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Hindi News ›   Crime ›   Youth arrested for sexual harassment of blind woman has been jailed for two years

नेत्रहीन महिला का यौन उत्पीड़न करने के दोषी युवक को दो वर्ष की जेल 

Fri, 11 Aug 2017 09:36 PM IST
एजेंसी/भाषा
एजेंसी/भाषा Updated Fri, 11 Aug 2017 09:36 PM IST
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Youth arrested for sexual harassment of blind woman has been jailed for two years
delhi court (demo pic)

दिल्ली की एक अदालत ने एक नेत्रहीन महिला का यौन उत्पीड़न करने के दोषी एक व्यक्ति को दो वर्ष जेल की सजा सुनाते हुए कहा कि उसने 'नीच कृत्य' किया है और महिला की 'गरिमा' को ठेस पहुंचाई हैं। अदालत ने दक्षिण दिल्ली के कालकाजी मंदिर में फूल बेचने वाले 63 वर्षीय रामफल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया और इस रकम को पीड़ित महिला को मुआवजे के रूप में भी देने के निर्देश दिये।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संजीव जैन ने कल कहा ‘‘ दोषी ने एक नेत्रहीन महिला का शील भंग करके नीच कृत्य किया है।’’ उन्होंने कहा ‘‘ हालांकि यह सच है कि दोषी की उम्र 63 साल है और परिवार को उसकी जरूरत है लेकिन हमें उस पीड़ित महिला के दर्द को भी समझना होगा जिसका शील भंग किया गया और इसे वैश्विक रूप से समाज में नैतिक और शारीरिक रूप से निंदनीय अपराधों में समझा जाता हैं।’’
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न्यायाधीश ने कहा ‘‘ महिला की गरिमा को ठेस लगी है। यह पीड़िता के ‘‘ शरीर, दिमाग,निजता और पूरी संरचना पर हमला है।’’ अदालत ने दोषी की इस दलील को खारिज कर दिया कि महिला ने उस पर झूठे आरोप लगाये हैं। अदालत ने कहा कि भारतीय समाज में यौन उत्पीड़न एक धब्बा है और एक महिला किसी को ब्लैकमेल करने के लिए ‘‘ कभी भी झूठे आरोप नहीं लगायेगी।’’
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यौन हमला पीड़िता में "अपमान, घृणा, जबरदस्त शर्मिंदगी , शर्म की भावना, आघात और एक आजीवन भावनात्मक पीड़ा "का कारण बनता है इसलिए कोई पीडित महिला यौन उत्पीड़न के लिए किसी का गलत तरह से नाम नहीं लेगी।’’ अदालत ने दिल्ली कानूनी सेवा प्राधिकरण (दक्षिण दिल्ली) द्वारा पीडिता को पर्याप्त मुआवजा दिये जाने के भी निर्देश दिये।


अभियोजन पक्ष के अनुसार यह घटना वर्ष 2014 में हुई थी। धर्मशाला में अपनी बेटी के साथ रहने वाली पीडित महिला का रामफल ने यौन उत्पीड़न किया था।पुलिस ने आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा के तहत बलात्कार और यौन उत्पीड़न के लिए आरोप पत्र दायर किया था। अदालत ने हालांकि बलात्कार के आरोप से उसे बरी कर दिया था क्योंकि सबूतों के अभाव में यह आरोप साबित नहीं हो सका।

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