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सऊदी अरब में फंसा था, वतन में कदम रखा तो बोला- मां मैं आ गया
amarujala.com, Presented By: विकास जांगड़ा
Updated Sun, 20 Aug 2017 12:53 PM IST
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सउदी अरब से भारत लौटने की तैयारी में दुर्गेश
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सऊदी अरब में पिछले छह महीने से फंसे अलीगढ़ के युवक दुर्गेश सिंघल ने जब वतन की धरती पर कदम रखा तो बोला- मां मैं आ गया...। शनिवार सुबह छह बजे दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उसकी फ्लाइट पहुंची। यहां पर क्लीयरेंस में उसे साढ़े चार घंटे का समय लगा।
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर दुर्गेश से सघन पूछताछ की गई। यह स्थिति इसलिए भी आई कि दुर्गेश के पास रियाद स्थित भारतीय दूतावास द्वारा जारी किया गया अस्थायी पासपोर्ट था। जब यहां के एयरपोर्ट स्टाफ ने देखा कि यह पासपोर्ट तो उन लोगों को दिया जाता है जिनका मूल पासपोर्ट उनके पास नहीं रहता, तो पूछताछ का स्तर और बढ़ गया। दुर्गेश ने बताया कि वह दिल्ली में है, और कुछ दिनों बाद अलीगढ़ आएगा। उसने मानसिक परेशानी का लंबा दौर झेला है। अब थोड़ा आराम करना चाहता है।
इससे पहले दुर्गेश ने बताया कि वह शुक्रवार रात डिपोर्टेशन सेंटर में बेड पर पड़ा बेहद चिंता में था। रात को अचानक उससे कहा गया कि उसे डिर्पोट किया जाना है। तुरंत 20 हजार रुपये जमा करवा दो। दुर्गेश के पास पैसे नहीं थे। ऐसे में एक बार फिर से दुबई में रह रहे अलीगढ़ के रूपेश पाठक संकटमोचक की भूमिका में नजर आए।
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दुर्गेश ने रूपेश पाठक को पूरी बात बताई। इसके बाद रूपेश पाठक ने तुरंत ही डिपोर्टेशन सेंटर पर 20 हजार रुपये उनके एकाउंट में ट्रांसफर करवा दिए। इसके बाद अगले आधे घंटे में रूपेश की फ्लाइट को भारत के लिए रवाना होना था। रात ठीक 11.30 बजे दुर्गेश के हवाई जहाज ने सऊदी अरब का आसमान छोड़ दिया।
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दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर दुर्गेश से सघन पूछताछ की गई। यह स्थिति इसलिए भी आई कि दुर्गेश के पास रियाद स्थित भारतीय दूतावास द्वारा जारी किया गया अस्थायी पासपोर्ट था। जब यहां के एयरपोर्ट स्टाफ ने देखा कि यह पासपोर्ट तो उन लोगों को दिया जाता है जिनका मूल पासपोर्ट उनके पास नहीं रहता, तो पूछताछ का स्तर और बढ़ गया। दुर्गेश ने बताया कि वह दिल्ली में है, और कुछ दिनों बाद अलीगढ़ आएगा। उसने मानसिक परेशानी का लंबा दौर झेला है। अब थोड़ा आराम करना चाहता है।
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इससे पहले दुर्गेश ने बताया कि वह शुक्रवार रात डिपोर्टेशन सेंटर में बेड पर पड़ा बेहद चिंता में था। रात को अचानक उससे कहा गया कि उसे डिर्पोट किया जाना है। तुरंत 20 हजार रुपये जमा करवा दो। दुर्गेश के पास पैसे नहीं थे। ऐसे में एक बार फिर से दुबई में रह रहे अलीगढ़ के रूपेश पाठक संकटमोचक की भूमिका में नजर आए।
