Dummy Jail Experience In India: आज के दौर में “एक्सपीरियंस” ही नया ट्रेंड बन चुका है, लोग सिर्फ जगहें नहीं देखते, बल्कि उन्हें महसूस करना चाहते हैं। कोई पहाड़ों पर एडवेंचर ढूंढता है, तो कोई नई संस्कृतियों में खुद को डुबो देता है। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा ट्रेंड उभरकर सामने आया है, जो सुनने में ही अजीबोगरीब है। दरअसल अब लोग पैसे खर्च करके जेल की जिंदगी जीने का अनुभव ले रहे हैं।
यह सुनने में अजीब जरूर है, लेकिन ये सच है कि भारत में कुछ जगहों पर जेल प्रशासन ने पुराने और खाली पड़े हिस्सों को इस तरह विकसित किया है कि आम लोग वहां एक दिन के लिए “कैदी जैसा जीवन” जी सकें। यह एक तरह का रियल-लाइफ एक्सपीरियंस है, जहां आप असली कैदी तो नहीं होते, लेकिन माहौल पूरी तरह वैसा ही बनाया जाता है।
इस खास अनुभव में भाग लेने के लिए लोगों को एक निश्चित फीस देनी होती है। बदले में उन्हें जेल की वर्दी पहनाई जाती है, वही साधारण खाना दिया जाता है और दिनचर्या भी बिल्कुल कैदियों जैसी होती है। यानी कुछ घंटों या एक दिन के लिए आप अपनी आजादी छोड़कर नियमों से बंधी जिंदगी का अहसास करते हैं।
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लंबे समय तक याद रहता है अनुभव
- फोटो : adobestock
लंबे समय तक याद रहता है अनुभव
उत्तराखंड की हल्द्वानी जेल इस अनोखे प्रयोग के लिए खास तौर पर सुर्खियों में रही है। यहां के खाली पड़े हिस्सों को इस तरह तैयार किया गया है कि लोग एक दिन के लिए जेल में रह सकें। उन्हें अलग-अलग सेल में रखा जाता है, जेल की ड्रेस दी जाती है और खाना भी वहीं की रसोई से मिलता है। पूरा माहौल इतना असली लगता है कि यह अनुभव लोगों को लंबे समय तक याद रहता है।
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लंबे समय तक याद रहता है अनुभव
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अगर फीस की बात करें, तो यहां एक दिन के इस अनुभव के लिए लगभग 500 रुपये देने होते हैं। इसे “डमी जेल एक्सपीरियंस” कहा जाता है, क्योंकि इसमें आप कैदी नहीं होते, लेकिन हर पल आपको वैसा ही महसूस कराया जाता है।
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तेलंगाना में भी है ऐसा जेल
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तेलंगाना में भी है ऐसा जेल
तेलंगाना के संगारेड्डी में भी कुछ ऐसा ही अनोखा प्रयोग देखने को मिलता है। यहां पुराने केंद्रीय जेल को म्यूजियम में बदलकर “Feel the Jail” नाम का प्रोग्राम शुरू किया गया है। इसमें लोग पूरे 24 घंटे जेल के माहौल में रहते हैं, खादी की वर्दी पहनते हैं, स्टील की प्लेट में खाना खाते हैं और तय दिनचर्या का पालन करते हैं। यहां तक कि बैरक की सफाई और पौधे लगाने जैसे काम भी करने पड़ते हैं, जिससे यह अनुभव और भी असली लगने लगता है।
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दिल्ली का 'टूरिस्ट सेल'
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दिल्ली का 'टूरिस्ट सेल'
दिल्ली की तिहाड़ जेल में भी कुछ समय पहले ऐसा ही प्रयोग किया गया था, जहां कुछ हिस्सों को “टूरिस्ट सेल” के तौर पर तैयार किया गया। इसका मकसद लोगों को जेल के जीवन से रूबरू कराना था, ताकि वे समझ सकें कि आज़ादी की असली कीमत क्या होती है।
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