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'बुलंद हौसले हों तो सब कुछ मुमकिन है'

Mon, 01 Dec 2014 01:29 PM IST
राकेश राणा/अमर उजाला, मंडी
राकेश राणा/अमर उजाला, मंडी Updated Mon, 01 Dec 2014 01:29 PM IST
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HAS officer Shilpi Bekta Mandi.

अगर मन में कुछ कर गुजरने की चाह हो तो मुश्किल से मुश्किल राह भी आसान हो जाती है। कुछ इसी बुलंद हौसले के साथ शिल्पी बेक्टा ने एचएएस परीक्षा पास की है। उनका मानना है बिना कोचिंग भी सफलता पाई जा सकती है। इसके लिए जरूरत है तो बस कड़ी मेहनत और बुलंद हौसले की।

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वह जनसेवा की ललक और जनता-प्रशासन के बीच की खाई को मिटाने के जज्बे से पीएचडी और बैंक पीओ की नौकरी छोड़कर एचएएस अधिकारी बनीं। शिल्पी मंडी में सहायक आयुक्त के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के वर्ष 2012 में एचएएस परीक्षा पास की। वह शिमला जिले के कोटखाई की रहने वाली हैं।
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उनके पिता एनसी बेक्टा आबकारी विभाग के अतिरिक्त आयुक्त के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। मां कांता बेक्टा बैंक मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। शिल्पी इससे पूर्व निचार में बतौर विकास खंड अधिकारी सेवाएं दे चुकी हैं। एचएएस बैच 2012 की शिल्पी बेक्टा की प्रारंभिक शिक्षा कुल्लू जिले के सरकारी स्कूल में हुई।
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10वीं धर्मशाला के निजी स्कूल और 11वीं-12वीं डीएवी चंडीगढ़ से की। इसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से पांच साल माइक्रो बायोलॉजी ऑनर्स के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी में पीएचडी में दाखिला लिया। उन्होंने पीएचडी छोड़कर एचएएस परीक्षा की तैयारी शुरू की।

केनरा बैंक में बतौर पीओ चयनित भी हुईं। करीब सात दिन तक बैंक में काम भी किया। इसी दौरान एचएएस परीक्षा उत्तीर्ण कर हिप्पा में छह माह की ट्रेनिंग के बाद शिल्पी ने निचार में बीडीओ के पद पर सेवाएं दीं।


युवाओं को टिप्स

एचएएस परीक्षा करने के लिए शिल्पी ने रोजाना औसतन 8 से 10 घंटे पढ़ाई की। शिल्पी बेक्टा स्वयं की मेहनत में ही विश्वास रखती हैं। उन्होंने युवाओं को एचएएस परीक्षा पास करने के लिए सकारात्मक सोच, सिस्टेमेटिक पढ़ाई, एनसीईआरटी किताबों से पढ़ाई करने की सलाह दी है।

जागरूक किया

निचार में बतौर खंड विकास अधिकारी शिल्पी बेक्टा ने ड्यूटी के अलावा समय निकालकर एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एक लेडी कांस्टेबल के साथ मिलकर महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में भी जागरूक किया। उन्होंने कई गांवों में कई किलोमीटर पैदल सफर कर महिलाओं को टिप्स दिए।

कांगड़ा की शोभा सेना में नर्सिंग लेफ्टिनेंट

कांगड़ा के मनेई गांव की बेटी ने सेना में नर्सिंग लेफ्टिनेंट बनकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। शोभा कौशल के लेफ्टिनेंट बनने से गांव के लोगों ने परिजनों को बधाई दी है। माता-पिता के सपनों को साकार कर शोभा भी उत्साहित हैं। हारचक्कियां तहसील के मनेई गांव की शोभा ने विज्ञान संकाय में जमा दो शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लंज में की।


शोभा के दादा चतर सिंह नाथ आर्मी से रिटायर हुए हैं। पिता महिंद्र सिंह भी सेना से सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। माता नीलम गृहिणी हैं। शोभा इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिजनों को देती हैं। चाचा जोगिंद्र सिंह कहते हैं कि शोभा बचपन से ही पढ़ाई में होशियार रही है। नर्सिंग लेफ्टिनेंट बनकर शोभा ने महाराष्ट्र में ज्वाइन भी कर लिया है।
 shobha kaushal

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