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CM योगी के जिले में मानवता शर्मसार, कंधे पर ढोया पिता का शव
amarujala.com- Presented by: विकास जांगड़ा
Updated Thu, 03 Aug 2017 05:17 PM IST
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सीएम योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला
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गोरखपुर। ओडिशा के कालाहांडी की तरह सीएम योगी आदित्यनाथ के जिले के भटहट सीएचसी की ये तस्वीरें भी परेशान और शर्मसार करने वाली हैं।
अस्पताल से पत्नी का शव कंधे पर ले जाने के लिए मजबूर दाना मांझी की ही तरह ही भटहट के अच्छेलाल को भी कुछ इन्हीं हालातों का सामना करना पड़ा। सीएचसी पर पिता की मौत के बाद शव ले जाने के लिए जब अच्छेलाल को एंबुलेंस नहीं मिली तो वह अपने पिता की लाश को किसी के सहारे गोद में ही लेकर सड़क तक आने को मजबूर हो गया। एक ऑटो वाले से आरजू मिन्नत के बाद वह किसी तरह पिता का शव घर ले जा सका।
अस्पताल परिसर में मृत परिवार की इस बेबसी को देखकर लोगों ने दांतों तले उंगली दबा ली। लेकिन बेशर्म अफसरों को तब भी कोई फर्क नहीं पड़ा। अस्पताल के स्टाफ तो मूकदर्शक बने सब देखते रहे। किसी ने अच्छेलाल को पिता का शव ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक मुहैया नहीं कराया। रो-रोकर अचेत हो जा रही हरिश्चंद्र की पत्नी शकुंतला ने बेटे के कंधे पर पति का शव देखा तो दिल पर पत्थर रखकर मदद के लिए आगे बढ़ गई। बेटा पिता का शव कंधे पर लिए ऑटो वाले से मिन्नतें कर रहा था तो शकुंतला उसे सहारा दे रही थीं। इससे पहले चिकित्सक की लापरवाही से मरीज की मौत होने का आरोप लगाते हुए इन्होंने अस्पताल प्रशासन के प्रति विरोध भी दर्ज कराया था। शायद यही बात जिम्मेदारों को इतनी नागवार गुजरी थी कि वो मानवता तक भूल गए।
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अस्पताल से पत्नी का शव कंधे पर ले जाने के लिए मजबूर दाना मांझी की ही तरह ही भटहट के अच्छेलाल को भी कुछ इन्हीं हालातों का सामना करना पड़ा। सीएचसी पर पिता की मौत के बाद शव ले जाने के लिए जब अच्छेलाल को एंबुलेंस नहीं मिली तो वह अपने पिता की लाश को किसी के सहारे गोद में ही लेकर सड़क तक आने को मजबूर हो गया। एक ऑटो वाले से आरजू मिन्नत के बाद वह किसी तरह पिता का शव घर ले जा सका।
अस्पताल परिसर में मृत परिवार की इस बेबसी को देखकर लोगों ने दांतों तले उंगली दबा ली। लेकिन बेशर्म अफसरों को तब भी कोई फर्क नहीं पड़ा। अस्पताल के स्टाफ तो मूकदर्शक बने सब देखते रहे। किसी ने अच्छेलाल को पिता का शव ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक मुहैया नहीं कराया। रो-रोकर अचेत हो जा रही हरिश्चंद्र की पत्नी शकुंतला ने बेटे के कंधे पर पति का शव देखा तो दिल पर पत्थर रखकर मदद के लिए आगे बढ़ गई। बेटा पिता का शव कंधे पर लिए ऑटो वाले से मिन्नतें कर रहा था तो शकुंतला उसे सहारा दे रही थीं। इससे पहले चिकित्सक की लापरवाही से मरीज की मौत होने का आरोप लगाते हुए इन्होंने अस्पताल प्रशासन के प्रति विरोध भी दर्ज कराया था। शायद यही बात जिम्मेदारों को इतनी नागवार गुजरी थी कि वो मानवता तक भूल गए।
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ये था मामला
गुलरिहा के रघुनाथपुर गांव निवासी हरिश्चंद्र निषाद (45) मजदूरी करके परिवार चलाता था। बुधवार सुबह नौ बजे चाय पीने के बाद हरिश्चंद्र को खांसी आने लगी और गले में दर्द होने लगा। इस पर घर वालों ने 108 नंबर पर फोन किया। एंबुलेंस बुलाई तो वो भटहट सामुदायिक केंद्र ले आई। करीब 30 मिनट के इलाज के बाद हरिश्चंद्र ने दम तोड़ दिया।
मौत के बाद रेफर की कोशिश
परिवारवालों का आरोप है कि चिकित्सक ने मरीज की मौत के बाद शरीर हिलाया-डुलाया और मेडिकल कॉलेज रेफर करने लगे। इस पर हरिश्चंद्र की पत्नी शकुंतला और बेटे अच्छेलाल ने कड़ी आपत्ति जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि मरीज चलकर इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचा था, लेकिन इलाज में लापरवाही हुई जिससे उसकी मौत हो गई।
मेडिकल कॉलेज नहीं ले गई एंबुलेंस
अच्छेलाल ने बताया कि 108 एंबुलेंस चालक से हम लोगों ने पहले अनुरोध किया था कि मेडिकल कॉलेज लेकर चलो लेकिन उसने जबरदस्ती भटहट सीएचसी पहुंचा दिया। डॉ. अजय देव कुलियार ने एक इंजेक्शन लगाया था कि पिता की तबियत बिगड़ने लगी। तब भी चिकित्सकों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और पिता की मौत हो गई।
मौत के बाद रेफर की कोशिश
परिवारवालों का आरोप है कि चिकित्सक ने मरीज की मौत के बाद शरीर हिलाया-डुलाया और मेडिकल कॉलेज रेफर करने लगे। इस पर हरिश्चंद्र की पत्नी शकुंतला और बेटे अच्छेलाल ने कड़ी आपत्ति जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। उनका आरोप था कि मरीज चलकर इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचा था, लेकिन इलाज में लापरवाही हुई जिससे उसकी मौत हो गई।
मेडिकल कॉलेज नहीं ले गई एंबुलेंस
अच्छेलाल ने बताया कि 108 एंबुलेंस चालक से हम लोगों ने पहले अनुरोध किया था कि मेडिकल कॉलेज लेकर चलो लेकिन उसने जबरदस्ती भटहट सीएचसी पहुंचा दिया। डॉ. अजय देव कुलियार ने एक इंजेक्शन लगाया था कि पिता की तबियत बिगड़ने लगी। तब भी चिकित्सकों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और पिता की मौत हो गई।