{"_id":"c2fff1cc9d5756ab903dd0927f91934e","slug":"yamuna-expressway-have-quality-like-runway-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसी रनवे से कम नहीं है यमुना एक्सप्रेसवे","category":{"title":"City and States Archives","title_hn":"शहर और राज्य आर्काइव","slug":"city-and-states-archives"}}
किसी रनवे से कम नहीं है यमुना एक्सप्रेसवे
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Fri, 22 May 2015 02:16 AM IST
विज्ञापन
165 किमी लंबा है यमुना एक्सप्रेसवे
100 मीटर चौड़ाई (दोनों तरफ मिलाकर)
20 टन का दबाव झेल सकती है रोड
10 टन होता है लड़ाकू विमान का वजन
06 लेन का है यह एक्सप्रेसवे
35 अंडरपास हैं पूरे मार्ग में
01 रेल ओवर ब्रिज है एक्सप्रेसवे पर
01 बड़ा पुल ग्रेटर नोएडा से आगरा के बीच
42 छोटे-छोटे पुल हैं मार्ग में
70 वाहन अंडरपास बने हैं पूरे मार्ग पर
-------------------------
एक्सप्रेसवे के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री
33.2 लाख क्यूबिक मीटर कंकरीट
411.1 लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी व फ्लाई एश
12 लाख टन सीमेंट
1.30 लाख टन स्टील
1.130 लाख टन स्टोन
12,500 टन एडमिक्चर्स
7500 टन डामर
------------------------
एयरफोर्स ने लड़ाकू विमान की लैंडिंग कराने का इतिहास रचने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे को ऐसे ही नहीं चुना। यह तमाम मायनों में खास है। बेजोड़ मजबूती के साथ-साथ कई जगह यह लंबी दूरी तक समतल और अवरोधविहीन है। मोबाइल टावर और बिजली के खंभे भी दूर तक नहीं नजर आते। छह लेन वाले इस एक्सप्रेसवे की चौड़ाई भी इतनी है कि लड़ाकू विमान इस पर आसानी से दौड़ सकता है। किसी भी एयरपोर्ट के रनवे से कमतर नहीं है यमुना एक्सप्रेसवे।
यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहन चलाने का अलग अनुभव होता है। दूसरे हाईवे से काफी जुदा है यह। सुविधा के साथ-साथ इस पर सुरक्षा के भी पूरे बंदोबस्त हैं। लड़ाकू विमान की लैंडिंग के सफल परीक्षण ने यह साबित भी कर दिया कि एतिहासिक प्रयोग के लिए भारतीय वायुसेना का फैसला गलत नहीं था। दरअसल, यह पूरा एक्सप्रेसवे सीमेंट और कंकरीट से बना है। इसका आधार भी इतना मजबूत है कि यह एक ही स्थान पर 20 टन से ज्यादा का दबाव सह सकता है, जबकि लड़ाकू विमान का वजन इसके आधे से भी कम होता है। यह एक के बाद एक कई विमानों का दबाव सहने की स्थिति में है। इसके अलावा यह एक्सप्रेसवे दोनों तरफ से कटीले तार से घिरा हुआ है। इससे किसी जानवर या अन्य के अचानक सड़क पर आने की संभावना भी नहीं है। विमानों की लैंडिंग के लिए जो सबसे अहम होता है, वह रनवे का समतल और अवरोधविहीन होना। यमुना एक्सप्रेसवे इस मायने में भी खरा है। टोल प्लाजा वाले स्थानों को छोड़कर लंबी दूरी तक यह समतल है। इससे जमीन पर उतरने के बाद वह असंतुलित नहीं हो सकता।
इनसेट
खेरिया और हिंडन के लिए बेहतर विकल्प
