हनुमान जी की पूजा करते समय जरूर ध्यान रखने चाहिए ये नियम
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माना जाता है कि हनुमान जी ही एक ऐसे देवता हैं जो कलयुग में भी पृथ्वी पर उपस्थित हैं। वही आदि पंच देवों में कलयुग के जाग्रत देव और प्रत्यक्ष रूप में सूर्य देव को माना जाता है। एक हनुमान जी के सम्बन्ध में माना जाता है कि कलयुग में भी हनुमान साधना तुरंत फल प्रदान करती है। इनकी पूजा करने की विधि बहुत सरल है। हनुमान जी की पूजा आराधना जातक को सभी प्रकार के कष्टों और भय से मुक्ति दिलाती है। हनुमान जी की पूर्ण कृपा प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा करते समय कुछ नियमों का पालन करना बहुत आवश्यक होता है।
हनुमान साधना के दिन प्रातः साधक स्नान कर शुद्ध लाल वस्त्र धारण करने चाहिए।ओर उत्तर दिशा की ओर मुख करके अपने सामने हनुमान जी की मूर्ति या चित्र रखें जिससे उनका मुख दक्षिणाभिमुख रखें।
हनुमान जी की पूजा करते समय अनुष्ठान से संबंधित यंत्र और प्रभु राम एवं माता सीता का चित्र या प्रतिमा रखी जा सकती है। इसके अलावा कोई और प्रतिमा या तस्वीर न रखें।
हनुमान जी की साधना में ध्यान करते समय का विशेष महत्व माना जाता है। हनुमान जी के जिस विग्रह स्वरूप का ध्यान करें वैसी ही मूर्ति अपने अंतर्मन में स्थिर करें और इस तरह से ध्यान लगाएं कि नेत्र बंद करने के पश्चात भी वही स्वरूप नजर आता रहे।
- पूजा आरंभ करने से पहले साधक को संकल्प लेना चाहिए।
- हनुमान साधना में तन के साथ मन की शुद्धता एवं पवित्रता होना भी बहुत अनिवार्य है।
- हनुमान जी की साधना करने के दौरान ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन करना बहुत आवश्यक होता है।
- हनुमान जी की पूजा पूर्ण आस्था, श्रद्धा और सेवा भाव के साथ करनी चाहिए।
- हनुमान जी को अर्पित किया जाने वाला प्रसाद शुद्ध घी का बना होना चाहिए।
- जो प्रसाद हनुमान जी को अर्पित करें उसे साधक को भी ग्रहण करना चाहिए।
- हनुमान जी को तिल या चमेली के तेल में मिले हुए सिंदूर का लेपन करना चाहिए।
- हनुमान जी का तिलक करने के लिए केसर के साथ लाल चंदन घिसकर लगाना चाहिए।