गंभीर आरोपों से लेकर क्लीन चिट तक, जानिए कर्नल पुरोहित की पूरी कहानी
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पिछले सात सालों से जेल में बंद लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मंगलवार को निर्दोष करार दिया है। लेकिन न्याय व्यवस्था को लेकर अब यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित निर्दोष थे तो उन्हें सात जेल के अंदर क्यों रहना पड़ा? पढ़ें, कर्नल पुरोहित पर लगे आरोप कितने गंभीर हैं जिनकी वजह से उन्हें सात साल जेल में गुजारने पड़े।
कर्नल पुरोहित को जिन आरोपों के कारण सात साल से जेल में गुजारने पड़े उनमें प्रमुख समझौता एक्सप्रेस धमाका है। दिल्ली से पाकिस्तान जाने वाली इस ट्रेन में 18 फरवरी 2007 को हरियाणा के पानीपत के पास धमाके हुए जिनमें 68 लोगों की जान गई और सैकड़ों लोग घायल हुए।
समझौता एक्सप्रेस के बाद 29 सितंबर 2008 को ही महाराष्ट्र के मालेगांव में धमाके हुए। इन धमाकों में 37 लोगों की मौत हो गई जबकि 125 लोग घायल हुए। मालेगांव धमाकों में महाराष्ट्र एंटी टेरर स्क्वॉड (एटीएस) जांच शुरू की तो लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित की संदिग्ध भूमिका मानी गई।
धमाकों के लिए पुरोहित ने दिया 60 किलो विस्फोटक?
महाराष्ट्र एटीएस ने आरोपी पुरोहित को मकोका के तहत अभियुक्त बनाया जिसके तहत पुरोहित को अंडर ट्रायल (बिना जमानत) जेल में डाल दिया गया। एटीएस मामले की जांच में आगे बढ़ते हुए कहा कि ऐसी आशंका है कि समझौता एक्सप्रेस धमाकों के लिए कर्नल पुरोहित ने ही 60 किलो आरडीएक्स (विस्फोटक) उपलब्ध कराया है।
लेकिन बाद में जांच में कहा गया इस धमाके में आरडीएक्स इस्तेमाल ही नहीं किया गया। महाराष्ट्र एटीएस जांच कर किसी निष्कर्ष पर पहुंचती इसके पहले 2011 में मालेगांव धमाकों का केस राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को दे दिया गया।
एनआईए ने मामले की नए सिरे से जांच की तब भी पुरोहित के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं जुटा पाई। यहां तक कि अपने अपने हाथ लेने के पांच बाद भी एनआईए ने पुरोहित के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की।
कर्नल पुरोहित को कैसे मिला 60 किलो विस्फोटक?
जी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, समझौता ब्लास्ट में कर्नल पुरोहित की ओर से धमाका करने वालों को 60 किलो आरडीएक्स उपलब्ध कराने के पीछे तर्क दिया गया कि जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के कब्जे से पुरोहित को 60 किलो आरडीएक्स मिला था। इस आरडीएक्स का इस्तेमाल पुरोहित ने समझौता एक्सप्रेस धमाकों के लिए किया, ऐसी आशंका महाराष्ट्र एटीएस ने व्यक्त की।
सेना के खुफिया विभाग में काम कर रहे लेफ्टीनेंट कर्नल पुरोहित से धमाकों के आरोपी के तौर पर अधिकारियों के आरडीएक्स के बारे में पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उनके पास जो आरडीएक्स था उसे उन्होंने झेलम नदी में डलवा दिया था।
गौरतलब है कि सेना के खुफिया विभाग में बतौर लेफ्टिनेंट कर्नल तैनात पुरोहित 'अभिनव भारत' नामक एक हिंदूवादी संगठन भी चलाते थे। आरोप है इस संगठन का मकसद पर्दे के पीछे हिंदू राष्ट्र की दिशा में काम करना था।
इसी संस्था के लिए कर्नल पुरोहित ने 21 लाख रुपए का चंदा जुटाया और इसे हिंदूवादी लोगों की मदद के लिए इस्तेमाल कर रहे थे। इसी लिंक को जोड़ते हुए महाराष्ट्र एटीएस ने माना कि कर्नल पुरोहित ने ही मालेगांव धमाकों और समझौता एक्सप्रेस धमाकों के लिए विस्फोटक उपलब्ध कराया होगा।
मामले पर क्या कहते हैं पुरोहित के परिजन?
मामले पर कर्नल पुरोहित की पत्नी अपर्णा का कहना है जब महाराष्ट्र एटीएस ने मध्यप्रदेश के पंचमढ़ी स्थित उनके घर छापामारा तो वह हैरान रह गई उन्हें पता नहीं चल पा रहा था कि उनके घर पर सेना आई या एमपी पुलिस है।
पेशे से होम्यौपैथ अपर्णा का कहना है कि उनके पति निर्दोष हैं और इसे साबित करने के लिए उनके पास हजारों पेज के कागजात हैं। उनके अनुसार, कर्नल पुरोहित ने कई आतंकवादी संगठनों के खिलाफ सफलतापूर्वक काम किया जिसके लिए उन्हें पुलिस और सेना से कई प्रशंसा पत्र मिल चुके हैं।
उन्होंने कहा कि अभी तक न तो एटीएस ने और न ही एनआई ने पुरोहित के खिलाफ कोई सबूत जुटा सकी है। उन्होंने कहा कि अगर पुरोहित के पास आरडीएक्स था तो उन्होंने उसे कहां रखा था और कैसे उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया इसका बाद जवाब अभी तक नहीं मिला। इसके बाद भी समझ नहीं आ रहा कि उन्हें जमानत क्यों नहीं दी जा रही है।