रोड रनवे का प्रयोग इमरजेंसी लैंडिंग के लिए ही होता है। इस सफल परीक्षण के बाद खेरिया और हिंडन स्थित एयरपोर्ट के प्रबंधन को भविष्य में काफी सहूलियत मिल सकती है। यह दोनों एयरपोर्ट एयरफोर्स के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। यहां विमानों का ट्रैफिक ज्यादा रहता है। ऐसे में इमरजेंसी के वक्त रनवे के रूप में विमानों की लैंडिंग के लिए इन दोनों एयरपोर्ट के प्रबंधन के पास यह बेहतर विकल्प होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
100 मीटर चौड़ाई (दोनों तरफ मिलाकर)
20 टन का दबाव झेल सकती है रोड
10 टन होता है लड़ाकू विमान का वजन
06 लेन का है यह एक्सप्रेसवे
35 अंडरपास हैं पूरे मार्ग में
01 रेल ओवर ब्रिज है एक्सप्रेसवे पर
01 बड़ा पुल ग्रेटर नोएडा से आगरा के बीच
42 छोटे-छोटे पुल हैं मार्ग में
70 वाहन अंडरपास बने हैं पूरे मार्ग पर
-------------------------
एक्सप्रेसवे के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री
33.2 लाख क्यूबिक मीटर कंकरीट
411.1 लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी व फ्लाई एश
12 लाख टन सीमेंट
1.30 लाख टन स्टील
1.130 लाख टन स्टोन
12,500 टन एडमिक्चर्स
7500 टन डामर
------------------------
एयरफोर्स ने लड़ाकू विमान की लैंडिंग कराने का इतिहास रचने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे को ऐसे ही नहीं चुना। यह तमाम मायनों में खास है। बेजोड़ मजबूती के साथ-साथ कई जगह यह लंबी दूरी तक समतल और अवरोधविहीन है। मोबाइल टावर और बिजली के खंभे भी दूर तक नहीं नजर आते। छह लेन वाले इस एक्सप्रेसवे की चौड़ाई भी इतनी है कि लड़ाकू विमान इस पर आसानी से दौड़ सकता है। किसी भी एयरपोर्ट के रनवे से कमतर नहीं है यमुना एक्सप्रेसवे।
यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहन चलाने का अलग अनुभव होता है। दूसरे हाईवे से काफी जुदा है यह। सुविधा के साथ-साथ इस पर सुरक्षा के भी पूरे बंदोबस्त हैं। लड़ाकू विमान की लैंडिंग के सफल परीक्षण ने यह साबित भी कर दिया कि एतिहासिक प्रयोग के लिए भारतीय वायुसेना का फैसला गलत नहीं था। दरअसल, यह पूरा एक्सप्रेसवे सीमेंट और कंकरीट से बना है। इसका आधार भी इतना मजबूत है कि यह एक ही स्थान पर 20 टन से ज्यादा का दबाव सह सकता है, जबकि लड़ाकू विमान का वजन इसके आधे से भी कम होता है। यह एक के बाद एक कई विमानों का दबाव सहने की स्थिति में है। इसके अलावा यह एक्सप्रेसवे दोनों तरफ से कटीले तार से घिरा हुआ है। इससे किसी जानवर या अन्य के अचानक सड़क पर आने की संभावना भी नहीं है। विमानों की लैंडिंग के लिए जो सबसे अहम होता है, वह रनवे का समतल और अवरोधविहीन होना। यमुना एक्सप्रेसवे इस मायने में भी खरा है। टोल प्लाजा वाले स्थानों को छोड़कर लंबी दूरी तक यह समतल है। इससे जमीन पर उतरने के बाद वह असंतुलित नहीं हो सकता।
विज्ञापन
इनसेट
खेरिया और हिंडन के लिए बेहतर विकल्प
रोड रनवे का प्रयोग इमरजेंसी लैंडिंग के लिए ही होता है। इस सफल परीक्षण के बाद खेरिया और हिंडन स्थित एयरपोर्ट के प्रबंधन को भविष्य में काफी सहूलियत मिल सकती है। यह दोनों एयरपोर्ट एयरफोर्स के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। यहां विमानों का ट्रैफिक ज्यादा रहता है। ऐसे में इमरजेंसी के वक्त रनवे के रूप में विमानों की लैंडिंग के लिए इन दोनों एयरपोर्ट के प्रबंधन के पास यह बेहतर विकल्प होगा।
विज्ञापन