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कैसे, मामूली कारोबारी से भारतीय शेयर मार्केट का 'द बिग बुल' बने हर्षद मेहता

Tue, 29 Nov 2016 01:23 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 29 Nov 2016 01:23 PM IST
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after 24 years harshad mehta's brother and 5 convicted in 700 crore scam
harshad mehta

चर्चा में रहे हर्षद मेहता शेयर घोटाले में नया मोड़ सामने आया है। 24 साल पहले हुए इस बड़े घोटाले के मुख्य आरोपी हर्षद मेहता के भाई समेत 5 अन्य लोगों को दोषी पाया गया है। कोर्ट ने उन्हें 700 करोड़ रुपये के घोटाले का दोषी करार दिया। 

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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार जस्टिस शालिनी फनसालकर जोशी ने इस मामले में दोषियों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि 24 साल पहले हुए इस घोटाले के तहत नेशनल बैंक से करोड़ों रुपये निकालना एक गंभीर अपराध है।
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इतना ही नहीं इस घोटाले की वजह से देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा था, इसलिए दोषियों को माफ नहीं किया जा सकता। हालांकि, साल 2002 में हर्षद मेहता की मौत हो गई थी, लेकिन बाकी आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में सुनवाई जारी रही। इन आरोपियों में बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों समेंत कई स्टॉक ब्रोकर भी शामिल थे। 

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घोटाले की वजह से लगा था अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका

after 24 years harshad mehta's brother and 5 convicted in 700 crore scam

आरोप में भाई सुधीर और दीपक मेहता को दोषी पाया गया है। वहीं नेशनल हाउसिंग बैंक के अधिकारी सुरेश बाबू, सी. रविकुमार और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी आर. सीतारमन और एक स्टॉक ब्रोकर को 4 साल की सजा दी जा सकती है।

इन पर धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार करने के चलते करीब 12 लाख का जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, इसमें तीन लोगों को बरी भी किया गया है, जिसमें एक हर्षद मेहता का कजिन भी है। पुलिस के मुताबिक घोटाले के वक्त हितेन मेहता 19 साल का था।

हर्षद मेहता ने शेयर मार्केंट में किए कई ऐतिहासिक परिवर्तन

after 24 years harshad mehta's brother and 5 convicted in 700 crore scam
harshad mehta

बता दें कि 1990 में भारत इकोनॉमी के नए दौर से गुजर रहा था और ऐसे में इस तरह के घोटाले के सामने आने पर लोगों में गुस्सा देखा गया। दरअसल, हर्षद मेहता ने अपने साथियों के साथ मिलकर शेयर मार्केट में कई परिवर्तन किए थे। उन्होंने बैंकों को बिना बताए नेशनल बैंक के करोड़ों रुपये शेयर मार्केट में लगा दिए। बताते चलें कि हर्षद मेहता एक ऐसे शख्स थे जिन्होंने बहुत जल्दी पैसे कमाए थे और इन्हीं वजहों से वे काफी समय तक चर्चाओं में रहे।

दरअसल, हर्षद मेहता के गोरखधंधे का खुलासा 1992 में हुआ था। सवाल था कि आखिर हर्षद ने बैंकिंग ने नियमों का गलत फायदा कैसे उठाया। बैंकों के नियम के मुताबिक वे आपस में अल्पावधि का लेन देन करते हैं जिसमें एक दूसरे को गारंटी के आधार पर ऋण दिया जाता है। इसी का फायदा हर्षद ने उठाया क्योंकि उसे इन नियमों की बारीकी से जानकारी थी।

फर्जीवाड़ा कर लोगों के करोड़ों रुपये लगाए शेयर बाजार में

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harshad mehta

​उन्होंने अपने दो बैंक बनाए जिनमें एक था बैंक ऑफ कराड  (बीओके) और मेट्रोपॉलिटन को-ऑपरेटिव (एमसीबी) और इन्हीं के आधार पर बैंकों से पैसा उधार लेकर शेयर मार्केट में लगाना शुरू कर दिया। हर्षद ने इसके जरिए अरबों रुपया कमाया, लेकिन एक दिन उसके घोटाले का भंडाफोड़ हुआ और उसे जेल की हवा खानी पड़ी।

स्टॉक ब्रोकर के रूप में पहचाने गए हर्षद को गिरफ्तार किया गया उसके ऊपर 72 क्रिमिनल केस दर्ज किए गए। मीडिया खबरों के अनुसार हर्षद ने घोटाले को रफा दफा करने के लिए तत्काल प्रधानमंत्री को एक करोड़ रुपये की रिश्वत पेश की थी। लेकिन, घोटाले के करीब 10 साल बाद मेहता की मौत हो गई और उस दौरान भी उसके खिलाफ 27 केसों की सुनवाई चल रही थी।  

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