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सीबीआई करेगी मुजफ्फरपुर बालिका गृह की जांच, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार की मांग ठुकराई

Wed, 28 Nov 2018 01:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 28 Nov 2018 01:07 PM IST
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Supreme Court directs CBI to investigate shelter homes in Bihar

उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को बिहार में 16 आश्रय गृहों में रहने वाले बच्चों के शारीरिक और यौन शोषण के आरोपों की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ इन मामलों की जांच सीबीआई को नहीं सौंपने का राज्य सरकार का अनुरोध ठुकरा दिया। इन मामलों की बिहार पुलिस जांच कर रही थी।

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शीर्ष अदालत ने कहा कि टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) की रिपोर्ट में राज्य के 17 आश्रय गृहों के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की गयी थी। इसलिए केन्द्रीय जांच ब्यूरो को इनकी जांच करनी ही चाहिए। इस बीच, सीबीआई ने पीठ को सूचित किया कि सिद्धांत रूप में वह जांच का काम अपने हाथ में लेने के लिये तैयार है।
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जांच ब्यूरो पहले ही मुजफ्फरपुर आश्रय गृह में महिलाओं और लड़कियों के कथित बलात्कार और यौन शोषण के आरोपों की जांच कर रहा है। जांच ब्यूरो ने न्यायालय को बताया कि इस मामले में सात दिसंबर तक आरोप पत्र दाखिल किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि बिहार में आश्रय गृहों की जांच कर रहे जांच ब्यूरो के किसी भी अधिकारी का उसकी पूर्व अनुमति के बगैर तबादला नहीं किया जाये। 
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बता दें कि मंगलवार को मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश सरकार को फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सरकार नाकामी को लेकर फटकार लगाते हुए अफआईआर कॉपी सही करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कॉपी को सही करने लिए बिहार सरकार को 24 घंटे का समय दिया। इस केस की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में बिहार के मुख्य सचिव पहुंचे थे।

कोर्ट ने कहा कि आपने एफआईआर में हल्की धाराएं जोड़ी हैं। आईपीसी की धारा-377 के तहत भी मुकदमा होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि "अगर हमें पता लगता है कि आईपीसी की धारा 377 और पॉस्को एक्ट के तहत जुर्म हुए हैं और आपने उन्हें एफआईआर में दर्ज नहीं किया है तो हम सरकार के खिलाफ आदेश जारी करेंगे।"

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को टार्गेट करते हुए कहा कि आप क्या कर रहे हैं? यह शर्मनाक है। अगर बच्ची के साथ लागातार दष्कर्म हुआ है आप कहते हैं कुछ भी नहीं हुआ? भला आप ये कैसे कर सकते हैं? यह अमानवीय है। हमें बताया गया कि मामला बड़ी गंभीरता से देखा जाएगा, यह है आप की गंभीरता? हर बार जब मैं इस फाइल को पढ़ता हूं तो महसूस करता हूं कि ये दुखद है। "


कोर्ट ने आगे कहा कि 110 में से 17 शेल्टर होम में दष्कर्म की घटनाएं हुईं। क्या सरकार की नजर में वो देश के बच्चे नहीं हैं? सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई कल बुधवार दोपहर दो बजे तक के लिए टाल दी है। इसके साथ ही मुख्य सचिव को भी आदेश दिए हैं कि वे सुनवाई के दौरान कोर्ट में ही मौजूद रहें। कोर्ट ने कहा आपका रवैया ऐसा है कि अगर किसी बच्चे के साथ दुराचार होता है तो आप जुवेनाइल बोर्ड के खिलाफ ही कार्रवाई कर देंगे?

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