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Hindi News ›   Crime ›   hospital staff forced to take body of stillborn baby in bag in chattishgarh

अस्पताल प्रशासन ने मृत नवजात के मां-बाप को शव बैग में ले जाने को कहा

Fri, 06 Jan 2017 02:36 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 06 Jan 2017 02:36 PM IST
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hospital staff forced to take body of stillborn baby in bag in chattishgarh
अपने नवजात बेटे को खो देने के आसूं मां-बाप की आंखों से टप-टप गिर रहे थे और वे अपने बच्चे के शव को घर लेकर जाना चाहते थे। लेकिन अस्पताल की ओर से किसी तरह की मदद नहीं मिली। मामला छत्तीसगढ़ के बस्तर के सरकारी अस्पताल कहा है, यहां प्रशासन ने एंबुलेंस का इंतजाम करने से मना कर दिया और उन्हें मृत बच्चे को बैग में ले जाने की सलाह दी। 
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मां-बाप हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते फिर रहे थे। इसके बावजूद स्वास्थय कर्मियों का दिल नहीं पसीजा। मजबूर मां-बाप अपने बच्चे के शव को करीब 12 घंटे तक बैग में लेकर घूमते रहे लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें एंबुलेंस नहीं दी गई। हालांकि बाद में रेड क्रॉस ने दंपत्ति को एंबुलेंस मुहैया कराई और शव को ले जाने की कही। 
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दंपत्ति से रिश्तेदार ने बताया कि गरीब होने की वजह से मजबूर मां-बाप एंबुलेंस की मांग कर रहे थे लेकिन नाराज स्टाफ ने कहा कि इसे बैग में ले जाओ और जहां चाहों वहां फेंक दों। डेक्कन क्रोनिकल की खबर के अनुसार पिता का नाम येल्ल्म रमेश है और पति का नाम शशिकला है।
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पहले भी ऐसा हो चुका है कई बार

hospital staff forced to take body of stillborn baby in bag in chattishgarh

बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी मजबूर को किसी अपने के लिए इस तरह के हालातों का सामना करना पड़ा हो। ओडिशा में ऐसा ही झकझोर कर रख देने वाला मामला सामनए आया था। यहां कालाहांडी में शख्स दाना मांझी अपनी पत्नी की लाश कंधे पर लेकर तकरीबन 12 किमी चला था। मांझी ने शव को चटाई और चादर में लपेट कर अपने कंधे पर लेकर गांव की ओर चल पड़ा था।

​इतना ही नहीं कानपुर में अस्पताल से मदद नहीं मिलने पर मृतक का पिता उसके शव को कंधों पर लेकर घर की ओर चल दिया।  यह नजारा देख जब मामला तूल पकड़ता नजर आया तो करीब आधा किलोमीटर दूर थानेदार ने पहुंचकर शव पोस्टमार्टम के लिए ले कब्जे में लिया।

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