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डॉक्टर बोली- वेंटिलेटर एक करोड़ रुपए का आता है, बच्ची की इलाज में लापरवाही से मौत

Tue, 12 Feb 2019 08:46 AM IST
Shilpa Thakur क्राइम डेस्क, अमर उजाला
क्राइम डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Tue, 12 Feb 2019 08:46 AM IST
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Doctor asked parents of child to arrange ventilator worth rupees one crore in MP
प्रतीकात्मक तस्वीर

मध्यप्रदेश के सागर में डेढ़ साल की बालिका के इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप में एक महिला डॉक्टर को निंलबित किया गया है। प्रशासन द्वारा इस मामले में एक वीडियो वायरल होने के बाद डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की गई।


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सागर संभाग के आयुक्त मनोहर दुबे ने सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में बुरी तरह से जली बालिका अंशिका अहिरवार की इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप में जूनियर डॉक्टर ज्योति राऊत को निलंबित किया गया है। मामले में जांच के लिये आयुक्त के निर्देश पर अतिरिक्त आयुक्त वीरेन्द्र सिंह रावत के नेतृत्व में जांच समिति गठित की गई है। समिति 48 घंटे के अंदर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी। महिला डॉक्टर द्वारा इलाज के दौरान बच्ची के परिजनों को वेंटिलेटर की व्यवस्था करने का वीडियो वायरल हुआ था।

पीड़ित परिवार के ब्रजेन्द्र अहिरवार ने बताया कि भतीजी अंशिका शुक्रवार को घर में गर्म पानी में गिरने से गंभीर रूप से झुलस गई थी। परिजन उसे लेकर बीएमसी आए। डॉक्टरों ने बच्ची की हालत गंभीर बताते हुए करीब 70 फीसदी जले होने की बात कही थी। दोपहर बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी तो परिजन ने अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर बर्न वार्ड में डॉक्टर न होने की बात बताई थी।

कुछ देर बाद जूनियर डॉक्टर ज्योति राउत बर्न वार्ड पहुंच गई थीं। उन्होंने बच्ची को देखने के बाद कहा कि बच्ची सांस नहीं ले पा रही है, स्थिति काफी गंभीर है। डॉक्टर ने बताया कि उसे वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता है, लेकिन हमारे यहां वेंटिलेटर नहीं है। परिजन ने जोर दिया तो डॉक्टर ने बताया कि वेंटिलेटर एक करोड़ रुपए का आता है, अब नहीं हैं तो हम क्या कर सकते हैं, क्या आप वेंटिलेटर लाकर देंगे। इस पर परिजन और डॉक्टर में बहस हो गई। जब यह सारा घटनाक्रम बीएमसी में चल रहा था उसी दौरान बच्ची की मौत हो गई।

बीएमसी प्रबंधन ने शनिवार सुबह शव का पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद परिजनों ने प्रदर्शन किया और पुलिस में शिकायत कर बालिका का अंतिम संस्कार किया। ब्रजेन्द्र अहिरवार ने आरोप लगाया कि आईसीयू में वेंटिलेटर था बच्ची को वहां सपोर्ट पर रख सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

इस सारे मामले के बारे में बुंदेलखण्ड मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ जीएस पटेल ने बताया कि आईसीयू के वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर सकते थे। मैं शहर से बाहर था। अब हमारे डॉक्टर और परिजन में क्या बात हुई इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। हम जांच करा रहे हैं।

वहीं मामले पर डॉक्टर ज्योति राउत का कहना है, "ये वीडियो क्लिप एडिटिड है और इसमें पूरी बातचीत नहीं दिखाई गई है। मैं बच्ची के रिश्तेदारों से घिरी हुई थी और वे मुझपर अन्य डॉक्टरों को बुलाकर उसे इलाज देने के लिए अनावश्यक दबाव बढ़ा रहे थे। वहां कोई सिक्योरिटी नहीं थी। मैं पहले से ही बच्ची का इलाज कर रही थी और जितना बेहतर कर सकती थी उतना किया।" 

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