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'कोचिंग नहीं किताबों में है असल ज्ञान'
प्रवीण कुमार/अमर उजाला, हमीरपुर, अंब
Updated Sat, 22 Nov 2014 11:13 AM IST
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मुश्किल वक्त में हौसला और संयम इस अफसर से सीखें। प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर पहली ही नियुक्ति हुई और सामने चुनौती। बात कर रहे हैं हमीरपुर में तैनात एसी-टू-डीसी (एचएएस) डा. आशीष शर्मा की। बिलासपुर के रहने वाले डा. आशीष शर्मा ने प्रारंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल टीहरा सुजानपुर से की है।
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शर्मा ने वर्ष 2012 एचएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की और सितंबर 2012 में जिला किन्नौर में सहायक आयुक्त (विकास) के पद पर नियुक्त हुए। पदभार संभाले अभी कुछ ही समय हुआ था कि किन्नौर में प्राकृतिक आपदा आ गई। अफसर के तौर पर उनके लिए मुश्किल वक्त था लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
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मुसीबत की इस घड़ी में डा. आशीष शर्मा लोगों के साथ खड़े रहे। आपदा में बेघर हुए लोगों की मदद से लिए मौके पर पहुंचे और लोगों की सरकार की ओर से हरसंभव मदद करवाई। डा. आशीष शर्मा बताते हैं कि बच्चों को कोचिंग के बजाय किताबों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
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कोचिंग से पैसों की बर्बादी होती है, लेकिन असल ज्ञान किताबों से मिलता है। प्रतियोगी मैग्जीन पढ़ते रहना चाहिए। उन्होंने किताबों और मैग्जीन से मकाम हासिल किया है।
किन्नौर में इससे पहले एक से डेढ़ करोड़ रुपये मनरेगा से खर्च होते थे, लेकिन जब सहायक आयुक्त डॉ. आशीष शर्मा ने जिले का कार्यभार संभाला तो मनरेगा की यह राशि तीन करोड़ हो गई। लोगों को सौ दिन का रोजगार भी उपलब्ध करवाया।
छह साल तक रहे पशु चिकित्सक
सहायक आयुक्त डा. आशीष शर्मा ने पालमपुर स्थित चौधरी सरवण कुमार विवि से वेटरनरी साइंस में शिक्षा हासिल कर पशु चिकित्सक बने। इसके बाद वर्ष 2006 से लेकर वर्ष 2012 तक बतौर पशु चिकित्सक सेवाएं दी।
ऐसे की तैयारी
डा. आशीष शर्मा का कहना है कि उन्होंने पशु चिकित्सक से लेकर एचएएस अधिकारी बनने तक कड़ी मेहनत की है। उन्होंने बताया कि वे रोजाना चार से पांच घंटे पढ़ाई किया करते थे।
राष्ट्रपति ने नवाजी ऊना की अनु
अंब कॉलेज की छात्रा रही अनुबाला को एनएसएस में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार 2013-14 से नवाजा गया। यह पुरस्कार राष्ट्रपति प्रवण मुखर्जी ने अनु को दिया। प्रशस्ति-पत्र, मेडल और नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। रपोह मिसरां की अनुबाला पुत्री तरसेम लाल इस पुरस्कार को पाने वाली प्रदेश की पहली एनएसएस वालंटियर हैं।
इस मौके पर अनुबाला की माता दया रानी और भाई विजय मनकोटिया उसके साथ थे। अनुबाला के वापस घर लौटने पर शुक्रवार को स्थानीय लोगों ने ठठल में उसका स्वागत किया। अनुबाला ने कहा कि राष्ट्रपति के हाथों सम्मान पाने वाला पल उम्र भर याद रहेगा।