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इसी कार्यकाल में दौड़ेगी मेट्रो

Tue, 30 Jul 2013 07:28 PM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 30 Jul 2013 07:28 PM IST
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principal secretary housing sadakant talks about lucknow metro

सदाकांत

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प्रमुख सचिव, हाउसिंग
उत्तर प्रदेश सरकार


यह प्लानिंग हवा हवाई नहीं है। एक-एक बिंदु पर गहनता से विचार हो रहा है। पूरी तैयारी के साथ मेट्रो के पहले चरण का काम शुरू किया जाएगा ताकि जब एक बार काम शुरू हो, तो चलता रहे।

उम्मीद है कि अक्तूबर से पहले चरण का काम शुरू हो जाएगा और इस सरकार का कार्यकाल खत्म होने से पहले राजधानी में मेट्रो मेंदौड़ने लगेगी। इस बार राज्य सरकार के बजट मेट्रो के लिए भी जगह होगी।
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कई कमियां हैं डीपीआर में
अभी जो डीपीआर तैयार हुआ है उसमें कई कमियां हैं। उसमें कई ऐसे सुझाव हैं जो व्यवहारिक तौर पर सही नहीं हैं। मेट्रो के रूट के पास की जमीन की बिक्री के लिए प्रीमियम चार्ज लेने, पेट्रोल-डीजल पर सेस लगाने जैसी कई चीजें हैं जिनसे पब्लिक पर बोझ पड़ेगा।
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हम ऐसा कुछ नहीं चाहते। इसलिए इन सभी बिंदुओं पर प्रमुख सचिव वित्त से राय मांगी गई है। मेट्रो के अंडरग्राउंड ट्रैक को बनाने में एलीवेटेड ट्रैक की अपेक्षा ढाई गुना ज्यादा लागत आएगी और समय भी ज्यादा लगेगा।

हमारा प्रयास है कि जहां अंडरग्राउंड ट्रैक से बचा जा सकता हो वहां ये न बनाया जाए। यह भी देखना है कि मेट्रो के निर्माण के दौरान शहर का ट्रैफिक कम से कम प्रभावित हो।

नई आवास नीति जल्द
नई आवास नीति पब्लिक को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। नब्बे प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। उम्मीद है कि अगले महीने यह सबके सामने होगी। इसमें लोगों को घरों में छोटी-मोटी व्यवसायिक गतिविधियों की छूट होगी।

प्राधिकरणों के लिए भी कड़े नियम कायदे होंगे ताकि वे पब्लिक को परेशान न कर सकें। भ्रष्टाचार न हो। नई आवास नीति में किसानों से जबरन जमीनें नहीं ली जा सकेंगी। उन्हें विकास का भागीदार बनाया जाएगा।

प्राधिकरण जिस जमीन को किसान से लेकर विकसित करेंगे उन्हें उसमें 30 से 40 प्रतिशत का भागीदार बनाया जाएगा। ताकि विरोध की स्थिति न पैदा हो और किसानों को उनकी जमीन का सही हक मिल सके।


बिल्डरों के पिछलग्गू बन गए हैं प्राधिकरण
देखने में आ रहा है कि प्राधिकरण प्राइवेट बिल्डरों के हाथ की कठपुतली बन गए हैं। सालों से प्राधिकरणों की तरफ से स्कीमें नहीं आई हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण को ही ले लीजिए।

लंबे समय से उनकी कोई स्कीम ही नहीं आई है। अब प्राधिकरणों को प्राइवेट बिल्डरों के मुकाबले खड़ा होना पड़ेगा। नई स्कीमें लानी पड़ेंगी।

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