{"_id":"022a85187de606408ae9073446aca305","slug":"beautiful-garden-owner-interview-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"'फूल टूटते हैं तो चुभते हैं दिल में कांटे'","category":{"title":"City and States Archives","title_hn":"शहर और राज्य आर्काइव","slug":"city-and-states-archives"}}
'फूल टूटते हैं तो चुभते हैं दिल में कांटे'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 25 Aug 2014 04:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फूल बड़े नाजुक होते है, पर इनके टूटने का दर्द हर किसी को नहीं होता। इसके विपरीत कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, फूल टूटने का दर्द इतना अधिक महसूस होता है कि वह उसे ताउम्र नही भुला पाते। ऐसा ही अहसास हुआ अमरजीत कौर को। उन्हें फूलों से इतना लगाव कि गुलदस्ते में टूटे हुए फूल देखते ही उनकी आंखों में दर्द भर आता है।
विज्ञापन
कोई फूल तोड़ता है, तो उनके दिल में कांटे से चुभते हैं। फूलों से इसी लगाव ने उन्हें गुलदस्ते से दूर कर दिया। आलम यह है कि वह किसी को तोहफे में गुलदस्ता देती ही नहीं हैं। कारण, एक गुलदस्ते को सजाने में कई फूलों को तोड़ना पड़ता है।
विज्ञापन
सेक्टर-8 के मकान नंबर-1101 की रहने वाली अमरजीत कौर ने अपने सपनों के घर के बगीचे को बड़े दिल से तैयार किया है। इसमें महकने वाले फूल उनके बच्चों की तरह हैं, जिनकी देखभाल वह बड़ी ही आत्मीयता से करती हैं। बगीचे की पूरी लैंडस्केपिंग उन्होंने खुद की है।
विज्ञापन
वह रोज सुबह साढ़े पांच बजे उठती हैं और सैर से वापस आकर सीधे बगीचे में चली जाती हैं। वहां एक-एक पौधे की बड़े सलीके से देखभाल करती हैं। वह अपने मिलने वालों को भी यही सलाह देती हैं कि फूलों से हमेशा प्यार करें, उन्हें तोड़े नहीं। फूल जब खिलते हैं, तो देखने वाले का मन भी उसी तरह खिल उठता है। उन्हें शादी से पहले से ही प्रकृति से लगाव रहा है।
जर्मनी से लाईं पौधे
अमरजीत कौर ने बताया कि वे कहीं घूमने जाती हैं, तो वहां से पौधे जरूर लाती हैं। करीब पांच साल पहले वह जर्मनी गई थीं। वहां से भी कुछ पौधे लाई थीं, लेकिन पर्यावरण अलग होने के कारण वे पौधे यहां पनप नहीं सके। हाल ही में वह श्रीनगर से भी कॉरनेशन, मैरीगोल्ड, साल्विया, पटूनिया और डेहलिया आदि के पौधे लाई हैं, जिन्हें वह सर्दियों में लगाएंगी।
20 साल पुराने फर्न
उनकी देखभाल का ही नतीजा है कि वर्षों पुराने फर्न (एरिका पाम) उनके बगीचे की शोभा बढ़ा रहे हैं। इनमें से कई फर्न तो उन्होंने 20 साल पहले लगाए थे। आज भी इनकी खूबसूरती कायम है। पाम का एक पेड़ वह सेक्टर-8 के मार्केट में भी लगवा चुकी हैं।
ये पौधे लगे हैं बगीचे में
अमरजीत ने अपने बगीचे में फाइकस, हिबिस्कस, बोगनविला, मैरीगोल्ड, जेबरा, एल्जोरा, चांदनी, साइकोरिया, ब्लैडियम, मॉस्टेरा, पोटोलॉका आदि के पौधे लगाए हैं।
200 से ज्यादा गुलदाउदी
बगीचे में उन्होंने 200 से ज्यादा गुलदाउदी के पौधे लगाए हुए हैं। नवंबर तक इनमें फूल खिलने शुरू हो जाएंगे। अमरजीत कहती हैं कि उन्हें गुलदाउदी का फूल बेहद पसंद है।
किचन गार्ड भी है खास
उन्होंने बगीचे के साथ ही एक किचन गार्डन भी बनाया हुआ है। यहां उन्होंने भिंडी, करेला, बैंगन, पुदीना, मिर्च आदि सब्जियां उगाई हुई हैं। इसमें उन्होंने अंगूर की बेल भी लगा रखी है।
ऐसे लगाएं गुलदाउदी
गुलदाउदी के पौधे को बहुत अधिक देखभाल की जरूरत पड़ती है। गुलदाउदी लगाने का सबसे सही समय मानसून होता है। जून के आखिर में पौधे को मिट्टी में दबा दिया जाता है। एक महीने बाद इसकी जड़ें निकल आती हैं। इसके बाद पौधों को जड़ समेत मिट्टी से निकाल कर गमलों में लगा दें। गमलों को धूप में रखें और इसमें पानी न खड़ा रहने दें। नवंबर तक पौधों में फूल आने शुरू हो जाते हैं।