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मिलिए, रियल में टीवी के 'जासूस विजय' से
शंकर सिंह/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 15 Jul 2014 01:57 PM IST
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जासूस विजय ने टीवी में एक खास पहचान दिलाई, लेकिन सीरीयल करने के बाद थोड़ा डिस्टर्ब हो गया और चार साल सबसे अलग रहा। यह कहना है जासूस विजय से मशहूर हुए आदिल हुसैन का। आदिल सोमवार दोपहर सेक्टर 17 के एक होटल में माय ड्रीम एकेडमी की लॉन्चिंग के लिए पहुंचे और उन्होंने अमर उजाला से खास बातचीत की।
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आदिल ने कहा कि जासूस विजय से पहले वह थिएटर में एक्टिव थे और देश के कई कोनों में थिएटर किया। थिएटर में उन्हें एक अलग आनंद आता था और देशभर के कई इंस्टीट्यूट में एक्टिंग भी सिखाते थे। ऐसे ही कई बार वह विदेशों में भी एक्टिंग सिखाने जाते थे।
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एक दिन उन्हें कास्टिंग डायरेक्टर दिलीप शंकर ने देखा और कहां कि क्यों न वह जासूस विजय के लिए लीड करे। पहले उन्होंने मना कर दिया, लेकिन फिर इसके लिए मान गए।
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उन्होंने बताया कि उस दौरान उन्हें नहीं मालूम था कि एक सीरियल का मुख्य किरदार उन्हें कैसे मिल गया जबकि उस समय उनके चेहरे पर चेचक की वजह से चेहरे पर निशान भी पड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि आज भी स्टेज पर उतरना और उस पर अभिनय करना सबसे मुश्किल है। फिल्म में एक्टिंग करना थिएटर से काफी आसान है।
ग्रे शेड में ज्यादा नजर आते हैं
आदिल ने कहा कि उन्हें ज्यादातर ग्रे शेड के किरदार ही निभाने के दिए जाते हैं। इसमें लाइफ ऑफ पाई में पाई के पिता की भूमिका और इंग्लिश विंग्लिश में श्रीदेवी के पति की भूमिका शामिल है। उन्होंने कहा कि लाइफ ऑफ पाई भी उन्हें दिलीप की वजह से ही मिली थी।
लाइफ ऑफ पाई के लिए एक भारतीय एक्टर की जरूरत थी। उन्होंने फिल्म के लिए ऑडिशन दिया और सिलेक्ट भी हुए। उन्होंने कहा कि पाई के पिता के रोल में उन्होंने खुद के पिता के हाव भाव और उनकी सोच को उतारा था।
100 बार पढ़ते हैं फिल्म की स्क्रिप्ट
आदिल ने कहा कि वह किरदार में जमने के लिए एक फिल्म की स्क्रिप्ट को 100 बार पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि किरदार में ढलने का सबसे अच्छा माध्यम है स्क्रिप्ट की रूह को समझना और उसके साथ इंसाफ करना। कई जगहों पर वह अपने जिंदगी के निजी किरदारों को स्क्रीन पर उतारते हैं।
मिल्खा सिंह की तस्वीर दिमाग में है वह बिल्कुल भी फरहान की तरह नहीं लगे
आदिल ने कहा कि हाल ही में इरफान खान द्वारा दिए गए ब्यान कि भाग मिल्खा भाग असल से परे फिल्म है, इसका समर्थन करते है।
उन्होंने कहा कि मिल्खा सिंह की तस्वीर उनके दिमाग में है क्योंकि उनके (आदिल) भाई भी एक जमाने में धावक रहे हैं और उन्होंने उस दौरान मिल्खा को देखा था।
आदिल ने कहा कि भाग मिल्खा भाग में मिल्खा सिंह को जिस तरह से दिखाया है वह असलियत से परे है और कभी भी उनकी बॉडी एक बॉडी बिल्डर की तरह नहीं थी।