कांग्रेस ने उत्तरप्रदेश में अपनी खोई हुई राजनीतिक विरासत को फिर से हासिल करने के लिए अब दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को चुनावी समर में उतार दिया है। 78 वर्षीया शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर कांग्रेस ने उनके दिल्ली के राजनीतिक अनुभव के साथ-साथ उत्तरप्रदेश के ब्राह्मण वोटरों को साधने के लिए बड़ा दाव खेल है।
इन वजहों से उत्तर प्रदेश में शीला कर सकती है भाजपा और सपा की नींद हराम
नब्बे के दशक की शुरुआत में मंडल आयोग की सिफारिशें लागू होने से लेकर अब तक उत्तर भारत की राजनीति में किसी भी राष्ट्रीय दल ने कभी ब्राह्मण उपनाम वाले नेता को अपना मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। लेकिन कांग्रेस ने एक सोची-समझी चुनावी नीति के तहत उत्तरप्रदेश के लगभग 10 से 13 फीसदी ब्राह्मण मतदाताओं को अपनी ओर लुभाने के लिए शीला दीक्षित पर दांव खेला है।
इन वजहों से उत्तर प्रदेश में शीला कर सकती है भाजपा और सपा की नींद हराम
कांग्रेस सवर्णो के साथ-साथ मुस्लिम मतदाताओं को अपनी ओर कर भाजपा को सत्ता में आने से रोकना चाहती है। ऐसे में शीला को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाना कांग्रेस के लिए कितना फायदेमंद है इस बात का आंकलन ज्योतिष से करने पर जो बातें सामने आ रही है उसे जानकर बीजेपी और दूसरी पार्टीयों की नींद हराम हो सकती है।
इन वजहों से उत्तर प्रदेश में शीला कर सकती है भाजपा और सपा की नींद हराम
सचिन मलहोत्रा बताते हैं कि ज्योतिष की दृष्टिकोण से कांग्रेस की यह चाल सफल होती दिख रही है, क्यूंकि शीला दीक्षित की कुंडली में वह संभावना है कि वह पार्टी के जनाधार को प्रदेश में बढ़ा सकें।
इन वजहों से उत्तर प्रदेश में शीला कर सकती है भाजपा और सपा की नींद हराम
शीला दीक्षित का जन्म पंजाब के कपूरथला के एक पंजाबी खत्री परिवार में 31 मार्च 1938 को दोपहर एक बजे हुआ था। कर्क लग्न की इनकी कुंडली में दशम भाव में मंगल 'रुचक महापुरुष योग' में तथा सप्तम भाव में गुरु नीच भंग योग में स्थित है। इन योगों के प्रभाव से शीला दीक्षित का विवाह उत्तरप्रदेश से कांग्रेस के केंद्रीय मंत्री रहे उमाशंकर दीक्षित के बेटे विनय दीक्षित से हुआ। विनय दीक्षित एक आईएस अधिकारी थे।