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23 सितंबर को केतु बदलेंगे अपनी चाल, बुरे प्रभाव से बचने के लिए करें ये काम
Sun, 20 Sep 2020 11:31 AM IST
रुस्तम राणा
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Sun, 20 Sep 2020 11:31 AM IST
सार
- केतु 23 सितंबर को धनु से वृश्चिक राशि में गोचर कर रहे हैं।
- केतु के इस गोचर का असर सभी राशियों पर पड़ेगा।
- केतु के प्रबल योग बनने पर व्यक्ति दयालु होता है।
- वहीं केतु के अशुभ होने पर शत्रुता बढ़ती है।
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केतु का वृश्चिक में गोचर 2020
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
- केतु 23 सितंबर को धनु से वृश्चिक राशि में गोचर कर रहे हैं। केतु का गोचर इस साल की बड़ी ज्योतिषीय घटनाओं में से एक है। केतु के इस गोचर का असर सभी राशियों पर पड़ेगा। यह प्रभाव शुभ-अशुभ रूप में हो सकता है। वैदिक ज्योतिष में केतु छाया ग्रह के साथ-साथ एक रहस्यमयी ग्रह है।
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केतु है एक रहस्यमयी ग्रह
- फोटो : सोशल मीडिया
- केतु को मोक्ष, अध्यात्म और वैराग्य का कारक माना जाता है। जब केतु किसी व्यक्ति की कुंडली में शुभ होता है तो वह उस व्यक्ति की कल्पना शक्ति को असीम कर देता है। कुंडली में केतु के प्रबल योग बनने पर व्यक्ति दयालु होता है वहीं केतु के अशुभ होने पर शत्रुता बढ़ती है।
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- केतु ग्रह के कमजोर होने पर जातकों को इसके बुरे परिणाम झेलने पड़ते हैं। खासकर व्यक्ति के सिर के नीचे का हिस्सा कमजोर होता है। उसे अपने ननिहाल पक्ष से प्यार नहीं मिलता है। इसके अशुभ होने पर संतान को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
- केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव से शारीरिक पीड़ाएं भी होती हैं। व्यक्ति को कान, रीढ़ की हड्डी, घुटने, लिंग, किडनी, जोड़ों के दर्द आदि रोगों का सामना करना पड़ता है।
भगवान गणेश की करें पूजा
- फोटो : सोशल मीडिया
- ज्योतिष शास्त्र में केतु को मजबूत बनाने के आसान उपाय बताये गए हैं। कुंडली में केतु को मजबूत करने के लिए गणपति महाराज की आराधान करें। दो रंग वाले कुत्ते को रोटी खिलाएं। केतु को मजबूत करने के लिए ज्योतिष में रत्न, जड़ी और रुद्राक्ष को धारण करना भी बताया गया है।
- केतु को शक्तिशाली बनाने के लिए लहसुनिया रत्न, अश्वगंधा की जड़ी और नौ मुखी रुद्राक्ष को धारण किया जाता है। इसके अलावा केतु यंत्र को स्थापित कर उसकी आराधन करना भी केतु ग्रह को मजबूत बनाता है।
केतु को मजबूत करने के लिए भैरव देव की करें आराधना
- फोटो : सोशल मीडिया
- केतु से मिलने वाली पीड़ा को दूर करने के लिए भैरव उपासना से बड़ा कोई उपाय नहीं है। भगवान भैरव को प्रसन्न करने के लिए उड़द की दाल या इससे निर्मित मिष्ठान, दूध-मेवा का भोग लगाएं।
- भगवान भैरव को चमेली का पुष्प अतिप्रिय है, इसलिए भैरव को मनाने के लिए, उनकी कृपा पाने के लिए इस पुष्प का विशेष रूप से प्रयोग करें। ज्योतिष में बताए गए केतु के इन उपायों से आपके ऊपर केतु देव की कृपा बरसेगी।