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विहिप का दावा- बंगाल हिंसा में 40 हजार से ज्यादा परिवार हुए प्रभावित, 10 हजार लोगों ने छोड़े अपने घर
Sat, 15 May 2021 04:36 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 15 May 2021 04:36 PM IST
सार
विहिप के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा, पश्चिम बंगाल के सुंदरबन, दक्षिण चौबीस परगना, बशीरहाट, हुगली, कूच बिहार जैसे जगह पर महिलाओं पर क्रूर अत्याचार हो रहे हैं। सुंदरबन जिले के 200 घरों को बुलडोजर लगाकर तोड़ा गया है...
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विहिप के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे (भगवा पटके में)
- फोटो : अमर उजाला (फाइल)
विस्तार
विश्व हिंदू परिषद् ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा में एक खास वर्ग के 40 हजार से अधिक प्रभावित होने का दावा किया है। विहिप का कहना है कि दो मई से पश्चिम बंगाल में शुरू हुई क्रूर राजनैतिक हिंसा का शिकार राज्य का बहुसंख्यक समाज हो रहा है। अब तक 3500 से अधिक गांवों के 40 हजार से अधिक परिवार हिंसा से प्रभावित हुए हैं। इसमें बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति और जनजाति शामिल हैं।
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अमर उजाला से चर्चा करते हुए विहिप के केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने कहा, पश्चिम बंगाल के सुंदरबन, दक्षिण चौबीस परगना, बशीरहाट, हुगली, कूच बिहार जैसे जगह पर महिलाओं पर क्रूर अत्याचार हो रहे हैं। सुंदरबन जिले के 200 घरों को बुलडोजर लगाकर तोड़ा गया है। अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा घर, दुकान, खेत, धार्मिक स्थलों और दुकानों को ध्वस्त किया जा रहा है। मछली व्यवसाइयों के तालाबों में विष डाल कर परेशान कर रहे हैं। लोगों से जबरन पैसा वसूली हो रही है। राज्य के 350 से अधिक गांव अभी भी अत्यंत संवेदनशील हैं। 10 हजार से ज्यादा लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए अपने घर तक छोड़ दिए हैं।
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केंद्रीय महामंत्री परांडे ने आगे बताया कि बंगाल में हो रही घटनाओं पर शासन प्रशासन कुछ नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, विश्व हिंदू परिषद न्यायपालिका से आह्वान करती है कि लोकहित में इन घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेकर पीड़ितों की रक्षा के लिए शासन और प्रशासन को उनके कर्तव्यों का पालन करने के लिए कठोरता से आदेश दे। साथ ही पीड़ित परिवारों के भोजन, पानी व उनके रहने की व्यवस्था करने के लिए आगे आए। विहिप और समाजसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता गरीब लोगों की रहने की व्यवस्था के साथ साथ कपड़े और मेडिकल व्यवस्था भी कर रहे हैं।
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परांडे ने कहा, बंगाल में लगातार हिंसा हो रही है लेकिन इसके बावजदू पुलिस कोई केस दर्ज नहीं कर रही है। हमारी मांग है कि दंगाइयों पर शीघ्र अंकुश लगा कर उन्हें कठोरतम सजा दिलाई जाए। साथ ही हिंसा व आक्रमण के शिकार समाज की रक्षा की पुख्ता व्यवस्था, उनके जान-माल के नुकसान की भरपाई तथा पुनर्वास की व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा शीघ्रता से होनी चाहिए। आज कुछ लोगों ने उनके वोटर कार्ड, आधार कार्ड और राशन कार्ड सहित कई अहम दस्तावेजों को भी जबरन छीन लिया गया है। वे उन्हें पुनः दिलवाए जाने चाहिए और हिंसा के शिकार लोगों पर लगे झूठे मुकदमे निरस्त किए जाने चाहिए।