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Teacher's Day : टीचर ने अपनाई नई तरकीब, आने लगे सरकारी स्कूल में बच्चे
amarujal.com, Presented By: आसिफ़ इक़बाल
Updated Mon, 04 Sep 2017 06:11 PM IST
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परसेढ़ा का विद्यालय
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27 अगस्त को अपने मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षक दिवस पर संकल्प की बात की थी। उन्होंने कहा था कि सभी शिक्षक बदलाव का संकल्प लें। पीएम मोदी की बात का असर यूपी के एक प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों पर बखूबी देखने को मिल रहा है।
यूपी के फतेहपुर ज़िले के अमौली ब्लॉक के परसेढ़ा गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में करीब 115 बच्चे हैं। दूसरे प्राथमिक विद्यालयों की अपेक्षा यहां के शिक्षक बच्चों को आधुनिक शैली में पढ़ा रहे हैं। इन बच्चों के गले में टंगे आई कार्ड किसी निजी विद्यालय के बच्चों के होने का अहसास कराते हैं। यह आई कार्ड उपलब्ध कराये हैं यहां के सहायक शिक्षक हरेंद्र शंकर ने।
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यूपी के फतेहपुर ज़िले के अमौली ब्लॉक के परसेढ़ा गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में करीब 115 बच्चे हैं। दूसरे प्राथमिक विद्यालयों की अपेक्षा यहां के शिक्षक बच्चों को आधुनिक शैली में पढ़ा रहे हैं। इन बच्चों के गले में टंगे आई कार्ड किसी निजी विद्यालय के बच्चों के होने का अहसास कराते हैं। यह आई कार्ड उपलब्ध कराये हैं यहां के सहायक शिक्षक हरेंद्र शंकर ने।
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शिक्षक दिवस पर नजीर है ये सरकारी स्कूल, शिक्षकों ने तन मन के साथ लगाया धन
हरेंद्र बताते हैं कि एक दिन विद्यालय का एक छात्र शहर के स्कूली बच्चों को देखकर आया और उसने आईकार्ड के बारे में सवाल किया कि क्या यह हमारे गले में नहीं हो सकता।
चूंकि इस स्तर के सरकारी विद्यालयों में आईकार्ड का कोई नियम नहीं है इस पर हरेंद्र खामोश रहे। लेकिन उन्होंने अगले दिन शहर से जाकर सभी बच्चों के आईकार्ड बनवाए और उन्हें बांट दिए, वो भी अपने पैसों से। आईकार्ड पाकर बच्चों के चेहरे खिल गए।
इतना ही नहीं, इस स्कूल में माइक और लाउडस्पीकर के जरिए बच्चों को पढ़ाने का काम भी हरेंद्र ने किया है। इसके साथ ही कक्षा में व्हाइट बोर्ड भी लगाय गया है। इस तरह की एक्टिविटी होने से बच्चों का पढ़ाई में रुझान भी बढ़ने लगा और वो नियमित तौर पर स्कूल आने लगे।
हरेंद्र बताते हैं कि हमें हर क्षेत्र में सरकार का सहयोग करना चाहिए, जिससे हर बच्चे को आधुनिक तौर से शिक्षित किया जा सके।
चूंकि इस स्तर के सरकारी विद्यालयों में आईकार्ड का कोई नियम नहीं है इस पर हरेंद्र खामोश रहे। लेकिन उन्होंने अगले दिन शहर से जाकर सभी बच्चों के आईकार्ड बनवाए और उन्हें बांट दिए, वो भी अपने पैसों से। आईकार्ड पाकर बच्चों के चेहरे खिल गए।
इतना ही नहीं, इस स्कूल में माइक और लाउडस्पीकर के जरिए बच्चों को पढ़ाने का काम भी हरेंद्र ने किया है। इसके साथ ही कक्षा में व्हाइट बोर्ड भी लगाय गया है। इस तरह की एक्टिविटी होने से बच्चों का पढ़ाई में रुझान भी बढ़ने लगा और वो नियमित तौर पर स्कूल आने लगे।
हरेंद्र बताते हैं कि हमें हर क्षेत्र में सरकार का सहयोग करना चाहिए, जिससे हर बच्चे को आधुनिक तौर से शिक्षित किया जा सके।