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दुर्गेश ने रूपेश पाठक को पूरी बात बताई। इसके बाद रूपेश पाठक ने तुरंत ही डिपोर्टेशन सेंटर पर 20 हजार रुपये उनके एकाउंट में ट्रांसफर करवा दिए। इसके बाद अगले आधे घंटे में रूपेश की फ्लाइट को भारत के लिए रवाना होना था। रात ठीक 11.30 बजे दुर्गेश के हवाई जहाज ने सऊदी अरब का आसमान छोड़ दिया।
परिवार को गरीबी से उबारने गया था सऊदी अरब
दुर्गेश सिंघल के परिवार में माता सरोज देवी, पिता हरिश्चंद्र अग्रवाल के अलावा एक छोटा भाई पंकज और दो बड़ी बहनें हैं। एक बहन ज्योति की शादी शक्ति नगर में हो चुकी है। दूसरी बड़ी वहन प्रीती विधि की छात्रा है, जबकि छोटा भाई पंकज एक कांवेंट स्कूल में नौकरी करता है।
पिता का अनाज खरीदने और बेचने का काम है। दुर्गेश की तमन्ना थी कि परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जाए जिससे वह अपने जीवन स्तर को और ऊंचा उठा सकें। यही वजह थी कि दुर्गेश ने सऊदी अरब जाने का फैसला किया।
उसे सऊदी भेजने वालों ने कहा था कि वहां पर ड्राइवर की नौकरी करनी होगी। दुर्गेश ड्राइविंग जानता है, और बिजली का काम भी। ड्राइवर की नौकरी मिलने की बात पर उसने हां कर दी थी, लेकिन वहां पर उसे मजदूरी के काम में लगा दिया गया। उसे बताया गया कि वहां पर बहुत पैसा है।
मोहल्ले के ही रहने वाले कुछ लोगों ने उसे वहां के विषय में बताया। पासपोर्ट उसने अपने स्तर से बनवाया था। सऊदी अरब भेजने के लिए युवकों ने उससे 1.60 लाख रुपये लिए थे। कुछ पैसा और खर्च कर दिया था। इसके बाद 16 फरवरी 2017 को वह सऊदी अरब के लिए रवाना हो गया। उसे जहां भेजा गया वहां मजदूरी के काम पर लगा दिया गया। काम पर लगाने से पहले उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया।
पिता का अनाज खरीदने और बेचने का काम है। दुर्गेश की तमन्ना थी कि परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जाए जिससे वह अपने जीवन स्तर को और ऊंचा उठा सकें। यही वजह थी कि दुर्गेश ने सऊदी अरब जाने का फैसला किया।
उसे सऊदी भेजने वालों ने कहा था कि वहां पर ड्राइवर की नौकरी करनी होगी। दुर्गेश ड्राइविंग जानता है, और बिजली का काम भी। ड्राइवर की नौकरी मिलने की बात पर उसने हां कर दी थी, लेकिन वहां पर उसे मजदूरी के काम में लगा दिया गया। उसे बताया गया कि वहां पर बहुत पैसा है।
मोहल्ले के ही रहने वाले कुछ लोगों ने उसे वहां के विषय में बताया। पासपोर्ट उसने अपने स्तर से बनवाया था। सऊदी अरब भेजने के लिए युवकों ने उससे 1.60 लाख रुपये लिए थे। कुछ पैसा और खर्च कर दिया था। इसके बाद 16 फरवरी 2017 को वह सऊदी अरब के लिए रवाना हो गया। उसे जहां भेजा गया वहां मजदूरी के काम पर लगा दिया गया। काम पर लगाने से पहले उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया।
फंसाने वालों के खिलाफ जंग जारी रहेगी: दुर्गेश
