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आगरा विश्वविद्यालय: एमए अंग्रेजी अंतिम वर्ष के प्रथम प्रश्नपत्र को देख विद्यार्थियों को लगा झटका, चार की जगह पूछे सात प्रश्न
Sat, 07 May 2022 08:33 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 07 May 2022 08:33 PM IST
सार
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की परीक्षा समिति के निर्णय के अनुसार चार प्रश्न ही पूछे जाने थे, लेकिन जब एमए अंग्रेजी अंतिम वर्ष के प्रथम प्रश्नपत्र को देखा तो विद्यार्थियों को जोर का झटका लगा। प्रश्नपत्र में चार की जगह सात प्रश्न देख वे हैरान रह गए।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने एमए अंग्रेजी विषय के अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं को मुसीबत में डाल दिया है। मुख्य परीक्षा के पहले ही प्रश्नपत्र में छात्र-छात्राओं को जोर का झटका लगा। विश्वविद्यालय की परीक्षा समिति की ओर से लिए गए निर्णय और परीक्षा कार्यक्रम के साथ जारी दिशा-निर्देश के अनुरूप महज चार प्रश्न पूछे जाने थे। अंग्रेजी के प्रथम प्रश्नपत्र में कुल सात प्रश्न पूछे गए। इनको हल करने के लिए पूर्व निर्धारित महज दो घंटे ही दिए गए। अधिकतर परीक्षार्थियों के प्रश्न छूट गए। वह सारे प्रश्नों के उत्तर नहीं दे पाए। परीक्षार्थियों ने पहले संबंधित कॉलेजों में इसके बाद विश्वविद्यालय में पहुंचकर विरोध प्रदर्शित किया।
प्रश्नपत्र में प्रश्नों को पूछे जाने के फार्मेट में भी बदलाव था। विश्वविद्यालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप चार विस्तृत उत्तरीय प्रश्न पूछे जाने थे। प्रश्नपत्र में ऐसा नहीं था। प्रश्नपत्र 100 अंक का रहा। सेक्शन-ए के 'ए' में दस बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए, किन्हीं पांच प्रश्न के उत्तर देने थे, प्रत्येक प्रश्न दो अंक के थे। 'बी' में पांच पैसेज पूछे गए, इनमें से किन्हीं तीन की संदर्भ के साथ व्याख्या पूछी गई। प्रत्येक प्रश्न 10 अंक के थे। सेक्शन-बी में 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे गए, इनमें से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर पूछे गए। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक के थे। सात प्रश्नों को दो घंटे में हल करना छात्र-छात्राओं को भारी पड़ा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दो घंटे का समय महज चार दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के लिए निर्धारित किए थे।
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प्रश्नपत्र में प्रश्नों को पूछे जाने के फार्मेट में भी बदलाव था। विश्वविद्यालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप चार विस्तृत उत्तरीय प्रश्न पूछे जाने थे। प्रश्नपत्र में ऐसा नहीं था। प्रश्नपत्र 100 अंक का रहा। सेक्शन-ए के 'ए' में दस बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए, किन्हीं पांच प्रश्न के उत्तर देने थे, प्रत्येक प्रश्न दो अंक के थे। 'बी' में पांच पैसेज पूछे गए, इनमें से किन्हीं तीन की संदर्भ के साथ व्याख्या पूछी गई। प्रत्येक प्रश्न 10 अंक के थे। सेक्शन-बी में 10 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे गए, इनमें से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर पूछे गए। प्रत्येक प्रश्न 20 अंक के थे। सात प्रश्नों को दो घंटे में हल करना छात्र-छात्राओं को भारी पड़ा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दो घंटे का समय महज चार दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के लिए निर्धारित किए थे।
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परीक्षा नियंत्रक को समस्या बताई
सेंट जोंस कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने पहले कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह को अपनी पीड़ा बताई, फिर विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क परिसर पहुंचे। परीक्षा नियंत्रक अजय कृष्ण यादव को ज्ञापन देकर अपनी समस्या बताई और प्रकरण में उचित निर्णय लेने की मांग की। छात्र-छात्राओं ने कहा कि जो उनको बताया गया था, प्रश्नपत्र उससे उलट आया। छात्र अयान खान ने कहा कि प्रश्नपत्र एक तरह से मानसिक उत्पीड़न के तौर पर रहा। छात्रा राधिका अग्रवाल ने कहा कि प्रकरण में उचित निर्णय नहीं लिया गया था, परीक्षार्थियों के नंबर बहुत कम आएंगे। गायत्री त्यागी, समीक्षा सिसौदिया, कीर्ति, तनुजा चाहर, शालिनी बघेल आदि शामिल रहे।
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