हमारे शास्त्रों में दिनचर्या को लेकर कुछ महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं। हमारे बड़े बुजुर्ग इन नियमों का पालन करते आए हैं लेकिन आज की आधुकनिकता भरी चकाचौंध की जिंदगी में लोगों की दिनचर्या बिगड़ती जा रही है। कई बार व्यक्ति के जीवन में समस्याएं बढ़ने लगती हैं। क्या आपको पता है कि इसके पीछे व्यक्ति की स्वयं की आदते होती हैं। यदि जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली चाहते हैं तो सर्वप्रथम कुछ आदतों में सुधार करना चाहिए साथ ही बिस्तर से उठते ही यदि आप कुछ कार्यों को करके अपने दिन की शुरूआत करते हैं तो आपका पूरा दिन अच्छा जाता है साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
बड़े बुजुर्ग इस तरह करते थे सुबह की शुरूआत, पूरा दिन जाता है अच्छा, बनी रहती है सुख-समृद्धि
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आज के समय में लोग काम या फिर कंप्यूटर, मोबाइल चलाने के कारण देर रात तक जागते हैं और सुबह को देर तक सोते रहते हैं जो सेहत के लिहाज से तो खराब होता ही है साथ ही हमारे जीवन को भी प्रभावित करता है। पहले के लोग सदैव ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाते थे। शास्त्रों में भी ब्रह्म मुहूर्त में उठना शुभ माना जाता है। यदि आप सुबह को ब्रह्म मुहूर्त में नहीं भी उठ सकते हैं तो कम से कम छह बजे तक उठ जाना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार प्रातः सबसे पहले बिस्तर से उठते ही अपनी दोनों हथेलियों को जोड़कर उनके दर्शन करने चाहिए और तीन से चार बार अपने मुंह पर फेरना चाहिए। मान्यता यह है कि हथेली में महालक्ष्मी, सरस्वती और भगवान विष्णु का वास होता है। जिससे आपको उनकी कृपा मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
सोकर उठने के बाद जब अपने बिस्तर से उठें तो पैर नीचे रखने से पहले भूमि को प्रणाम करना चाहिए। इसके बाद धरती पर उतरते ही पृथ्वी को स्पर्श करके प्रणाम करें। बड़े बुजुर्ग सदैव धरती माता को प्रणाम करने के पश्चात ही उठते थे। यदि घर में झाड़ू लगानी हो तो सबसे पहले झाड़ू को भी प्रणाम करें क्योंकि झाड़ू को लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है।
बिस्तर से उठकर पृथ्वी को प्रणाम करने के तुरंत बाद मल-मूत्र का त्याग करना चाहिए। मल, मूत्र, छींक, उबासी, खांसी इन सभी चीजों के हमारे शरीर के भीतर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। जिससे शरीर स्वस्थ रहता है। इन्हे एक तरह का वेग माना गया है यदि इनको शरीर में रोका जाए तो यह सेहत के लिए सही नहीं रहता है।