तीन महीने तक दुर्गेश ने वहां मजदूरी की। आठवीं मंजिल पर मिट्टी पहुंचाने का काम उसे दिया गया था। तीन महीने तक उसे कोई पैसा भी नहीं दिया गया। तंग आकर एक दिन दुर्गेश रियाद भाग आया और यहां पर भारतीय दूतावास पहुंचा। यहां पर वह लाइन में लगा हुआ था, तभी बनारस में रहने वाले महताब ने उसे देखा और उसके विषय में जाना। महताब ने तीन महीने तक दुर्गेश को अपने घर में रखा। उसका खर्चा आदि उठाया। इसके बाद दुबई में रह रहे अलीगढ़ के युवक रूपेश पाठक ने उसकी स्वदेश वापसी के लिए विदेश मंत्रालय आदि में संपर्क कर प्रक्रिया शुरू कराई।
अलीगढ़। दुर्गेश से दो लाख रुपये लेकर उसे सऊदी अरब भेजने वालों के खिलाफ थाना बन्ना देवी में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है, लेकिन स्थानीय पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है। दुर्गेश ने कहा है कि वह तो वापस आ गया लेकिन न जाने कितने लोग हैं जो वहां पर फंसे हैं। उनको ऐेसे ही सब्जबाग दिखाकर भेजा जाता है। वह जब अलीगढ़ लौटकर आएगा तो एसएसपी से मुलाकात कर पूरी बात बताएगा। और जो रिपोर्ट दर्ज हुई है उसमें कार्रवाई करवाने की मांग करेगा। उसने कहा जब तक दोषियों को सजा नहीं हो जाती है तब तक उसकी न्याय के लिए जंग जारी रहेगी।
हम तो वापसी की उम्मीद ही छोड़ बैठे थे: बहन
अलीगढ़। अमर उजाला में दुर्गेश की वापसी की खबर पढ़कर बहन प्रीती के खुशी के आंसू छलके। दुर्गेश की मां इस समय अस्पताल में भर्ती हैं और पिता उनकी देखरेख में लगे हैं। बहन ने कहा हम तो उम्मीद ही छोड़ बैठे थे। बेटे के गम में मां की भी तबियत खराब हो गई। आज (शनिवार को) अखबार में खबर पढ़ कर सारी तकलीफें दूर हो गईं। प्रीती ने बताया कि कई कई दिनों तक घर में खाना नहीं बनता था। साथ ही मां बीमार रहती थीं तो मां को भी हम ज्यादा बताते नहीं थे। अब वह वापस आ गया है तो बेहद खुशी हो रही है।
अलीगढ़। दुर्गेश से दो लाख रुपये लेकर उसे सऊदी अरब भेजने वालों के खिलाफ थाना बन्ना देवी में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है, लेकिन स्थानीय पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है। दुर्गेश ने कहा है कि वह तो वापस आ गया लेकिन न जाने कितने लोग हैं जो वहां पर फंसे हैं। उनको ऐेसे ही सब्जबाग दिखाकर भेजा जाता है। वह जब अलीगढ़ लौटकर आएगा तो एसएसपी से मुलाकात कर पूरी बात बताएगा। और जो रिपोर्ट दर्ज हुई है उसमें कार्रवाई करवाने की मांग करेगा। उसने कहा जब तक दोषियों को सजा नहीं हो जाती है तब तक उसकी न्याय के लिए जंग जारी रहेगी।
हम तो वापसी की उम्मीद ही छोड़ बैठे थे: बहन
अलीगढ़। अमर उजाला में दुर्गेश की वापसी की खबर पढ़कर बहन प्रीती के खुशी के आंसू छलके। दुर्गेश की मां इस समय अस्पताल में भर्ती हैं और पिता उनकी देखरेख में लगे हैं। बहन ने कहा हम तो उम्मीद ही छोड़ बैठे थे। बेटे के गम में मां की भी तबियत खराब हो गई। आज (शनिवार को) अखबार में खबर पढ़ कर सारी तकलीफें दूर हो गईं। प्रीती ने बताया कि कई कई दिनों तक घर में खाना नहीं बनता था। साथ ही मां बीमार रहती थीं तो मां को भी हम ज्यादा बताते नहीं थे। अब वह वापस आ गया है तो बेहद खुशी हो रही है।