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यमुना में मच्छरदानी जाल लगाकर हो रहा शिकार

Sun, 06 Jan 2019 11:36 PM IST
प्रतीक दुबे अमर उजाला, इटावा
अमर उजाला, इटावा Published by: प्रतीक दुबे Updated Sun, 06 Jan 2019 11:36 PM IST
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Hunting in the Yamuna by planting mosquito nets
बल्लियां लगाकर मच्छरदानी जाल से कर रहे शिकार। - फोटो : amar ujala
गंगा नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी यमुना अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। अभी हाल ही में यमुना की शुद्धता के लिए तृतीय चरण का शुभारंभ दिल्ली के विज्ञान भवन में किया गया । लेकिन इटावा का जिला प्रशासन यमुना की शुद्धता को बनाए रखने के उद्देश्य में पलीता लगाता नजर आ रहा है । यहां डिभौली घाट व धूमनपुरा घाट समेत अन्य स्थलों पर जाल लगाकर मछलियाें का शिकार किया जा रहा है। इधर, लोगों का कहना है कि बिना जैव विविधता के कैसे यमुना का उद्धार होगा।
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 जैसा कि  सर्वविदित है कि यमुना में शिकार के ठेके नियमानुसार शर्तों के अधीन उठाए जाते हैं। लेकिन यही ठेकेदार निहित शर्तों की धज्जियां उड़ा कर निरंतर शिकार करते हैं। इसमें नदियों का पूरा पाट बल्लियां गाड़कर मच्छरदानी जाल लगाया है और पानी छानकर शिकार करते हैं। इससे छोटी मछलियों के साथ-साथ अन्य वन्यजीवों का जीवन संकट में आ जाता है। जबकि नियम यह है कि यमुना नदी को पूरा जाल का बाढ़ लगाकर रोका नहीं जा सकता था। चार सेंटीमीटर से कम के जाल का इस्तेमाल नहीं होगा। मच्छरदानी जाल का इस्तेमाल नहीं होगा और छोटी मछली नहीं पकड़ी जा सकती है। यमुना की जैव विविधता की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है और यह केवल एक जगह नहीं बल्कि सभी ठेका स्थलों पर इसी तरह का शिकार जारी है।
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नदी के जल में लगाई गई बाढ़ जगह-जगह वन्यजीवों के आवागमन में बाधा उत्पन्न करती है। वहीं, चंबल नदी से आए घड़ियाल,  मगरमच्छ, डॉल्फिन एवं कछुओं के प्राकृतिक प्रवास को छिन्न-भिन्न कर रही है। नदियों की जैव विविधता नदी के जल को स्वच्छ एवं प्रदूषण रहित बनाने में अपना बड़ा योगदान देती है। साथ ही उस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को जीवंत रखती है। यदि यह सब जल में नहीं होंगे तो हमारे लिए स्वच्छ जल की परिकल्पना करना ही बेईमानी होगी। सोसायटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के सचिव संजीव चौहान ने बताया कि नदियों में नियमानुसार मछलियों का शिकार होना चाहिए। जिससे कि छोटी मछलियों के साथ साथ वन्यजीव भी सुरक्षित बने रहे जो नदियों के प्रदूषण को दूर करने में सहायक होते हैं।
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डिभौली और धूमनपुरा घाट पर शिकारियों ने यमुना नदी को बाल्लियां में मच्छरदानी जाल को लगाकर पाट दिया है। इससे नदी में विचरण करने वाली छोटे-जलीय जीव की जान को खतरा हो गया है। यहां तक जाल में फंसने  वाले कछुओं की जान भी चली जा रही है।  

 
एडीएम जितेंद्र कुमार कुशवाह का कहना है कि यमुना नदी में मछलियों को मारने का ठेका दिया गया, इसमें सिर्फ बड़ी मछलियां होती हैं। अगर ऐसा होता है तो मछली ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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