अस्पताल प्रशासन ने मृत नवजात के मां-बाप को शव बैग में ले जाने को कहा
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मां-बाप हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते फिर रहे थे। इसके बावजूद स्वास्थय कर्मियों का दिल नहीं पसीजा। मजबूर मां-बाप अपने बच्चे के शव को करीब 12 घंटे तक बैग में लेकर घूमते रहे लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें एंबुलेंस नहीं दी गई। हालांकि बाद में रेड क्रॉस ने दंपत्ति को एंबुलेंस मुहैया कराई और शव को ले जाने की कही।
दंपत्ति से रिश्तेदार ने बताया कि गरीब होने की वजह से मजबूर मां-बाप एंबुलेंस की मांग कर रहे थे लेकिन नाराज स्टाफ ने कहा कि इसे बैग में ले जाओ और जहां चाहों वहां फेंक दों। डेक्कन क्रोनिकल की खबर के अनुसार पिता का नाम येल्ल्म रमेश है और पति का नाम शशिकला है।
पहले भी ऐसा हो चुका है कई बार
बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी मजबूर को किसी अपने के लिए इस तरह के हालातों का सामना करना पड़ा हो। ओडिशा में ऐसा ही झकझोर कर रख देने वाला मामला सामनए आया था। यहां कालाहांडी में शख्स दाना मांझी अपनी पत्नी की लाश कंधे पर लेकर तकरीबन 12 किमी चला था। मांझी ने शव को चटाई और चादर में लपेट कर अपने कंधे पर लेकर गांव की ओर चल पड़ा था।
इतना ही नहीं कानपुर में अस्पताल से मदद नहीं मिलने पर मृतक का पिता उसके शव को कंधों पर लेकर घर की ओर चल दिया। यह नजारा देख जब मामला तूल पकड़ता नजर आया तो करीब आधा किलोमीटर दूर थानेदार ने पहुंचकर शव पोस्टमार्टम के लिए ले कब्जे में लिया।