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बलात्कार पीड़िता को 10 लाख मुआवजा दे बिहार सरकार: सुप्रीम कोर्ट
amarujala.com, Presented By: विकास जांगड़ा
Updated Fri, 18 Aug 2017 05:04 PM IST
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supreme court
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सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को उस बलात्कार पीड़िता गरीब महिला को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है, जिसे मेडिकल बोर्ड की राय के बाद 26 माह के गर्भ को गिराने की अनुमति नहीं दी गई।
35 वर्षीय एचआईवी पॉजिटिव गरीब महिला के मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ ने कहा कि उसने कुछ निर्देश जारी किए हैं। पटना उच्च न्यायालय के उस आदेश को दरकिनार किया है, जिसके तहत महिला को गर्भ गिराने की अनुमति इसलिए नहीं दी गई थी, क्योंकि वह 20 सप्ताह के गर्भ की कानूनी सीमा को पार कर चुकी थी।
पीड़िता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को पहले कहा था कि महिला को बिहार सरकार से मुआवजा मिलना चाहिए, क्योंकि जब उसके गर्भ का 17वां सप्ताह चल रहा था, तब वह गर्भ गिराने के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल गई थी। लेकिन पहचान पत्र नहीं होने की वजह से अस्पताल ने इनकार कर दिया था।
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गौरतलब है कि इस महिला के साथ पटना की सड़कों पर कथित तौर पर बलात्कार किया गया था और अब वह 26 सप्ताह की गर्भवती है। सुप्रीम कोर्ट ने एम्स के मेडिकल बोर्ड को महिला की जांच करने को कहा था, जिसकी रिपोर्ट में बोर्ड ने कहा कि महिला अपनी गर्भावस्था के काफी आगे चरण में है और अब उसका गर्भपात नहीं कराया जा सकता।
इसी के मद्देनजर अदालत ने बिहार सरकार को पीड़ित महिला को मुआवजा देने का आदेश जारी किया है।
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35 वर्षीय एचआईवी पॉजिटिव गरीब महिला के मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ ने कहा कि उसने कुछ निर्देश जारी किए हैं। पटना उच्च न्यायालय के उस आदेश को दरकिनार किया है, जिसके तहत महिला को गर्भ गिराने की अनुमति इसलिए नहीं दी गई थी, क्योंकि वह 20 सप्ताह के गर्भ की कानूनी सीमा को पार कर चुकी थी।
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पीड़िता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को पहले कहा था कि महिला को बिहार सरकार से मुआवजा मिलना चाहिए, क्योंकि जब उसके गर्भ का 17वां सप्ताह चल रहा था, तब वह गर्भ गिराने के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल गई थी। लेकिन पहचान पत्र नहीं होने की वजह से अस्पताल ने इनकार कर दिया था।
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गौरतलब है कि इस महिला के साथ पटना की सड़कों पर कथित तौर पर बलात्कार किया गया था और अब वह 26 सप्ताह की गर्भवती है। सुप्रीम कोर्ट ने एम्स के मेडिकल बोर्ड को महिला की जांच करने को कहा था, जिसकी रिपोर्ट में बोर्ड ने कहा कि महिला अपनी गर्भावस्था के काफी आगे चरण में है और अब उसका गर्भपात नहीं कराया जा सकता।
इसी के मद्देनजर अदालत ने बिहार सरकार को पीड़ित महिला को मुआवजा देने का आदेश जारी किया है।