। अघोर तांत्रिक लोग गुप्त नवरात्रि में महाविद्याओं को सिद्ध करने के लिए उपासना करते हैं। यह नवरात्रि मोक्ष की कामना से भी की जाती है।
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तांत्रिक साधना और महाविद्याओं की पूजा
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तांत्रिक साधना और महाविद्याओं की पूजा
तांत्रिकों को तंत्र साधना करने के लिए गुप्त नवरात्रि का इंतजार रहता है, इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुरा भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते हैं।
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गुप्त नवरात्रि क्यों कहलाती है ‘गुप्त’
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गुप्त नवरात्रि क्यों कहलाती है ‘गुप्त’
कोई भी तांत्रिक साल में केवल दो बार ही अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए तांत्रिक साधना में लग सकता है क्योंकि गुप्त नवरात्रि साल में दो बार आती है। पहला माघ मास के शुक्ल पक्ष में और दूसरा आषाढ़ के शुक्ल पक्ष में। बहुत कम लोगों को इसका ज्ञान होने के कारण या इसके छिपे होने के कारण इसे गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इनमें विशेष मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। गुप्त नवरात्रि, जिसे गायत्री नवरात्रि के रूप में भी जाना जाता है। इस 9-दिवसीय अनुष्ठान के दौरान देवी दुर्गा को प्रसन्न करने की मुख्य विधि तंत्र विद्या के मंत्रों के साथ देवी का आह्वान किया जाता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजा की सबसे प्रसिद्ध विधि तांत्रिक विद्या है जिसमें धन, ज्ञान और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी दुर्गा की साधना की जाती है।
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मंत्र और सिद्धि का महत्व
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मंत्र और सिद्धि का महत्व
गुप्त नवरात्रि में "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे" के महा मंत्र की मदद से सिद्धियां अर्जित की जाती हैं। ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान शक्तिशाली मंत्रों और तंत्र की गुप्त विद्या और तांत्रिक साधनाओं के रूप में देवी दुर्गा की गुप्त पूजा भक्तों को उनकी सभी इच्छाओं और मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए विशेष शक्ति प्राप्त करने में मदद करती है।
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नियम और साधना की प्रक्रिया
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नियम और साधना की प्रक्रिया
चैत्र और आश्विन नवरात्रि गृहस्थ साधकों के लिए विशेष है और गुप्त नवरात्र सिद्ध, संत, ऋषि मुनियों के लिए विशेष महत्त्व रखते है। गुप्त नवरात्र में साधक नवरात्रों का मन, वचन, कर्म से दस महाविद्याओं के मन्त्रों का जाप करते है। मानसिक जाप अधिक किया जाता है। साधना आराधना को गुप्त रखा जाता है। एकांत में ध्यान और मन्त्र जप किया जाता है। मन्त्र सिद्धि और तंत्र सिद्धि के लिए गुप्त नवरात्री अवधि श्रेष्ठ समझी जाती है। नवरात्रि व्रत पालन के नियम बहुत अधिक कठोर नहीं है, परन्तु दस महाविद्याओं कि साधना और आराधना के नियम अत्यंत कठोर है। इन नियमों का पालन करना सब के लिए सहज नहीं है। सिद्ध साधू संत ही पूर्ण रूप से इन नियमों का पालन कर सकते है। गुप्त नवरात्र में साधक अष्ट सिद्धि को प्राप्त करने के लिए साधना आराधना करते है।
पं.मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य