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बिहार में दांव पर नीतीश-मोदी की साख, केंद्रीय मंत्रियों की अग्नि परीक्षा, हो सकता है बड़ा उलटफेर

Sat, 18 May 2019 10:02 AM IST
Nilesh Kumar निलेश कुमार, अमर उजाला, पटना
निलेश कुमार, अमर उजाला, पटना Published by: Nilesh Kumar Updated Sat, 18 May 2019 10:02 AM IST
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lok sabha chunav 2019: 7th Phase in Bihar, Ravi shankar, Shatrughan, ashwini choubey Nitish, Modi
NDA Bihar

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में 19 मई को बिहार के नालंदा, पटना साहिब, पाटलिपुत्र, आरा, बक्सर, सासाराम, काराकाट और जहानाबाद में मतदान होना है। इस आखिरी चरण में सवाल पीएम मोदी और सीएम नीतीश की साख का भी है। इन सीटों पर मोदी सरकार के चार केंद्रीय मंत्रियों की किस्मत दांव पर है। पटना साहिब से रविशंकर प्रसाद, पाटलिपुत्र से रामकृपाल यादव, आरा से आरके सिंह और बक्सर से अश्विनी चौबे की किस्मत रविवार को ईवीएम में कैद होगी। वहीं, केंद्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री रहे उपेंद्र कुशवाहा महागठबंधन में हैं और काराकाट से ताल ठोंक रहे हैं। 

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नीतीश के गढ़ नालंदा में चुनौती

नीतीश कुमार के गढ़ नालंदा में उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है। यहां साल 1996 से उनका कब्जा है। प्रत्याशी कोई भी हो, इस कुर्मी बाहुल्य क्षेत्र में नीतीश के चेहरे पर वोटिंग होती है। अपने गृह जिला में पिछले लोकसभा चुनाव वह अपने प्रत्याशी कौशलेंद्र कुमार को मोदी लहर के बावजूद भाजपा के खिलाफ जिताने में सफल रहे थे, लेकिन जीत का इंतर महज 10 हजार वोट रहा था। 
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इस बार नीतीश एक बार फिर से नरेंद्र मोदी के साथ हैं। इस बार महागठबंधन ने विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के उम्मीदवार अशोक कुमार आजाद चंद्रवंशी मैदान में हैं। अति पिछड़ा वर्ग से आने वाले अशोक चंद्रवंशी को यदि यादव, मुसलमान और अति पिछड़ा वर्ग का वोट मिल जाए तो नालंदा में इस बार उलटफेर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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शत्रुघ्न सिन्हा-रविशंकर प्रसाद - फोटो : Amar Ujala

पटना साहिब में बागी बिहारी बाबू बिगाड़ सकते हैं खेल

कायस्थ बाहुल्य पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र में दो स्वजातीय में टक्कर है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर की टक्कर उनकी ही पार्टी से बागी हुए बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा से है। सिन्हा भाजपा उम्मीदवार के रूप में लड़ते और जीतते रहे हैं। लेकिन इस बार वे कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। इस बार के परिणाम क्या होंगे, इसके आकलन से पहले पिछली बार हुए चुनाव परिणाम को देखना जरूरी होगा। जातिगत समीकरण देखा जाए तो यहां कायस्थ अच्छी खासी संख्या में वोटर हैं। यदि कायस्थ वोटरों में सेंधमारी करने में सिन्हा कामयाब रहें और राजद का माई(मुस्लिम-यादव) समीकरण साथ रहा तो रविशंकर की राह काफी मुश्किल होगी। 

आरा में आरके की जंग 'युवा' यादव से

आरा संसदीय क्षेत्र में केंद्र सरकार में गृह सचिव रहे आरके सिंह भी दूसरी बार ताल ठोंक रहे हैं जहां उनका मुकाबला भाकपा माले के नौजवान उम्मीदवार राजू यादव से होना है। इस संसदीय क्षेत्र पर सबकी निगाहें इसलिए भी टिकी हैं क्योंकि राजू यादव को राजद और कांग्रेस ने भी अपना समर्थन दिया है। हालांकि राजद बदले में पाटलिपुत्र से मीसा भारती को लेफ्ट के समर्थन की उम्मीद कर रही है।

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Patliputra Seat, Election in Bihar - फोटो : अमर उजाला

पाटलिपुत्र में चाचा रामकृपाल से भिडेंगीं लालू की बेटी

यहां मोदी लहर के बीच लालू प्रसाद की बड़ी बेटी मीसा भारती को हराना राजद से भाजपा में गए रामकृपाल यादव के लिए मुश्किल हो गया था। इस बार मीसा के प्रचार के लिए लालू प्रसाद यादव की अनुपस्थिति में भाई तेजस्वी ने मोर्चा संभाला था। दोनों उम्मीदवार यादव हैं, लेकिन लालू के नाम पर तेजस्वी यादवों की सहानुभूति मीसा के पक्ष में करने में कामयाब रहे तो केंद्रीय मंत्री रामकृपाल के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती है। मीसा को वामदल के वोटरों का भी समर्थन मिलने की संभावना है। 

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ashwini choubey

बक्सर में भागलपुरी चौबे जी के सामने राजद के कद्दावर

बक्सर बिहार का ऐसा एकमात्र लोकसभा क्षेत्र रहा है, जहां शुरुआत से सवर्णों को जीत मिलती रही है। बीच में लालू के दौर में 1989 से लेकर 1996 तक बक्सर पर सीपीआई के तेजनारायण सिंह(यादव) काबिज रहे। इस बार मौजूदा सांसद और केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे की टक्कर राजद के उन्हीं कद्दावर नेता जगदानंद सिंह से है, जिन्हें पिछली बार मोदी लहर में उन्होंने हरा दिया था। चौबे की दोबारा उम्मीदवारी पर इस बार स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं का भी विरोध रहा था, वहीं जगदानंद ने भी भागलपुरी अश्विनी चौबे को 'बाहरी' कह के भी निशाने पर लिया है। ऐसे में चौबे को मिल ही चुनौतियों पर नजर डालें तो इस बार उलटफेर होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। 

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