सिपाही भर्ती परीक्षा फर्जीवाड़ाः अंगूठे का ‘क्लोन’ तैयार कर वेरिफिकेशन कराने पहुंचा अभ्यर्थी
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साल्वर गैंग ने अभ्यर्थियों से 2018 की सिपाही भर्ती परीक्षा के चारों चरण उत्तीर्ण कराने का ठेका लिया था। इसके लिए बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन करने वाली टीसीएस कंपनी के कर्मियों की मिलीभगत के साथ ही तकनीक की मदद ली गई। यह खुलासा आजमगढ़ निवासी विवेक यादव के अंगूठे के बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन के दौरान हुआ।
दरअसल, सिपाही भर्ती की लिखित परीक्षा में विवेक की जगह साल्वर गैंग का मुन्ना भाई शामिल हुआ था। उस दौरान मुन्ना भाई के अंगूठे का ही निशान लिया गया था। नौकरी विवेक को करनी थी, इस वजह से शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन और बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन के लिए वह खुद पहुंचा। जब उसने बायोमैट्रिक मशीन में अंगूठा लगाया तो पास ही मौजूद एक सिपाही को विवेक पर शंका हुई। सिपाही ने विवेक को पकड़ कर अधिकारियों को सूचना दी और उसके अंगूठे की जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि मुन्ना भाई के अंगूठे को स्कैन कराकर त्वचा के रंग की रबर की पतली सी झिल्ली तैयार की गई। इस बेहद बारीक झिल्ली को विवेक के अंगूठे पर इस तरह चिपकाया गया कि सामान्य आदमी पकड़ ही न पाए। पुलिस की पूछताछ में विवेक ने बताया कि अंगूठे का सत्यापन किनारे रखी मशीन में होता है। इस वजह से साल्वर गैंग ने उसे आश्वस्त किया था कि वह पकड़ा नहीं जाएगा।
दो से ढाई लाख में कराई गई डील
हिरासत में लिए गए अभ्यर्थी राकेश कुमार वर्मा और विवेक यादव ने पूछताछ में बताया कि साल्वर गैंग का सरगना कौन है, यह वह नहीं जानते। सिपाही भर्ती परीक्षा का फार्म भरने के बाद कुछ लोगों ने उन्हें कॉल कर संपर्क किया।
कहा कि दो से ढाई लाख रुपये में वह सिपाही भर्ती परीक्षा के चारों चरण उत्तीर्ण करा देंगे। पैसा नियुक्ति पत्र मिलने के बाद देना था और कुछ शैक्षणिक प्रमाण पत्र गारंटी के तौर पर लिए गए थे। साल्वर गैंग के सदस्य प्रयागराज, पटना और अन्य शहरों में रहते हैं, उनके एजेंट्स की बातचीत से ऐसा प्रतीत हुआ।
माना जा रहा है कि कई और ऐसे अभ्यर्थी हो सकते हैं जिन्होंने साल्वर गैंग की मदद से लिखित परीक्षा पास की हो। आशंका जताई गई है कि पीएसी सिपाही भर्ती के रि-मेडिकल टेस्ट फर्जीवाड़े की तरह इसमें भी पुलिस कर्मियों की भूमिका न हो। इस संबंध में सीओ कैंट मोहम्मद मुश्ताक ने बताया कि हमारी जांच जारी है। जिस किसी के खिलाफ साक्ष्य मिलेंगे, उसके खिलाफ कार्रवाई तय है।
आरोपियों की कॉल डिटेल से फंस सकते हैं कई और
हिरासत में लिए गए तीनों आरोपियों के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है। पता लगाया जा रहा है कि बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन से पहले उनकी किससे बात हुई थी। कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस साल्वर गैंग के सदस्यों और सरगना सहित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश करेगी। पुलिस की टीमें आरोपियों के घर जाएंगी और उनके परिजनों से भी इस संबंध में पूछताछ करेंगी।
पुलिस भर्ती बोर्ड को भेजी जाएगी रिपोर्ट
सिपाही परीक्षा प्रक्रिया में उजागर हुए फर्जीवाड़े की रिपोर्ट पुलिस भर्ती बोर्ड को भेजी जाएगी। इस फर्जीवाड़े के कारण लिखित परीक्षा सवालों के घेरे में आ गई है। बताया जा रहा है कि फर्जीवाड़ा उजागर होने पर लखनऊ के आला अफसरों ने कड़ी नाराजगी जताते हुए जिले के आला अफसरों से इस संबंध में पूछताछ की है। टीसीएस कंपनी के कर्मचारी की मिलीभगत सामने आने से अफसर भी हैरान हैं।
पीएसी सिपाही भर्ती के रि-मेडिकल टेस्ट में हुई थी धांधली
बीते 28, 29 और 30 अक्तूबर को पुलिस लाइन में पीएसी सिपाही भर्ती के अभ्यर्थियों का रि-मेडिकल टेस्ट होना था। तत्कालीन सीओ कैंट डॉ. अनिल कुमार ने सर्विलांस की मदद से भंडाफोड़ किया कि सिविल पुलिस व पीएसी के सिपाही, डॉक्टरों और दलालों की मिलीभगत से ढाई से तीन लाख रुपये लेकर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है।
इस सूचना के आधार पर दो डॉक्टरों सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। वहीं, प्रकरण में वांछित रामनगर पीएसी और गाजीपुर पुलिस लाइन के दो सिपाहियों की तलाश अभी भी जारी है। लगातार दो परीक्षाओं में हुई धांधली से बनारस में हो रही पुलिस और पीएसी की सिपाहियों की भर्ती को लेकर गलत संदेश जा रहा है।