फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   City & states ›   Pets demand increased during Corona period, long waiting list for buying breed dogs

कोरोना काल में बढ़ी पेट्स की मांग, ब्रीड वाले कुत्ते खरीदने के लिए है लंबी वेटिंग लिस्ट

Sat, 31 Oct 2020 07:28 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 31 Oct 2020 07:28 PM IST
सार

  • रंग-बिरंगी चिड़िया और तोता पालने वालों की संख्या बढ़ी
  • पहले की तुलना में दो-तीन गुना मंहगे दाम पर मिल रहे हैं पालतू जानवर

विज्ञापन
Pets demand increased during Corona period, long waiting list for buying breed dogs
पेट्स - फोटो : Amar Ujala (File)

विस्तार

दो महीने के 'लिओ' बेंगलुरु से हवाई जहाज के जरिए ग्रेटर नोएडा में आए। आने के दो दिन के भीतर ही घर का पूरा माहौल बदल गया। राघव से लेकर राधिका तक सभी को लिओ को रिझाने लगे। पता चला कि कोविड-19 संक्रमण और लॉकडाउन के बाद उच्च वर्ग के परिवारों का घर से बाहर निकलना भी बंद हो गया। नजीतन बच्चों से लेकर परिवार के सदस्य तक ऊबने लगे। ऐसे में एक तरफ लॉकडाउन खुलना शुरू हुआ और दूसरी तरफ तक घरों में पालतू जानवरों की मांग काफी बढ़ चुकी थी।

विज्ञापन

बेंगलुरु से मंगाया लैब्राडोर

डाक्टर सरन के परिवार को जब दिल्ली-एनसीआर में कोई अच्छी ब्रीड का गोल्डन रिट्रीवर या लैब्राडोर नहीं मिला तो उन्हें बेंगलुरु से मंगाना पड़ा। पटपड़गंज में एसके शर्मा का शिफी भी अप्रैल महीने में आयु पूरी करके चल बसा। मई तक आते-आते पूरे परिवार को दिन काटना मुश्किल हो गया। बताते हैं चंडीगढ़ से उन्होंने भी पोमेरेनियन ब्रीड का पपी मंगाया। डा. सरन के घर में पहले टॉयसन (जर्मन शेफर्ड) रहता था। होली के आस-पास टायसन ने भी अपनी आयु पूरी कर ली थी, लिहाजा इस बार उन्होंने डॉबरमैन, हस्की या जर्मन शेफर्ड जैसे कुत्ते के बच्चे को पालने की बजाय लैब्राडोर को घर में रखने का निर्णय किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

बहुत बढ़ गए भाव, बड़ी मुश्किल से मिला

डा. सरन बताते हैं कि लिओ को लेने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ा। कोविड-19 संक्रमण के कारण दिल्ली, एनसीआर और आस-पास ढंग के पालतू जानवर उपलब्ध ही नहीं थे। जिनके पास जो भी जानवर थे, पहले की तुलना में दो-तीन गुना मंहगे दाम पर मिल रहे थे। पूछने पर कारण पता लगा कि कोविड-19 और लॉकडाउन के बाद लोगों ने पेट्स को पालने में काफी दिलचस्पी दिखाई। बच्चों और परिवार के सदस्यों के लिए लोगों का सबसे ज्यादा जोर अच्छी ब्रांड के कुत्तों पर ही रहा। लिहाजा दिल्ली, एनसीआर और आस-पास के क्षेत्र में अच्छी ब्रीड के पपी ही नहीं थे। बताते हैं कि वह तो भाग्यशाली थे। कोलकाता के सदस्य ने लिओ की बुकिंग कराई थी और अचानक रद्द कर दी। इसी समय पेट्स विक्रेता की कॉल आ गई और उन्होंने बुक कराने में जरा भी देर नहीं लगाई।

विज्ञापन

जितने थे सब बिक गए

दिल्ली के गीता कालोनी में रहने वाले रमेश कुमार पिछले दस साल से पेट्स की बिक्री का धंधा करते हैं। रमेश कुमार बताते हैं कि जनवरी 2020 में उनके पास दो महीने से लेकर छह महीने तक के करीब 22 पपी थे। इनमें से 14 नर और 8 मादा थीं। हालांकि इनमें से उनके पास एक भी जर्मन शेफर्ड नहीं था। रमेश बताते हैं सभी बिक गए। महरौली में कुतुबमीनार के पास आसिफ का भी यही पेशा है। आसिफ का भी कहना है कि पपी की आयु, ब्रीड, गुणवत्ता के आधार पर उसकी कीमत निर्धारित की जाती है। उनके पास एडवांस बुकिंग है। उन्हें भरोसा है कि दीपावली तक इसकी आपूर्ति कर देंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed